वैकल्पिक समाधान की तलाश शुरू
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वैकल्पिक समाधान पर काम जारी
श्रद्धा सूरी ने बताया कि इंडस्ट्री ने समाधान की दिशा में काम शुरू कर दिया है। भारत के पास इन मैग्नेट्स के भंडार मौजूद हैं, लेकिन प्रोसेसिंग टेक्नोलॉजी की जरूरत है। सरकार और इंडस्ट्री दोनों इस दिशा में एकमत हैं।
वह कहती हैं, “यह संकट हमारे लिए एक वेक-अप कॉल है। अगर अब भी नहीं चेते, तो भविष्य में बड़ी दिक्कतें होंगी।”
लॉजिस्टिक्स में भी चुनौती, कैश फ्लो पर असर
मारवाह ने बताया कि भू-राजनीतिक संकटों की वजह से लॉजिस्टिक्स और फ्रेट सेक्टर में भी बाधाएं आ रही हैं। कई गलियारों के बंद होने से इन्वेंटरी बढ़ रही है और वर्किंग कैपिटल पर दबाव बढ़ा है।
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संकट के बावजूद FY25 में ऑटो कंपोनेंट इंडस्ट्री का टर्नओवर 6.73 लाख करोड़ रुपये (USD 80.2 बिलियन) रहा, जो FY24 के मुकाबले 10% ज्यादा है। FY20 से FY25 के बीच इंडस्ट्री ने 14% की CAGR से ग्रोथ की है।
ACMA का मानना है कि अब भारत को हाई लोकलाइजेशन और खुद की प्रोसेसिंग टेक्नोलॉजी की ओर बढ़ना होगा। यह सिर्फ एक इंडस्ट्री संकट नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय चुनौती है, जिसका समाधान दीर्घकालिक नीति और तकनीकी निवेश से ही संभव है।
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