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नई बाइक ने 294 दिन सर्विस सेंटर में रुलाया: तंग आकर कोर्ट पहुंचा ग्राहक, अब कंपनी भरेगी 5.1 लाख का हर्जाना

Sat, 23 May 2026 05:58 PM IST
Suyash Pandey ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Royal Enfield GT 650 Case: रॉयल एनफील्ड को अपनी Continental GT 650 बाइक में लगातार आने वाली खराबियों के मामले में बड़ा झटका लगा है। कोयंबटूर जिला उपभोक्ता आयोग ने कंपनी और उसके अधिकृत डीलर को एक ग्राहक को ₹5.1 लाख का मुआवजा देने का आदेश दिया है। शिकायतकर्ता के मुताबिक, बाइक खरीदने के बाद से उसमें बार-बार मैकेनिकल और इलेक्ट्रिकल समस्याएं आती रहीं, जिसके चलते उसे कई शहरों के सर्विस सेंटर के चक्कर लगाने पड़े। आयोग ने इसे सेवा में कमी मानते हुए मानसिक तनाव, समय और आर्थिक नुकसान के लिए मुआवजा देने का फैसला सुनाया।
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Royal Enfield Continental GT 650 - फोटो : Royal Enfield
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विस्तार
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अगर आप कोई नई प्रीमियम बाइक खरीदें और वो चलने से ज्यादा सर्विस सेंटर में खड़ी रहे तो आपको कैसा लगेगा? ऐसा ही कुछ हुआ कोयंबटूर के एक ग्राहक के साथ। उनकी Royal Enfield Continental GT 650 में इतनी दिक्कतें आईं कि परेशान होकर उन्हें कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा। अब उपभोक्ता फोरम ने रॉयल एनफील्ड और उसके डीलर पर 5.1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला।

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क्या है पूरा विवाद?

कोयंबटूर के रहने वाले एडवोकेट उथरेश गोबू ने मई 2022 में रॉयल एनफील्ड की मशहूर कैफे रेसर बाइक, Continental GT 650 खरीदी थी। शिकायत के मुताबिक, डिलीवरी के कुछ दिनों बाद ही बाइक में मेकेनिकल और इलेक्ट्रिकल (वायरिंग आदि) से जुड़ी दिक्कतें आनी शुरू हो गईं। इसके चलते बाइक को बार-बार वर्कशॉप ले जाना पड़ा।


294 दिन सर्विस सेंटर में ही खड़ी रही बाइक

इस मामले की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि बाइक खरीदने के बाद से वह कुल मिलाकर 294 दिनों तक सर्विस सेंटर में ही खड़ी रही। मालिक ने कोर्ट को बताया कि बाइक के कई अहम हिस्सों में बार-बार तकनीकी खराबी आ रही थी। स्थिति इतनी खराब थी कि बाइक का इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर (मीटर) 6 बार और चाबी का सेट (कीसेट) 3 बार बदलना पड़ा। इसके अलावा सस्पेंशन, थ्रॉटल बॉडी, इलेक्ट्रिकल वायरिंग, सेंसर और साइलेंसर जैसे मुख्य पार्ट्स को भी बार-बार रिप्लेस किया गया।

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परेशान होकर मालिक ने इसे कोयंबटूर से लेकर पुणे, मुंबई, नोएडा, दिल्ली और कुल्लू तक के सर्विस सेंटरों पर दिखाया। कंपनी ने वारंटी के तहत पार्ट्स तो बदले, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान कभी नहीं निकला। बार-बार वर्कशॉप के चक्कर काटने और बाइक के लंबे समय तक सर्विस सेंटर में रहने के कारण ग्राहक को अपने पेशेवर काम में भारी नुकसान उठाना पड़ा और भारी मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ा।


कागजों में भी की गई थी गड़बड़ी

परेशानी सिर्फ बाइक की खराबी तक सीमित नहीं थी। ग्राहक ने आरोप लगाया कि डीलर ने इंश्योरेंस के लिए बताई गई कीमत से ज्यादा पैसे वसूले। इसके अलावा रजिस्ट्रेशन के दौरान भी लापरवाही बरती गई और RC (रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट) पर मालिक के नाम की स्पेलिंग गलत लिख दी गई।


उपभोक्ता फोरम ने क्या फैसला सुनाया?

कोयंबटूर के जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने मामले से जुड़े सभी सर्विस रिकॉर्ड, बिल और जॉब कार्ड जैसे दस्तावेजों की बारीकी से जांच की। इन सबूतों को देखने के बाद कोर्ट ने इसे सीधे तौर पर सेवा में कमी करार दिया है। इस फैसले के तहत, आयोग ने रॉयल एनफील्ड और उसके डीलर, भारत ऑटोमोटिव्स को संयुक्त रूप से जिम्मेदार ठहराते हुए ग्राहक को मानसिक परेशानी और शारीरिक कष्ट के लिए 5 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया है। 

इसके अलावा, कानूनी लड़ाई में हुए खर्च के तौर पर अतिरिक्त 10 हजार रुपये का भुगतान करने का भी आदेश दिया गया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यह पूरी रकम कंपनी को 2 महीने के भीतर चुकानी होगी। अगर तय समय सीमा के भीतर भुगतान नहीं किया जाता है तो कंपनी को इस राशि पर 12% सालाना की दर से ब्याज भी देना होगा।

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