भारत में कार खरीदते वक्त सबसे अहम सवाल होता है कि पेट्रोल लें या डीजल? खासकर तब, जब आपकी डेली रनिंग 30 किलोमीटर के आसपास हो। अगर आप भी इसी उलझन में हैं, तो यहां हम आपको फ्यूल कॉस्ट के आधार पर क्लियर ब्रेकडाउन देने जा रहे हैं, जिससे आप समझ सकें कि कौन-सी कार आपके लिए सस्ती और फायदे का सौदा साबित होगी।
माइलेज के आधार पर रोजाना की खपत
मान लीजिए कि डीजल कार का माइलेज 20 किमी/लीटर और पेट्रोल कार का माइलेज 15 किमी/लीटर है।
डीजल कार: 30 ÷ 20 = 1.5 लीटर/दिन
पेट्रोल कार: 30 ÷ 15 = 2 लीटर/दिन
मासिक खपत (30 दिन के हिसाब से)
डीजल कार: 1.5 × 30 = 45 लीटर/माह
पेट्रोल कार: 2 × 30 = 60 लीटर/माह
सालाना फ्यूल खपत
डीजल कार: 45 × 12 = 540 लीटर/वर्ष
पेट्रोल कार: 60 × 12 = 720 लीटर/वर्ष
फ्यूल कॉस्ट
(मान लीजिए डीजल ₹90 और पेट्रोल ₹100 प्रति लीटर है)
डीजल कार पर सालाना खर्च: 540 × ₹90 = ₹48,600
पेट्रोल कार पर सालाना खर्च: 720 × ₹100 = ₹72,000
डीजल कार से सालाना बचत: ₹72,000 - ₹48,600 = ₹23,400
क्या है ब्रेकईवन पॉइंट?
अमूमन एक डीजल कार की कीमत उसके पेट्रोल वेरिएंट से करीब ₹1.6 लाख ज्यादा होती है। ऐसे में डीजल कार की खरीद लागत निकालने में कितना वक्त लगेगा?
₹1,60,000 ÷ ₹23,400 = 6.8 साल
क्या होना चहिए फैसला?
अगर आप कार को 7 साल या उससे ज्यादा समय तक रखने की योजना बना रहे हैं, तो डीजल कार लॉन्ग टर्म में फायदेमंद साबित होगी। लेकिन अगर आप 5-6 साल में गाड़ी बदलने का सोच रहे हैं, तो पेट्रोल वेरिएंट सस्ता और समझदारी भरा विकल्प होगा।