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Compensation Cess: ऑटो डीलर्स का 2,500 करोड़ रुपये जीएसटी सेस फंसा, क्या सुप्रीम कोर्ट से मिलेगी राहत?

Mon, 23 Mar 2026 10:57 PM IST
Amar Sharma ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

भारत में ऑटो डीलर्स नकदी की किल्लत का सामना कर रहे हैं। क्योंकि लगभग 2,500 करोड़ रुपये का जीएसटी मुआवजा सेस इलेक्ट्रॉनिक कैश लेजर्स में फंसा हुआ है। 
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI
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विस्तार
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भारत के ऑटो रिटेल सेक्टर में इस समय बड़ी वित्तीय परेशानी सामने आई है। करीब 2,500 करोड़ रुपये की रकम जीएसटी कम्पनसेशन सेस के तहत फंसी हुई है। जिससे डीलर्स को रोजमर्रा के कामकाज में दिक्कत हो रही है।

यह पैसा डीलर्स के इलेक्ट्रॉनिक कैश लेजर में मौजूद है। लेकिन टैक्स सिस्टम में बदलाव के बाद इसे इस्तेमाल करने का कोई स्पष्ट तरीका नहीं बचा है।

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यह पैसा इस्तेमाल क्यों नहीं हो पा रहा?
डीलर्स के पास मौजूद यह रकम कानूनी रूप से उनकी है। लेकिन मौजूदा नियमों में इसे उपयोग करने या निकालने की कोई व्यवस्था नहीं है।
इस वजह से यह पैसा “ब्लॉक” हो गया है और कारोबार में इस्तेमाल नहीं हो पा रहा।

अब सुप्रीम कोर्ट में क्या उम्मीद है?
यह मामला अब सुप्रीम कोर्ट में पहुंच चुका है। डीलर्स को उम्मीद है कि कोर्ट कोई स्पष्ट निर्देश देगा जिससे यह फंसी हुई रकम वापस सिस्टम में आ सके।

इंडस्ट्री की मांग है:

  • या तो इस रकम का सीधा रिफंड दिया जाए

  • या इसे मौजूदा जीएसटी देनदारियों के साथ एडजस्ट करने की अनुमति मिले

दोनों ही विकल्पों से डीलर्स को वर्किंग कैपिटल में राहत मिल सकती है।

कार शोरूम में खड़ी गाड़ियां - फोटो : अमर उजाला

छोटे डीलर्स पर क्या असर पड़ रहा है?
इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर यह पैसा वापस नहीं मिला और डीलर्स को इसे लिखकर खत्म करना पड़ा, तो छोटे डीलर्स के लिए यह बड़ा संकट बन सकता है।

संभावित असर:

  • कई डीलरशिप बंद हो सकती हैं

  • नौकरियां जा सकती हैं

  • लोन देने वाले संस्थानों पर दबाव बढ़ सकता है


क्या डीलर्स अपने नुकसान की भरपाई कर सकते हैं?
नहीं, ऑटो डीलर्स के पास कीमत बढ़ाने का अधिकार नहीं होता।
गाड़ियों की कीमत तय करने का अधिकार केवल कंपनियों (OEMs) के पास होता है। ऐसे में डीलर्स अपने नुकसान की भरपाई खुद नहीं कर सकते।

रोजमर्रा के कामकाज पर क्या असर पड़ रहा है?
वर्किंग कैपिटल फंसे होने की वजह से डीलर्स कई तरह की परेशानियों का सामना कर रहे हैं:

  • नई गाड़ियों का स्टॉक मैनेज करना मुश्किल हो रहा है

  • कैश फ्लो प्रभावित हो रहा है

  • लोन और ब्याज चुकाने में दबाव बढ़ रहा है

कई डीलर्स को उस पैसे पर भी ब्याज देना पड़ रहा है जिसे वे इस्तेमाल ही नहीं कर पा रहे।

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कार शोरूम - फोटो : AI

आगे क्या होगा?
अब सबकी नजर सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई पर है।
अगर कोई सकारात्मक फैसला आता है, तो इससे:

  • डीलर्स की लिक्विडिटी सुधरेगी

  • कारोबार में स्थिरता आएगी

  • पूरे ऑटो रिटेल नेटवर्क को राहत मिलेगी


कुल मिलाकर क्या समझें?
2,500 करोड़ रुपये की फंसी हुई रकम सिर्फ एक वित्तीय मुद्दा नहीं है, बल्कि यह पूरे ऑटो रिटेल सेक्टर के लिए बड़ा जोखिम बन चुकी है।
अब समाधान पूरी तरह कोर्ट के फैसले पर निर्भर है, जो डीलर्स के भविष्य की दिशा तय करेगा।

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