अब सुप्रीम कोर्ट में क्या उम्मीद है?
यह मामला अब सुप्रीम कोर्ट में पहुंच चुका है। डीलर्स को उम्मीद है कि कोर्ट कोई स्पष्ट निर्देश देगा जिससे यह फंसी हुई रकम वापस सिस्टम में आ सके।
इंडस्ट्री की मांग है:
दोनों ही विकल्पों से डीलर्स को वर्किंग कैपिटल में राहत मिल सकती है।
कार शोरूम में खड़ी गाड़ियां
- फोटो : अमर उजाला
छोटे डीलर्स पर क्या असर पड़ रहा है?
इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर यह पैसा वापस नहीं मिला और डीलर्स को इसे लिखकर खत्म करना पड़ा, तो छोटे डीलर्स के लिए यह बड़ा संकट बन सकता है।
संभावित असर:
क्या डीलर्स अपने नुकसान की भरपाई कर सकते हैं?
नहीं, ऑटो डीलर्स के पास कीमत बढ़ाने का अधिकार नहीं होता।
गाड़ियों की कीमत तय करने का अधिकार केवल कंपनियों (OEMs) के पास होता है। ऐसे में डीलर्स अपने नुकसान की भरपाई खुद नहीं कर सकते।
रोजमर्रा के कामकाज पर क्या असर पड़ रहा है?
वर्किंग कैपिटल फंसे होने की वजह से डीलर्स कई तरह की परेशानियों का सामना कर रहे हैं:
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नई गाड़ियों का स्टॉक मैनेज करना मुश्किल हो रहा है
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कैश फ्लो प्रभावित हो रहा है
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लोन और ब्याज चुकाने में दबाव बढ़ रहा है
कई डीलर्स को उस पैसे पर भी ब्याज देना पड़ रहा है जिसे वे इस्तेमाल ही नहीं कर पा रहे।
आगे क्या होगा?
अब सबकी नजर सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई पर है।
अगर कोई सकारात्मक फैसला आता है, तो इससे:
कुल मिलाकर क्या समझें?
2,500 करोड़ रुपये की फंसी हुई रकम सिर्फ एक वित्तीय मुद्दा नहीं है, बल्कि यह पूरे ऑटो रिटेल सेक्टर के लिए बड़ा जोखिम बन चुकी है।
अब समाधान पूरी तरह कोर्ट के फैसले पर निर्भर है, जो डीलर्स के भविष्य की दिशा तय करेगा।