फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Petrol vs EV Cost: क्या ईवी खरीदते समय भारी निवेश है समझदारी? जानें क्यों अब कार खरीददारों की बदल रही पसंद

Sat, 21 Feb 2026 11:35 AM IST
जागृति ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Electric car maintenance vs petrol car: ईंधन की लगातार बदलती कीमतों और नई टेक्नोलॉजी के बीच एक न एक बार ये सवाल हर कार खरीददार के मन में जरूर आता होगा कि क्या महंगी इलेक्ट्रिक कार (EV) लेना वाकई घाटे का सौदा है या भविष्य की बचत? क्योंकि इस समय पेट्रोल के दाम 95 रुपये प्रति लीटर पार और ईवी चार्जिंग सिर्फ एक रुपये प्रति किमी है, तो क्या शुरुआती महंगी कीमत की भरपाई रनिंग कॉस्ट से हो सकती है। जानें इस लेख में विस्तार से....
 
विज्ञापन
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : adobe stock
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

आज के समय में कार खरीदना सिर्फ कीमत और फीचर्स नहीं रहा, बल्कि इसका कुल खर्च ओनरशिप कॉस्ट तय करने वाला बड़ा फैक्टर बन गया है। इसमें खरीद कीमत, ईंधन या चार्जिंग खर्च, मेंटेनेंस या सर्विस, इंश्योरेंस और टैक्स और रीसेल वैल्यू सब शामिल होते हैं। तो पेट्रोल या ईवी में कौन-सा सही विकल्प होगा यहां कुछ कारों की तुलना से समझिए ...
विज्ञापन


अगर हम मारुति डिजायर (Petrol) और टाटा टियागो ईवी की तुलना करें, तो डिजायर का माइलेज शानदार है, लेकिन टियागो ईवी की रनिंग कॉस्ट 0.80 रुपये से एक रुपये प्रति किमी है। अगर पांच साल की बात करें तो इतने समय में 75,000 किमी चलने पर डिजायर में करीब 3.80 लाख रुपये का पेट्रोल जलेगा, वहीं टियागो ईवी में करीब 65 हजार रुपये की बिजली खर्च होगी। यानी की शुरुआती तीन लाख का अंतर करीब चार लाख के अंदर खत्म हो सकता है।

ये भी पढ़े: Traffic: कोलकाता में वाहन पंजीकरण ने तोड़ा रिकॉर्ड, ट्रांसपोर्ट सिस्टम पर दबाव, ट्रैफिक जाम की चिंता बढ़ी
विज्ञापन


मिड-साइज एसयूवी
महिंद्रा एक्सयूवी और ह्यूंदै वेन्यू (Petrol) के बीच भी यही गणित काम करता है। एसयूवी सेगमेंट में पेट्रोल इंजन भारी होने की वजह से माइलेज कम देते हैं (अमूमन 10-12 kmpl शहर में)। ऐसे में ईवी का टॉर्क न केवल आपको बेहतर पिक-अप देता है, बल्कि प्रति किलोमीटर छह से सात किमी की सीधी बचत भी कराता है।

प्रीमियम सेगमेंट
अब अगर प्रीमियम सेगमेंट की बात करें तो ह्यूंदै क्रेटा या किया सेल्टोस जैसी गाड़ियां लग्जरी तो देती हैं, लेकिन इनका फ्यूल बिल भी उतना ही प्रीमियम होता है। इसके मुकाबले एमजी जेड एस ईवी या हुंडई कोना जैसी कारें खरीदने पर आपको रोड टैक्स में भारी छूट मिलती है। पांच साल के स्वामित्व (Ownership) में, प्रीमियम ईवी अपने पेट्रोल समकक्ष के मुकाबले लगभग छह लाख तक बचा सकती है, जो इसकी ऊंची कीमत को पूरी तरह जायज ठहराता है।

