सेफ एक्जिट एक्ट में क्या बदलाव होंगे?
| बदलाव |
क्यों है जरूरी? |
| फिजिकल लीवर |
बिजली गुल होने पर भी दरवाजा हाथ से खुल सके। |
| साफ लेबलिंग |
अंधेरे या धुएं में भी हैंडल आसानी से दिखाई दे। |
| रेस्क्यू एक्सेस |
बाहर से बचाव दल (Police/Ambulance) तुरंत गेट खोल सके। |
- अनिवार्य मैनुअल रिलीज: हर कार में एक ऐसा फिजिकल हैंडल होना चाहिए, जो बिजली के बिना भी काम करे।
- इमरजेंसी मार्क: इमरजेंसी लीवर को स्पष्ट रूप से मार्क किया जाना चाहिए, ताकि हड़बड़ी में यात्री उसे तुरंत पहचान कर उसकी मदद ले सके।
- बाहरी एक्सेस: दुर्घटना के बाद फर्स्ट रिस्पॉन्डर्स (एम्बुलेंस या पुलिस) के लिए बाहर से दरवाजा खोलने का सीधा मैकेनिकल तरीका होना चाहिए।
इसका भारत पर क्या असर?
कानून समर्थकों का मानना है कि अगर अमेरिका पीछे रहा, तो वह चीन और यूरोप से सेफ्टी स्टैंडर्ड में पिछड़ जाएगा। अगर अमेरिका में ये नियम लागू होता है, तो भारत जैसे बाजारों पर भी असर पड़ेगा, क्योंकि कई कार कंपनियां एक ही ग्लोबल प्लेटफॉर्म पर गाड़ियां बेचती हैं। इसके अलावा जब दुनिया की दो बड़ी ताकतें किसी डिजाइन को असुरक्षित घोषित करती हैं, तो उसका असर पूरी दुनिया पर पड़ता है। भारत जैसे उभरते ईवी मार्केट के लिए ये एक बड़ा संकेत है। अब कंपनियों को स्टाइल से ज्यादा फेल सेफ मैकेनिज्म पर ध्यान देना होगा।
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अभी पूरी तरह तय नहीं
हालांकि सभी अमेरिकी सांसद इस पर पूरी तरह सहमत नहीं हैं। कुछ का मानना है कि नियम बनाने से पहले और तकनीकी रिसर्च जरूरी है, ताकि डिजाइन और इनोवेशन पर नकारात्मक असर न पड़े।
टेस्ला का बचाव और ताजा दावा क्या है?
टेस्ला का कहना है कि गंभीर दुर्घटना में कार अपने आप दरवाजे अनलॉक कर देती है और हैजर्ड लाइट्स भी खुद-ब-खुद चालू हो जाती हैं। इसके अलावा कंपनी ने अपनी वेबसाइट पर यह जानकारी भी अपडेट की है
क्या भविष्य की कारों में सादगी की वापसी होगी?
SAFE Exit Act यह संकेत देता है कि अब कानून निर्माता फ्यूचरिस्टिक डिजाइन और बुनियादी सुरक्षा के बीच एक स्पष्ट सीमा खींचना चाहते हैं। जैसे-जैसे कारें डिजिटल होती जा रही हैं, वैसे-वैसे एक साधारण मैकेनिकल बैकअप फिर से जरूरी माना जाने लगा है। ताकि आपात स्थिति में जान बचाई जा सके।