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Overloading: ओवरलोड वाहनों पर हाईकोर्ट की सख्ती, एनएचएआई से राष्ट्रीय राजमार्गों पर समाधान तलब

Sat, 31 Jan 2026 04:26 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

पटना हाई कोर्ट ने नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) से ओवरलोडेड गाड़ियों के चलने पर रोक लगाने के तरीके खोजने को कहा।
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ट्रक ओवरलोडिंग - फोटो : संवाद
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विस्तार
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पटना हाईकोर्ट ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधाकिरण (NHAI) (एनएचएआई) से कहा कि वह बिहार के सभी राष्ट्रीय राजमार्गों पर ओवरलोड वाहनों, खासतौर पर रेत से लदे ट्रकों, की आवाजाही पर रोक लगाने के लिए ठोस उपाय खोजे।
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ओवरलोडिंग से सड़क और पुलों को भारी नुकसान
शुक्रवार को अदालत की यह टिप्पणी उस बयान के बाद आई, जिसमें बिहार के महाधिवक्ता पीके शाही ने कहा कि भारी मात्रा में ओवरलोड वाहनों के चलने से राज्य की सड़कों के साथ-साथ बड़े और छोटे पुलों को गंभीर नुकसान हो रहा है।

उनका कहना था कि यह समस्या लगातार बढ़ती जा रही है और बुनियादी ढांचे की उम्र घटा रही है।

 

PIL की सुनवाई के दौरान आया निर्देश
मुख्य न्यायाधीश संगम कुमार साहू और न्यायमूर्ति बिबेक चौधुरी की खंडपीठ ने यह आदेश अधिवक्ता विकास कुमार द्वारा दायर जनहित याचिका (PIL) (पीआईएल) की सुनवाई के दौरान दिया।

इस पीआईएल के जरिए अदालत NH-30 के आरा-मोहनिया खंड के निर्माण और चौड़ीकरण की निगरानी कर रही है। यह सड़क राज्य की राजधानी को ग्रैंड ट्रंक रोड (NH-2) से जोड़ने वाला एक अहम मार्ग है।

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'सिंडिकेट' के आरोप और गंभीर खुलासा
सुनवाई के दौरान अमीकस क्यूरी (मित्र न्यायालय) की भूमिका निभा रहे पीके शाही ने अदालत को बताया कि राष्ट्रीय राजमार्गों पर एक "जड़ जमाया हुआ सिंडिकेट" सक्रिय है।

उन्होंने आरोप लगाया कि इस नेटवर्क में राज्य और केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों और एजेंसियों से जुड़े अधिकारी शामिल हैं। जो रेत से लदे ओवरलोड ट्रकों को अनुमति देकर मोटी कमाई कर रहे हैं।

 

तकनीक आधारित समाधान का सुझाव
महाधिवक्ता शाही ने सुझाव दिया कि अगर एनएचएआई राष्ट्रीय राजमार्गों पर सेंसर आधारित वजन मापक सिस्टम और ऑटोमैटिक गेट लगाए, जैसा कि देश के कुछ एक्सप्रेसवे पर किया गया है, तो ओवरलोडिंग की समस्या पर काफी हद तक काबू पाया जा सकता है।

NHAI को जवाब दाखिल करने का निर्देश
हाईकोर्ट ने एनएचएआई को निर्देश दिया है कि वह इस मामले में अपना विस्तृत जवाब 13 फरवरी तक दाखिल करे।

इसके बाद अगली सुनवाई में अदालत यह देखेगी कि ओवरलोडिंग रोकने के लिए क्या ठोस कदम प्रस्तावित किए गए हैं।

 
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हाईकोर्ट का संदेश स्पष्ट
हाईकोर्ट की यह सख्ती साफ संकेत देती है कि राष्ट्रीय राजमार्गों पर ओवरलोडिंग को अब नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। यदि एनएचएआई तकनीक आधारित निगरानी और सख्त व्यवस्था लागू करता है, तो न सिर्फ सड़कें और पुल सुरक्षित होंगे, बल्कि दुर्घटनाओं और भ्रष्टाचार पर भी लगाम लग सकती है।

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