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पीएम ई-ड्राइव योजना से देश में आई इलेक्ट्रिक क्रांति: मंत्रालय ने बताया- 26.5 लाख से अधिक EV की बिक्री दर्ज

Tue, 04 Aug 2026 06:45 PM IST
Amar Sharma ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

देश में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत अब तक 26.54 लाख से अधिक इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री को समर्थन मिला है। भारी उद्योग मंत्रालय ने लोकसभा में यह जानकारी दी।
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PM E-Drive Scheme - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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भारतीय ऑटोमोबाइल क्षेत्र को पर्यावरण-अनुकूल बनाने और इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर तेजी से मोड़ने के उद्देश्य से शुरू की गई पीएम ई-ड्राइव (PM E-DRIVE) योजना देश में इलेक्ट्रिक क्रांति की लहर ला रही है। भारी उद्योग मंत्रालय ने लोकसभा में जानकारी साझा करते हुए बताया कि 22 जुलाई 2026 तक इस योजना के माध्यम से कुल 26.54 लाख इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) की बिक्री को प्रत्यक्ष सहायता और प्रोत्साहन प्रदान किया जा चुका है।

इस योजना का क्रियान्वयन 1 अप्रैल 2024 से 31 मार्च 2028 की अवधि के लिए तय किया गया है।

  • कुल बजट आवंटन: इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए सरकार ने 10,900 करोड़ रुपये का कुल बजट आवंटित किया है।

  • जारी और उपयोग की गई राशि: 22 जुलाई 2026 तक इसमें से 2,322 करोड़ रुपये की राशि जारी की जा चुकी है और इसका सफलता पूर्वक उपयोग भी कर लिया गया है।

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Electric Vehicles - फोटो : Adobe Stock

पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत किन-किन वाहनों को कितनी सहायता और प्रोत्साहन मिला है?

मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, इस योजना के अंतर्गत विभिन्न प्रकार के वाणिज्यिक और निजी इलेक्ट्रिक वाहनों को सब्सिडी व वित्तीय सहायता प्रदान की गई है:

  • इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स (दोपहिया):
    सबसे अधिक फायदा दोपहिया वाहनों को हुआ है, जहां 23.79 लाख ई-टू-व्हीलर्स की बिक्री को समर्थन दिया गया।

  • थ्री-व्हीलर्स (तीन पहिया - L5 श्रेणी):
    L5 श्रेणी में शामिल 2.68 लाख इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर्स को वित्तीय प्रोत्साहन दिया गया।

  • ई-रिक्शा और ई-कार्ट्स:
    छोटी वाणिज्यिक गतिविधियों को गति देने वाले 6,547 ई-रिक्शा और ई-कार्ट्स को योजना का लाभ मिला।

  • इलेक्ट्रिक ट्रक्स:
    भारी माल ढुलाई के क्षेत्र में हरित बदलाव लाते हुए 55 इलेक्ट्रिक ट्रकों को सहायता दी गई।

  • इलेक्ट्रिक बसें:
    सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने के उद्देश्य से योजना के तहत 14,000 ई-बसों का आवंटन किया गया है।

Electric Vehicles - फोटो : Freepik

इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने के मामले में देश के कौन-से राज्य सबसे आगे रहे हैं?

पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत सब्सिडी और सहायता का लाभ उठाने में राज्यों के बीच काफी प्रतिस्पर्धा देखी गई है, जिनमें महाराष्ट्र शीर्ष स्थान पर रहा है:

  • महाराष्ट्र (प्रथम स्थान):
    इस योजना के तहत 4.28 लाख ईवी को समर्थन देकर महाराष्ट्र देश में सबसे आगे रहा।

  • उत्तर प्रदेश (द्वितीय स्थान):
    2.78 लाख ईवी के समर्थन के साथ उत्तर प्रदेश दूसरे स्थान पर रहा।

  • कर्नाटक (तृतीय स्थान):
    कर्नाटक ने 2.67 लाख ईवी की बिक्री में सहायता प्राप्त कर तीसरा स्थान हासिल किया।

  • तमिलनाडु एवं मध्य प्रदेश:
    इस सूची में तमिलनाडु 2.59 लाख ईवी के साथ चौथे और मध्य प्रदेश 1.73 लाख ईवी के साथ पांचवें स्थान पर दर्ज किया गया।

Electric Vehicles - फोटो : Adobe Stock

देश में ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार को लेकर क्या प्रगति और स्थिति है?

