नागपुर में रैपिडो ऐप के फाउंडर्स पर एफआईआर दर्ज: बिना सरकारी मंजूरी के 'पेट्रोल बाइक टैक्सी' चलाने का आरोप
बिना इजाजत बाइक टैक्सी चलाना पड़ा भारी: नागपुर RTO की शिकायत पर रैपिडो के संस्थापकों पर पुलिस केस दर्ज
मशहूर राइड-हेलिंग ऐप 'रैपिडो' (Rapido) के संस्थापकों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। राज्य सरकार की अनुमति के बिना अवैध रूप से "पेट्रोल से चलने वाली" बाइक टैक्सी सेवाओं का संचालन करने के आरोप में नागपुर में कंपनी के संस्थापकों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।
एक पुलिस अधिकारी ने जानकारी देते हुए बताया कि नागपुर (शहर) क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) के मोटर वाहन निरीक्षक विशाल मधुकरराव भोवते ने राज्य सरकार की ओर से इस मामले की शिकायत दर्ज कराई थी। इस शिकायत के आधार पर, रैपिडो ऐप का संचालन करने वाली कंपनी 'रूपेन ट्रांसपोर्टेशन सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड' के तीन संस्थापकों- ऋषिकेश एस आर, पवन गुंटुपल्ली और अरविंद संका के खिलाफ नागपुर के सीताबल्डी पुलिस स्टेशन में केस दर्ज कर लिया गया है।
आरटीओ द्वारा दी गई शिकायत में इस बात का पूरा ब्यौरा दिया गया है कि उन्होंने किस तरह से इस अवैध परिवहन का भंडाफोड़ किया:
विशेष अभियान और फर्जी बुकिंग: 23 जून को आरटीओ ने अवैध यात्री परिवहन के खिलाफ एक विशेष अभियान चलाया था। इसी जांच के दौरान आरटीओ के अधिकारियों ने जाल बिछाते हुए खुद रैपिडो ऐप के जरिए 'रवि भवन' से 'प्रियदर्शिनी कॉलोनी' तक के लिए एक बाइक राइड बुक की, जिसका किराया 22 रुपये तय हुआ था।
निरीक्षण और जब्ती: बुकिंग के बाद तय नंबर (MH-31/GC-0850) की बाइक पिकअप पॉइंट पर पहुंची। आरटीओ टीम ने उसे रोक लिया और जांच के लिए आरटीओ कार्यालय ले आई। जांच में पाया गया कि बिना किसी आवश्यक लाइसेंस या परमिट के एक निजी दोपहिया वाहन का इस्तेमाल व्यावसायिक तौर पर बाइक टैक्सी के रूप में किया जा रहा था। इसके तुरंत बाद वाहन को जब्त कर लिया गया और मोटर वाहन अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई की गई।
आरटीओ निरीक्षक विशाल मधुकरराव भोवते द्वारा सौंपी गई लिखित शिकायत में रैपिडो कंपनी पर कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। जिनकी डिटेल्स नीचे दी गई है:
सरकारी मंजूरी का न होना
शिकायत के मुताबिक, रैपिडो कंपनी को महाराष्ट्र सरकार या क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण (RTA) से राज्य में पेट्रोल से चलने वाली बाइक टैक्सी सेवाओं को संचालित करने की कोई मंजूरी या अप्रूवल नहीं मिला है।
निजी वाहनों का व्यावसायिक उपयोग
कंपनी पर आरोप है कि उसने नियमों के विपरीत जाकर निजी (व्हाइट प्लेट) वाहनों को व्यावसायिक यात्री परिवहन (कमर्शियल उपयोग) के लिए इस्तेमाल करने के लिए बढ़ावा दिया। जो कि सीधे तौर पर परिवहन नियमों का उल्लंघन है।
यात्रियों की सुरक्षा को खतरा
निजी वाहनों का इस तरह बिना परमिट के इस्तेमाल करने से यात्रा करने वाले आम यात्रियों की सुरक्षा पूरी तरह से दांव पर लग जाती है। क्योंकि इन वाहनों के पास कमर्शियल गाड़ियों जैसी सुरक्षा गाइडलाइंस नहीं होतीं।
सरकार को वित्तीय नुकसान
बिना वैध परमिट, टैक्स और लाइसेंस के कमर्शियल काम करने से राज्य सरकार को मिलने वाले राजस्व (टैक्स) का नुकसान हो रहा है। जिससे सरकार को भारी वित्तीय घाटा उठाना पड़ रहा है।
सीताबल्डी पुलिस स्टेशन के अधिकारी के अनुसार, मामले की गंभीरता को देखते हुए रैपिडो के तीनों संस्थापकों के खिलाफ कानून की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है:
भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराएं
इस मामले में नए कानून के तहत बीएनएस (BNS) की धारा 318 (3) और 3 (5) लगाई गई है, जो धोखाधड़ी और समान मंशा से किए गए अपराधों से जुड़ी हैं।
मोटर वाहन (MV) अधिनियम की धाराएं
परिवहन नियमों की धज्जियां उड़ाने के लिए एमवी एक्ट की धारा 66, 93, 192 ए, 193 और 199 के तहत मामला दर्ज किया गया है। ये धाराएं बिना परमिट गाड़ी चलाने और नियमों के उल्लंघन से संबंधित हैं।
सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम की धारा
चूंकि यह पूरा अवैध नेटवर्क एक मोबाइल एप्लिकेशन (डिजिटल माध्यम) के जरिए चलाया जा रहा था, इसलिए आईटी एक्ट की धारा 66 (डी) भी लगाई गई है, जो कंप्यूटर संसाधनों का उपयोग करके पहचान छिपाने या धोखाधड़ी करने से जुड़ी है।
पुलिस अधिकारी ने अंत में बताया कि मामला दर्ज होने के बाद अब इस पूरे प्रकरण की आगे की जांच तेजी से चल रही है।