भारत में मारुति का यह चौथा प्लांट कितना विशाल है?
गुरुग्राम, मानेसर और गुजरात के बाद खरखौदा में स्थित यह मैन्युफैक्चरिंग प्लांट भारत में मारुति सुजुकी की चौथी सबसे बड़ी फैक्ट्री है:
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नींव से उत्पादन तक का सफर: इस प्लांट की आधारशिला प्रधानमंत्री मोदी ने अगस्त 2022 में वर्चुअली रखी थी। सुजुकी मोटर कॉर्पोरेशन की इस भारतीय सहायक कंपनी ने 25 फरवरी 2025 से यहां कमर्शियल प्रोडक्शन (व्यावसायिक उत्पादन) शुरू कर दिया था।
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उत्पादन क्षमता: फिलहाल इस प्लांट की दो मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स चालू हैं, जिनकी संयुक्त उत्पादन क्षमता सालाना 5 लाख गाड़ियां बनाने की है। कंपनी की योजना चरणों में इसे बढ़ाकर हर साल 10 लाख गाड़ियां बनाने की है।
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सप्लायर पार्क और जमीन: लगभग 800 एकड़ में फैला यह प्लांट एक एकीकृत सप्लायर पार्क से लैस है। ताकि काम की क्षमता को बेहतर किया जा सके और मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को मजबूत बनाया जा सके।
इस महा-प्रोजेक्ट से देश को क्या फायदे होंगे?
मारुति सुजुकी ने भारत के लिए कुल 35,000 करोड़ रुपये का निवेश तय किया है। जब यह खरखौदा कॉम्प्लेक्स पूरी तरह विकसित हो जाएगा, तो इसके बड़े आर्थिक फायदे दिखेंगे:
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हजारों नौकरियां: इस प्लांट के जरिए सीधे तौर पर 21,000 से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार पैदा होंगे।
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अप्रत्यक्ष रोजगार: इसके अलावा, सहायक उद्योगों, लॉजिस्टिक्स प्रदाताओं और कलपुर्जे बनाने वाले सप्लायर्स के जरिए भी बड़े पैमाने पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
क्यों कहा जा रहा है इसे भारत का सबसे हाई-टेक 'स्मार्ट फैक्ट्री'?
यह प्लांट मारुति सुजुकी के 'सुजुकी स्मार्ट फैक्ट्री' कॉन्सेप्ट पर आधारित है और इसे भविष्य की इंडस्ट्री 5.0 टेक्नोलॉजी को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है:
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इंसान और रोबोट की जुगलबंदी: इसमें एआई-संचालित इंसानी समझ रखने वाले सहयोगी रोबोट, जिन्हें 'कोबॉट्स' (Cobots) कहा जाता है, का इस्तेमाल किया गया है। ये रोबोट काम की सटीकता, उत्पादकता और कार्यस्थल की सुरक्षा को कई गुना बढ़ा देते हैं।
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100% पर्यावरण के अनुकूल: यह प्लांट पूरी तरह से 'ग्रीन' है। यह 100 प्रतिशत रिन्यूएबल इलेक्ट्रिसिटी (नवीकरणीय बिजली) पर चलेगा। यहां पानी की 100 प्रतिशत रीसाइक्लिंग होगी और यह एक 'जीरो लिक्विड डिस्चार्ज' यूनिट के रूप में काम करेगा।
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बायोमास और क्लीन लॉजिस्टिक्स: मारुति सुजुकी की योजना इसी वित्त वर्ष 2026-27 के भीतर यहां रोजाना 10 टन क्षमता वाला एक बायोगैस प्लांट शुरू करने की भी है। साथ ही, प्रदूषण कम करने और पर्यावरण के अनुकूल माल ढुलाई के लिए प्लांट के अंदर ही एक रेलवे साइडिंग (इन-प्लांट रेलवे ट्रैक) बनाई जा रही है, जिससे ट्रेनों के जरिए गाड़ियों को देशभर में भेजा जा सके।
'मेक इन इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड' का बड़ा कदम: कंपनी के अनुसार, खरखौदा प्रोजेक्ट भारत को ग्लोबल हब बनाने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर है। मारुति सुजुकी आज भी भारत की सबसे बड़ी पैसेंजर व्हीकल निर्माता कंपनी बनी हुई है। जिसका देश की कुल पैसेंजर गाड़ियों की बिक्री में लगभग आधा हिस्सा (50%) है।