सरकार देश भर में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का एक मजबूत नेटवर्क तैयार करने पर विशेष ध्यान दे रही है। इसके लिए पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत 2,000 करोड़ रुपये का अलग से प्रावधान किया गया है।

1. पीएम ई-ड्राइव के तहत स्वीकृत चार्जर्स:

  • राज्यों में स्वीकृति: 22 जुलाई 2026 तक 9 राज्यों में कुल 5,871 ईवी चार्जर्स के प्रस्तावों को हरी झंडी दे दी गई है।

  • राज्यवार आंकड़े: सबसे ज्यादा 1,571 चार्जर्स कर्नाटक के लिए मंजूर किए गए हैं, जिसके बाद दिल्ली को 1,146 और राजस्थान को 805 चार्जर्स की मंजूरी मिली है।

  • ऑयल मार्केटिंग कंपनियों का योगदान: इसके अलावा, तीन प्रमुख ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) के 691 चार्जर्स को भी योजना के तहत स्वीकृत किया गया है।

  • स्थापना की वर्तमान स्थिति: सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि 22 जुलाई 2026 तक पीएम ई-ड्राइव के तहत अभी एक भी चार्जर स्थापित नहीं हुआ है। जिसका सीधा अर्थ है कि यह घटक अभी केवल स्वीकृति और तैनाती के चरण में है।

2. फेम-II (FAME-II) और सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों का पिछला प्रदर्शन:

  • फेम-II के तहत कुल इंफ्रास्ट्रक्चर: पुरानी फेम-II योजना के तहत देश भर में कुल 9,583 सार्वजनिक ईवी चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जा चुके हैं। इसके साथ ही फेम-II ने 16.71 लाख EVs और 5,297 इलेक्ट्रिक बसों की तैनाती में योगदान दिया था।

  • फेम-II में राज्यों का प्रदर्शन: फेम-II के तहत कर्नाटक में 2.58 लाख ईवी व 1,221 ई-बसों को सहारा मिला, जबकि महाराष्ट्र में 3.13 लाख EVs और 830 ई-बसों को सहायता दी गई थी।

  • कर्नाटक में चार्जिंग नेटवर्क: 31 मार्च 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, कर्नाटक 6,805 सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों के साथ देश में दूसरे स्थान पर है। पीएम ई-ड्राइव के तहत राज्य में 1,571 चार्जर्स तैनात करने के लिए 153.10 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है।

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Car Plant - फोटो : Freepik

मेक इन इंडिया और ईवी टेस्टिंग क्षमताओं को बढ़ाने के लिए सरकार क्या कदम उठा रही है?

इलेक्ट्रिक वाहनों के घरेलू निर्माण को बढ़ावा देने और टेस्टिंग क्षमता को मजबूत करने के लिए सरकार ने रणनीतिक नीतियां बनाई हैं:

  • फेज्ड मैन्युफैक्चरिंग प्रोग्राम (PMP):
    फेम-II और पीएम ई-ड्राइव दोनों योजनाओं के तहत PMP को अनिवार्य किया गया है। इसका उद्देश्य भारत के भीतर ही (कर्नाटक सहित देश भर के निर्माताओं द्वारा) ईवी और उनके स्पेयर पार्ट्स, विशेषकर बैटरी पैक्स के स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा देना है।

  • लक्ष्य निर्धारण की रणनीति:
    सरकार ने स्पष्ट किया है कि पीएम ई-ड्राइव में राज्य-वार, जिला-वार या वित्तीय वर्ष-वार कोई लक्ष्य तय नहीं किए गए हैं, बल्कि इसमें सेगमेंट-वार (खंड-वार) लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं ताकि पूरे देश में समान रूप से इलेक्ट्रिक वाहनों का विस्तार हो सके।

  • ईवी टेस्टिंग एजेंसियों का आधुनिकीकरण:
    राष्ट्रीय स्तर पर इलेक्ट्रिक वाहनों के परीक्षण और प्रमाणीकरण क्षमताओं को सशक्त बनाने के लिए सरकार ₹780 करोड़ का निवेश कर रही है। इस फंड का उपयोग देश की चार प्रमुख एजेंसियों- ARAI (ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया), ICAT (इंटरनेशनल सेंटर फ़ॉर ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी), NATRAX (नेशनल ऑटोमोटिव टेस्ट ट्रैक्स), और GARC (ग्लोबल ऑटोमोटिव रिसर्च सेंटर) के आधुनिकीकरण के लिए किया जा रहा है।

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