मेंटेनेंस का साइलेंट अंतर
पेट्रोल कारों में 5 साल के दौरान कम से कम 10 बार सर्विस करानी पड़ सकती है, जिसमें इंजन ऑयल, कूलेंट, एयर फिल्टर और गियरबॉक्स ऑयल का बड़ा खर्च शामिल है। ईवी में मूविंग पार्ट्स कम होने की वजह से सर्विस केवल टायर रोटेशन, ब्रेक फ्लूइड और एसी फिल्टर तक सीमित रहती है। औसत 5 साल का मेंटेनेंस खर्च:
  • पेट्रोल कार: 70,000 रुपये - 90,000 रुपये 
  • इलेक्ट्रिक कार: 15,000 रुपये  -  25,000 रुपये 
रीसेल और इंफ्रास्ट्रक्चर का सच
2026 में चार्जिंग स्टेशनों का जाल काफी फैल चुका है, जिससे 'रेंज एंजाइटी' (रास्ते में चार्ज खत्म होने का डर) कम हुई है। पेट्रोल कारों की रीसेल वैल्यू स्थिर है, लेकिन EV की बैटरी पर मिलने वाली 8 साल की वारंटी अब सेकंड-हैंड मार्केट में भी भरोसा जगा रही है।

ये भी पढ़े: Trump Tariffs: अमेरिकी ईवी टैरिफ के खिलाफ कोर्ट पहुंची BYD, क्या बढ़ेगा अमेरिका-चीन तनाव?

इंश्योरेंस एंड टैक्स
ईवी कार की एक्स-शोरूम कीमत ज्यादा होती है, इसलिए उसका इंश्योरेंस प्रीमियम भी आमतौर पर पेट्रोल या डीजल कार से 10–15 प्रतिशत ज्यादा पड़ता है। खासकर पहले साल में यह अंतर साफ दिखाई देता है। हालांकि कई राज्यों में इलेक्ट्रिक गाड़ियों पर रोड टैक्स में छूट दी जा रही है। कुछ जगहों पर रजिस्ट्रेशन फीस भी कम है। इसके अलावा केंद्र सरकार की FAME II जैसी योजनाओं और राज्य प्रोत्साहनों की वजह से ईवी की ऑन-रोड कीमत में पहले के मुकाबले कमी आई है। यानी इंश्योरेंस थोड़ा महंगा है, लेकिन टैक्स छूट से कुछ संतुलन बन सकता है।
विज्ञापन


रीसेल वैल्यू कितनी होगी?
पेट्रोल (ICE) कारों की रीसेल वैल्यू लंबे समय से स्थिर और भरोसेमंद मानी जाती है। सेकंड-हैंड मार्केट में इनके खरीदार ज्यादा मिल जाते हैं, इसलिए कीमत अपेक्षाकृत बेहतर मिलती है। ईवी की रीसेल वैल्यू मुख्य रूप से बैटरी की हालत, टेक्नोलॉजी और ब्रांड पर निर्भर करती है। पिछले कुछ वर्षों में ईवी टेक्नोलॉजी बेहतर हुई है और बैटरी वारंटी भी लंबी मिल रही है। अनुमान है कि 3–5 साल में ईवी अपनी मूल कीमत का 55–65 प्रतिशत तक वापस दिला सकती है। धीरे-धीरे ईवी की रीसेल वैल्यू भी मजबूत होती दिख रही है।

आपके लिए कौन-सी कार सही?
एक्सपर्ट के अनुसार, अगर आपका बजट सीमित है, लंबी दूरी की यात्रा ज्यादा करते हैं या ऑफ-रोड ड्राइविंग की जरूरत है, तो पेट्रोल कार अभी भी सुरक्षित विकल्प मानी जाती है, लेकिन अगर आपकी रोजाना ड्राइव मुख्य रूप से शहर के अंदर है, सालाना रनिंग ज्यादा है और आप लंबी अवधि तक कार रखने का सोच रहे हैं, तो ईवी समझदारी का सौदा हो सकती है। 

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें