भारत को इससे कितना फायदा हुआ?
प्रधानमंत्री के अनुसार:
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एक दशक पहले एथेनॉल ब्लेंडिंग सिर्फ 1 प्रतिशत थी
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अब यह बढ़कर 20 प्रतिशत के करीब पहुंच गई है
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इसके कारण भारत ने पिछले साल करीब 4.5 करोड़ बैरल कम तेल आयात किया
यह ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से बड़ा फायदा माना जा रहा है।
क्या E20 को लेकर विवाद भी हैं?
E20 पेट्रोल को लेकर कुछ चिंताएं भी सामने आई हैं।
कई वाहन मालिकों ने दावा किया है कि:
खासतौर पर:
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अप्रैल 2023 से पहले बने वाहन पूरी तरह E20 कम्पैटिबल नहीं हैं
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उनमें इंजन नॉकिंग, जंग और पाइप में खराबी जैसी समस्याएं हो सकती हैं
हालांकि, सड़क मंत्री नितिन गडकरी और तेल मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बार-बार इस बात से इनकार किया है, और इस मुद्दे पर गलत जानकारी के प्रति आगाह किया है।
सरकार और इंडस्ट्री का क्या कहना है?
सरकार और ऑटो इंडस्ट्री इन चिंताओं को खारिज करती रही है।
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SIAM के अनुसार, E20 से माइलेज थोड़ा कम हो सकता है
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लेकिन यह सुरक्षा के लिहाज से जोखिम नहीं है
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लाखों वाहन पहले से E20 पर चल रहे हैं और बड़े खराबी की रिपोर्ट नहीं आई
सरकार का दावा है कि:
क्या E20 पर कानूनी विवाद भी हुआ?
यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंचा था।
सरकार ने कोर्ट में कहा कि:
क्या एथेनॉल ब्लेंडिंग और बढ़ाई जा सकती है?
ऑल इंडिया डिस्टिलर्स एसोसिएशन (AIDA) ने सुझाव दिया है कि:
साथ ही:
जैसे सुझाव भी दिए गए हैं।
ऊर्जा रणनीति का अहम हिस्सा बना
E20 पेट्रोल भारत की ऊर्जा रणनीति का अहम हिस्सा बनता जा रहा है।
जहां एक तरफ यह तेल आयात घटाने और पर्यावरण सुधारने में मदद कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ पुराने वाहनों और माइलेज को लेकर बहस जारी है।
आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि भारत एथेनॉल ब्लेंडिंग को किस स्तर तक ले जाता है और इसके साथ इंफ्रास्ट्रक्चर को कैसे मजबूत करता है।