जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग, कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश) ने एक कार डीलर को पुरानी (सेकंड-हैंड) लग्जरी कार के ग्राहक को 3.52 लाख रुपये की पूरी राशि लौटाने का आदेश दिया है। अध्यक्ष हिमांशु मिश्रा और सदस्य आरती सूद व नारायण ठाकुर की पीठ ने डीलर द्वारा कार का पूरा भुगतान लेने, सर्विस के बहाने गाड़ी वापस अपने कब्जे में लेने और फिर न तो गाड़ी लौटाने और न ही पैसे वापस करने के मामले में यह फैसला सुनाया है।
अदालत ने डीलर को निम्नलिखित भुगतान करने के निर्देश दिए हैं:
- मूल राशि का रिफंड: कार की खरीद और मरम्मत के नाम पर ली गई 3.52 लाख रुपये की रकम।
- मानसिक प्रताड़ना का मुआवजा: मानसिक कष्ट और परेशानी के लिए 30,000 रुपये का जुर्माना।
- मुकदमा खर्च: कानूनी लड़ाई के खर्च के रूप में 7,500 रुपये।
इस तरह डीलर को कुल 3.89 लाख रुपये से अधिक का भुगतान करने का आदेश दिया गया है।
कंज्यूमर कमिशन ने डीलर के इस रवैये पर क्या सख्त टिप्पणी की?
उपभोक्ता आयोग ने 3 सितंबर को फैसला सुनाते हुए डीलर के रवैये की कड़ी निंदा की।
कमिशन ने अपने आदेश में कहा:
"मरम्मत के बहाने गाड़ी को वापस अपने कब्जे में लेना, कार और पूरी पेमेंट दोनों को अपने पास रख लेना और डिलीवरी या रिफंड की ग्राहक की मांग को नजरअंदाज करना उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत सेवा में गंभीर कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार है।"
अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि पूरा भुगतान वसूलने के बाद ग्राहक को चालू और सही स्थिति में वाहन न सौंपना मूल संविदात्मक दायित्वों का सीधा उल्लंघन है।
क्या था पूरा मामला और डीलर ने ग्राहक को कैसे ठगा?
शिकायतकर्ता ने डीलर से एक पुरानी लग्जरी कार खरीदने का सौदा किया था। डीलर पर भरोसा करते हुए ग्राहक ने उसी दिन गूगल पे के जरिए 90,000 रुपये की टोकन राशि ट्रांसफर की। इसके बाद 25 जून 2024 को डीलर ने सर्विस और मरम्मत के नाम पर 45,000 रुपये मांगे, जिसका भुगतान भी गूगल पे के जरिए किया गया।
आगे चलकर 27 अगस्त 2024 को शिकायतकर्ता के पिता के खाते से डीलर के खाते में 2.10 लाख रुपये और ट्रांसफर किए गए। इस तरह डीलर को कुल 3.52 लाख रुपये का भुगतान कर दिया गया।
- खराब गाड़ी की डिलीवरी: पूरा पैसा मिलने के बाद जब गाड़ी डिलीवर की गई, तो उसमें तुरंत ही बैटरी और मैकेनिकल खराबी जैसी गंभीर समस्याएं आ गईं।
- वापस ली गाड़ी: शिकायत करने पर डीलर ने भरोसा दिया कि वह सभी कमियों को ठीक कर देगा और गाड़ी को दुरुस्त करके लौटाने का वादा करते हुए वापस ले गया।
- न गाड़ी दी, न पैसा: इसके बाद डीलर ने बहाने बनाने शुरू कर दिए और न तो कार ठीक करके लौटाई और न ही पैसे वापस किए। तंग आकर ग्राहक ने कंज्यूमर कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। नोटिस के बावजूद डीलर अदालत में पेश नहीं हुआ। जिसके बाद आयोग ने एकतरफा सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया।
उपभोक्ता आयोग ने सबूतों के आधार पर क्या निष्कर्ष निकाला?
आयोग ने पाया कि शिकायतकर्ता ने हलफनामे और बैंक रिकॉर्ड के जरिए यह साबित कर दिया कि उसने तीन किस्तों में सेकंड-हैंड लग्जरी कार की खरीद और मरम्मत के लिए कुल 3.52 लाख रुपये का भुगतान किया था। बैंक ट्रांजैक्शन के पुख्ता सबूतों के आधार पर अदालत ने माना कि डीलर ने पैसे ऐंठने के बावजूद चालू हालत में कार न देकर अनुबंध का उल्लंघन किया है।
इस फैसले से आम कार खरीदारों को क्या संदेश मिलता है?
यह ऐतिहासिक फैसला स्पष्ट करता है कि कार डीलर पेमेंट लेने के बाद मरम्मत के बहाने गाड़ी को दबाकर नहीं बैठ सकते। अगर आपने पूरा भुगतान कर दिया है और आपको खराब वाहन दिया गया है या गाड़ी वापस रोक ली गई है, तो यह कानूनन अपराध है।
ऐसे मामलों में उपभोक्ता अपने राज्य की हेल्पलाइन या राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन-
1915 पर संपर्क करके मदद ले सकते हैं।