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RTO Rule: अब दूसरे राज्य में गाड़ी ले जाना होगा आसान, NOC का झंझट खत्म; जानें सरकार का नया ऑटो-क्लियरेंस प्लान

Tue, 10 Mar 2026 12:18 PM IST
Jagriti ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

NOC removal vehicle India: केंद्र सरकार अंतर-राज्यीय वाहन ट्रांसफर को आसान बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठा सकती है। प्रस्ताव के अनुसार, अब दूसरे राज्य में गाड़ी ट्रांसफर करने के लिए स्थानीय आरटीओ से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) लेने की जरूरत खत्म हो सकती है। जानिए इसके बारे में विस्तार से...
 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : एआई जनरेटेड
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विस्तार
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क्या आप भी एक राज्य से दूसरे राज्य में शिफ्ट होते समय आरटीओ के चक्कर काट-काटकर थक चुके हैं? तो आपके लिए खुशखबरी है, क्योंकि सरकार अब वर्षों पुरानी नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) की अनिवार्य प्रक्रिया को हमेशा के लिए खत्म करने पर विचार कर रही है। नीति आयोग (NITI Aayog) की सिफारिश पर एक नया ऑटो-जनरेटेड क्लियरेंस सिस्टम लागू हो सकता है, जिससे अब कागजी कार्रवाई नहीं, बल्कि वाहन (VAHAN) डेटाबेस खुद तय करेगा कि आपकी गाड़ी ट्रांसफर के लिए तैयार है या नहीं।
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NOC की जगह लेगा स्मार्ट सिस्टम
वर्तमान में, यदि आप दिल्ली की गाड़ी मुंबई ले जाते हैं, तो आपको दिल्ली RTO से भौतिक NOC लेनी पड़ती है। रिपोर्टों के मुताबिक, नीति आयोज गी ओर से गठित एक उच्च स्तरीय समिति ने सुझाव दिया है कि राज्यों के बीच वाहन ट्रांसफर के लिए एनओसी की आवश्यकता खत्म कर दी जाए। इसके बजाय ऑटो-जनरेटेड क्लियरेंस सिस्टम लागू करने की सिफारिश की गई है। इस प्रस्ताव की समीक्षा फिलहाल Ministry of Road Transport and Highways कर रहा है। माना जा रहा है कि अगर यह लागू होता है, तो वाहन ट्रांसफर की प्रक्रिया काफी तेज और सरल हो सकती है।

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वाहन (VAHAN) डेटाबेस की ताकत
चूंकि देश के लगभग सभी वाहनों का डेटा वाहन पोर्टल पर डिजिटल रूप से मौजूद है, इसलिए अब मैन्युअल चेकिंग की जरूरत नहीं है। नया सिस्टम खुद ही देख लेगा कि गाड़ी पर कोई पुराना चालान तो बकाया नहीं है? क्या रोड टैक्स का भुगतान हो चुका है? और वाहन पर कोई क्रिमिनल केस या चोरी का रिकॉर्ड तो नहीं है?

सेकंड-हैंड मार्केट में आएगी तेजी
ऑटो एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर एनओसी की आवश्यकता हटती है, तो देश में सेकंड-हैंड कार बाजार और तेजी  से बढ़ सकता है। अभी कई लोग दूसरे राज्य में वाहन बेचने या खरीदने से बचते हैं, क्योंकि ट्रांसफर प्रक्रिया जटिल होती है। नया सिस्टम लागू होने से प्रशासनिक बाधाएं कम होंगी और पारदर्शिता बढ़ेगी, जिससे पुरानी गाड़ियों की रीसेल वैल्यू पर भी सकारात्मक असर पड़ सकता है।

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अभी कैसे होता है वाहन ट्रांसफर
वर्तमान नियमों के अनुसार, अगर कोई व्यक्ति अपनी कार या बाइक दूसरे राज्य में ले जाकर रजिस्टर कराना चाहता है, तो उसे पहले मूल आरटीओ से एनओसी लेना पड़ता है। इसके लिए कई दस्तावेज जैसे रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC), फिटनेस सर्टिफिकेट, रोड टैक्स की रसीद और लंबित चालान या अन्य देनदारियों का रिकॉर्ड  जमा करना पड़ता है। ऐसे में यह प्रक्रिया कई बार लंबी और जटिल हो जाती है, खासकर उन लोगों के लिए जो नौकरी या अन्य कारणों से दूसरे राज्य में शिफ्ट होते हैं।

वाहन मालिकों को क्या होगा सीधा फायदा?
अगर यह सुधार लागू होता है, तो इसके कई फायदे हो सकते हैं—
  • राज्यों के बीच शिफ्ट होने वाले लोगों के लिए प्रक्रिया आसान होगी।
  • सेकंड-हैंड कार बाजार में तेजी आ सकती है।
  • वाहन बेचने और खरीदने की प्रक्रिया सरल होगीद्ध
  • फ्लीट ऑपरेटर्स और कंपनियों को राहत मिल सकती है।
  • RTO में कागजी काम और कम देरी हो सकती है।
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय फिलहाल इस प्रस्ताव की समीक्षा कर रहा है। अगर इसे हरी झंडी मिलती है, तो यह भारत की परिवहन व्यवस्था में अब तक का सबसे बड़ा डिजिटल रिफॉर्म साबित हो सकता है।
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