स्टेलैंटिस ने 4.19 लाख जीप एसयूवी को किया रिकॉल
ऑटोमोबाइल कंपनी स्टेलैंटिस अमेरिका में 4,19,035 जीप वाहनों को रिकॉल कर रही है। कंपनी के अनुसार, कुछ वाहनों में मौजूद सॉफ्टवेयर एरर की वजह से दुर्घटना के समय साइड एयरबैग्स समय पर डिप्लॉय नहीं हो सकते। NHTSA ने बताया कि यह समस्या वाहन सुरक्षा मानकों का उल्लंघन कर सकती है और दुर्घटना के दौरान यात्रियों की सुरक्षा पर असर डाल सकती है।
कौन-कौन से मॉडल प्रभावित?
इस रिकॉल में दो मॉडल, 2022-2026 जीप ग्रैंड चेरोकी और 2023-2025 जीप ग्रैंड चेरोकी एल मुख्य रूप से शामिल हैं। एजेंसी के मुताबिक, खराब सॉफ्टवेयर के कारण ऑक्यूपेंट रेस्ट्रेंट कंट्रोलर मॉड्यूल यानी यात्री अवरोधक नियंत्रक मॉड्यूल सही तरीके से काम नहीं कर सकता, जिससे साइड एयरबैग्स के सक्रिय होने में देरी हो सकती है।
कंपनी क्या करेगी?
स्टेलैंटिस के डीलर्स प्रभावित वाहनों में ऑक्यूपेंट रेस्ट्रेंट कंट्रोलर मॉड्यूल के सॉफ्टवेयर को मुफ्त में अपडेट करेंगे। कंपनी का कहना है कि इस सुधार के बाद वाहन फिर से अमेरिकी फेडरेल मोटर व्हीकल सेफ्टी स्टैंडर्ड के अनुरूप हो जाएंगे। फिलहाल यह रिकॉल केवल अमेरिकी बाजार तक सीमित है। भारत या अन्य देशों में इन मॉडलों को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
Lucid Air EV में अचानक पावर लॉस की समस्या
इसके अलावा इलेक्ट्रिक वाहन निर्माता ल्यूसिड ने भी अमेरिका में 2,039 वाहनों को रिकॉल करने की घोषणा की है। यह रिकॉल 2024-2025 ल्यूसिड एयर मॉडलों को प्रभावित करेगा। NHTSA के अनुसार, इन वाहनों में लगे इनवर्टर में खराबी आने की संभावना है। अगर इनवर्टर क्षतिग्रस्त होता है तो वाहन की ड्राइव पावर अचानक बंद हो सकती है, जिससे दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है।
क्या है तकनीकी समस्या?
रिपोर्ट के मुताबिक, इनवर्टर फेल होने पर वाहन चलते समय अचानक पावर खो सकता है। यह स्थिति हाईवे या तेज रफ्तार में बेहद खतरनाक साबित हो सकती है।इलेक्ट्रिक वाहनों में इनवर्टर एक महत्वपूर्ण कंपोनेंट होता है, जो बैटरी की ऊर्जा को मोटर तक पहुंचाने का काम करता है। इसमें खराबी आने पर वाहन का संचालन प्रभावित हो सकता है।
ल्यूसिड कैसे करेगी समाधान?
कंपनी प्रभावित वाहनों के लिए ओवर द एयर (OTA) सॉफ्टवेयर अपडेट जारी करेगी। यह अपडेट संभावित खराबी की पहचान करेगा। अगर जांच के दौरान इनवर्टर में वास्तविक खराबी पाई जाती है, तो कंपनी उसे मुफ्त में बदल देगी। यह रिकॉल भी फिलहाल केवल अमेरिकी बाजार के लिए घोषित किया गया है। भारत में ल्यूसिड की मौजूदगी सीमित होने के कारण यहां इसका कोई प्रभाव फिलहाल नहीं माना जा रहा।
ऑटो इंडस्ट्री में क्यों बढ़ रहे हैं सॉफ्टवेयर आधारित रिकॉल?
आधुनिक वाहनों में इलेक्ट्रॉनिक्स और सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। एयरबैग कंट्रोल, ड्राइविंग सिस्टम, बैटरी मैनेजमेंट और सेफ्टी फीचर्स अब पूरी तरह डिजिटल कंट्रोल पर निर्भर हो चुके हैं। ऐसे में छोटी सॉफ्टवेयर गड़बड़ी भी बड़े सुरक्षा जोखिम में बदल सकती है। यही वजह है कि अब ऑटो कंपनियां तेजी से OTA अपडेट और सॉफ्टवेयर रिकॉल का सहारा ले रही हैं।
भारत पर क्या होगा असर?
फिलहाल दोनों कंपनियों ने इन रिकॉल्स को केवल अमेरिकी बाजार तक सीमित रखा है। भारत में जीप ग्रांड चेरोकी की बिक्री होती है, लेकिन अभी तक भारतीय में बिकने वाली यूनिट्स को लेकर कोई आधिकारिक रिकॉल नोटिस जारी नहीं किया गया है।