भारतीय बाजार ने सितंबर में अब तक का सबसे बेहतरीन प्रदर्शन किया है। फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन्स यानी फाडा के अनुसार, सितंबर में कुल 25,36,920 वाहनों का रजिस्ट्रेशन हुआ, जो पिछले साल की तुलना में 31.82 प्रतिशत ज्यादा है। महीने-दर-महीने भी ऑटो रिटेल सेल्स में 4.69 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। हालांकि, फाडा ने इस तेज ग्रोथ को समझने के लिए पिछले साल के कमजोर बेस को ध्यान में रखने की सलाह दी है। ऐसे में सवाल है कि सितंबर की रिकॉर्ड बिक्री के पीछे सिर्फ बेस इफेक्ट है या बाजार में वाकई मांग मजबूत हुई है? आइए जानते हैं सितंबर के आंकड़ों से लेकर अक्तूबर के फेस्टिव सीजन के आउटलुक तक पूरी जानकारी।
फाडा का क्या कहना है?
ट्रैक्टर की बिक्री महीने-दर-महीने घटी
ट्रैक्टर सेगमेंट का भी प्रदर्शन काफी जोरदार रहा। सितंबर में ट्रैक्टर की रिटेल बिक्री 76,906 यूनिट रही। यह पिछले साल के मुकाबले 13.75% ज्यादा है, लेकिन अगस्त की तुलना में इसमें 12.58% की गिरावट आई है। यानी सालाना आधार पर ट्रैक्टर की मांग मजबूत रही, लेकिन महीने-दर-महीने इसमें कमजोरी देखने को मिली।
ईवी रिटेल भी रिकॉर्ड ऊंचाई पर
सितंबर में इलेक्ट्रिक व्हीकल की रिटेल बिक्री भी अपने ऑल-टाइम हाई पर पहुंच गई। इस महीने करीब 3.34 लाख इलेक्ट्रिक व्हीकल बिके। कुल ऑटो रिटेल में EV की हिस्सेदारी यानी ईवी पेनिट्रेशन करीब 13% रही। यह आंकड़ा इशारा करता है कि इलेक्ट्रिक व्हीकल की मांग भी अब भारतीय ऑटो बाजार की कुल ग्रोथ में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
कारों में पेट्रोल और अल्टरनेटिव फ्यूल की हिस्सेदारी लगभग बराबर
अक्तूबर में कैसी बिक्री का अनुमान?
बढ़ती कीमतें बन सकती हैं चुनौती
अक्तूबर के लिए सबसे बड़ी चिंता अफोर्डेबिलिटी यानी ग्राहकों की खरीद क्षमता को लेकर है। फाडा के अनुसार, गाड़ियों की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से GST के फायदे का असर कम हो सकता है। अगर वाहनों की कीमतें बढ़ती रहती हैं, तो ग्राहकों के लिए नई कार या दूसरे वाहन खरीदना महंगा हो सकता है। ऐसे में फेस्टिव सीजन के दौरान मांग मजबूत रहने के बावजूद कीमतों का दबाव बाजार के लिए चुनौती बना रह सकता है।
पैसेंजर व्हीकल की इन्वेंटरी 43-45 दिन पर पहुंची
पैसेंजर व्हीकल सेगमेंट में डीलर्स के पास स्टॉक भी चिंता की वजह है। फिलहाल पैसेंजर व्हीकल इन्वेंटरी 43-45 दिन तक पहुंच गई है। यह फाडा के सुलझाएगए 21 दिन के स्तर से दोगुनी से भी ज्यादा है। यहां पर ज्यादा इन्वेंटरी का मतलब है कि डीलरशिप पर बड़ी संख्या में गाड़ियां लंबे समय तक स्टॉक में रह सकती हैं। ऐसे में कंपनियों और डीलर्स पर डिस्काउंट, ऑफर और दूसरे प्रमोशनल उपायों का दबाव भी बढ़ सकता है।
क्या अक्तूबर में जारी रहेगी ऑटो बाजार की रफ्तार?