PLI ऑटो स्कीम को PM E-DRIVE से कैसे जोड़ा गया है?
संशोधित पीएलआई ऑटो स्कीम को अब पीएम ई-ड्राइव के अनुरूप किया गया है। इसका मतलब यह है कि बैटरी इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर, थ्री-व्हीलर, ई-बस और ई-ट्रक के लिए इंसेंटिव नियम दोनों योजनाओं में एक जैसे होंगे। इससे कंपनियों को अलग-अलग स्कीम के नियम समझने में आसानी होगी और ईवी इकोसिस्टम में एकरूपता आएगी।
क्वाड्रिसाइकिल EV के लिए क्या नई शर्तें तय की गई हैं?
- बैटरी इलेक्ट्रिक क्वाड्रिसाइकिल (L7M और L7N श्रेणी) के लिए सरकार ने न्यूनतम तकनीकी मानक तय किए हैं।
- इन वाहनों की न्यूनतम रेंज 80 किलोमीटर होनी चाहिए।
- अधिकतम गति कम से कम 40 किमी प्रति घंटा तय की गई है।
- इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि इंसेंटिव केवल व्यवहारिक और उपयोगी ईवी को ही मिले।
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लोकलाइजेशन पर सरकार कितना जोर दे रही है?
पीएलआई ऑटो स्कीम के तहत केवल वही उत्पाद इंसेंटिव के पात्र हैं, जिनमें कम से कम 50 प्रतिशत घरेलू वैल्यू एडिशन (DVA) हो। इससे ईवी और ऑटो कंपोनेंट सेक्टर में लोकल मैन्युफैक्चरिंग, घरेलू सप्लायर्स और भारतीय वैल्यू चेन को मजबूती मिल रही है।
कुल मिलाकर इन बदलावों का क्या मतलब है?
पीएलआई ऑटो स्कीम में किए गए ये संशोधन साफ संकेत देते हैं कि सरकार अब ईवी सेक्टर में सिर्फ संख्या नहीं, बल्कि गुणवत्ता, परफॉर्मेंस और लोकल मैन्युफैक्चरिंग पर ज्यादा केंद्रित कर रही है। सख्त मानकों के चलते अब वही कंपनियां इंसेंटिव का लाभ उठा पाएंगी। जो तकनीक और घरेलू उत्पादन दोनों मोर्चों पर मजबूत साबित होंगी।
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