देश और दुनियाभर में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) की मांग एवं बिक्री में जबरदस्त वृद्धि देखी जा रही है। आने वाले वर्षों में बिक्री और तेज रफ्तार से बढ़ने की उम्मीद है। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (आईईए) की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में 2024 की पहली तिमाही (जनवरी-मार्च) में ई-वाहनों की बिक्री 50 फीसदी से ज्यादा बढ़ी है। वैश्विक स्तर पर यह वृद्धि 25 फीसदी रही है।
ये आंकड़े बताते हैं कि ईवी बिक्री विभिन्न देशों में रफ्तार पकड़ रही है और इस साल दुनियाभर में रिकॉर्ड 1.70 करोड़ ई-कारें बिकने की उम्मीद है। इस अवधि में बिकने वाली हर पांच कारों में एक इलेक्ट्रिक होगी। 2030 तक ई-कारों की वैश्विक बिक्री 4 करोड़ के पार पहुंच सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2023 में दुनियाभर में कुल 1.40 करोड़ ई-कारें बिकीं। इस दौरान हर सप्ताह 2.50 लाख से ज्यादा ई-कारों का पंजीकरण हुआ। यह आंकड़ा 10 साल पहले के ई-कारों की सालाना बिक्री से ज्यादा है। पिछले साल वैश्विक स्तर पर बिकीं कुल 1.40 करोड़ ई-कारों में आधा से अधिक चीन में बनी थीं।
पंजीकरण में सालाना आधार पर 70 फीसदी की बढ़ोतरी
भारत में कारों की बिक्री की वृद्धि दर 2023 में 10 फीसदी से कम रही, जबकि ई-कारों का पंजीकरण सालाना आधार पर 70% बढ़कर 80,000 पहुंच गया। देश में बिकीं कुल कारों में ई-कारों का हिस्सा दो फीसदी रहा।
बिक्री बढ़ाने में सरकारी योजनाओं की भूमिका
ई-कारों की बिक्री बढ़ाने में फेम-2 सब्सिडी, पीएलआई योजना, कर लाभ व सरकार के 'गो इलेक्ट्रिक अभियान' की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
विश्व में घटी, देश में बढ़ी बिक्री
वैश्विक बाजारों में पिछले साल ई-दोपहिया वाहनों की बिक्री में 18 फीसदी की गिरावट रही। इसकी प्रमुख वजह कोविड से जुड़ी पाबंदियों की वजह से चीन में बिक्री में 25 फीसदी की गिरावट रही। इसके उलट, भारत में 2022 की तुलना में बिक्री में 40 फीसदी की तेजी रही। पिछले साल देश में कुल 8.80 लाख ई-दोपहिया वाहन बिके।
भारत ने चीन को पीछे छोड़ा
दुनिया में 2023 में करीब 10 लाख ई-तिपहिया वाहन बिके। इसमें भारत और चीन की हिस्सेदारी 95 फीसदी से ज्यादा रही। खास बात है कि बिक्री में भारत ने चीन को पीछे छोड़ दिया। इस अवधि में भारत ने 5.80 लाख से ज्यादा ई-तिपहिया बेचे, जो 65 फीसदी ज्यादा है। चीन में यह 8 फीसदी घटकर 3.20 लाख इकाई रह गया।
घरेलू ई-वाहन क्षेत्र में 200 अरब डॉलर के निवेश की क्षमता
रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन के अलावा भारत ही एकमात्र विकसित अर्थव्यवस्था है, जिसकी वैश्विक वेंचर कैपिटल (वीसी) बाजारों में महत्वपूर्ण हिस्सेदारी है। भारत के ईवी क्षेत्र में करीब 200 अरब डॉलर की निवेश क्षमता है, जो बताता है कि घरेलू उद्यमियों और स्टार्टअप के लिए अब भी काफी अवसर हैं।