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पेरिस मोटर शो में चीन के 20 कार ब्रांड की एंट्री: EV-हाइब्रिड से यूरोप को देंगे टक्कर, क्या बदल सकता है बाजार?

Fri, 09 Oct 2026 01:40 PM IST
जागृति शुक्ला ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

आगामी पेरिस मोटर शो यूरोप के ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री के लिए एक बड़ा निर्णायक मोड़ साबित होने वाला है। एक तरफ जहां चीन की 20 कार कंपनियां अपनी नई गाड़ियों के साथ पेरिस पहुंच रही हैं, वहीं दूसरी तरफ यूरोपीय कार निर्माता अपने नए मॉडल पेश करने निवेशकों और ग्राहकों को भरोसा दिलाने की कोशिश में है कि वे प्रतिस्पर्धा से पिछड़े नहीं है। आइए जानते हैं यूरोप में चीनी कारों की बढ़ती हिस्सेदारी और हाइब्रिड वाहनों की लोकप्रियता के बीच क्या पुराने दिग्गज मुकाबला कर पाएंगे...
 
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चीन के 20 कार ब्रांड पेरिस मोटर शो में दिखाएंगे दम - फोटो : एआई जनरेटेड
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विस्तार
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यूरोप के कार बाजार में चीन की कंपनियों की पकड़ तेजी से मजबूत हो रही है। अगले सप्ताह होने वाले पेरिस मोटर शो में रिकॉर्ड 20 चीनी कार ब्रांड हिस्सा लेने की तैयारी में हैं। यह संख्या 2024 में हुए पिछले शो के मुकाबले दोगुनी हो सकती है। BYD और Chery जैसे बड़े नामों के साथ Aito और Avatr जैसे ब्रांड भी अपनी मौजूदगी दर्ज करा सकते हैं। वहीं, दूसरी ओर यूरोप की दिग्गज कंपनियां नए मॉडल पेश कर ग्राहकों और निवेशकों को यह भरोसा दिलाने की कोशिश करेंगी कि वे चीनी कंपनियों से मुकाबला करने के लिए तैयार हैं। ऐसे में यह मोटर शो यूरोप के ऑटो उद्योग के लिए अहम माना जा रहा है।

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पेरिस मोटर शो में चीन के 20 कार ब्रांड, क्यों है खास?

  • पेरिस मोटर शो इस बार यूरोप और चीन की कार कंपनियों के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा का बड़ा मंच बनने वाला है। इस साल शो में चीन के रिकॉर्ड 20 ब्रांड शामिल होंगे, जबकि 2024 के आयोजन में इनकी संख्या आधी थी।
  • चीनी कंपनियां इलेक्ट्रिक कारों और हाइब्रिड मॉडल की बढ़ती रेंज के साथ यूरोप में अपनी जगह बना रही हैं। इस बीच, यूरोपीय कार निर्माता नए मॉडल पेश करने और निवेशकों को यह संदेश देने की कोशिश करेंगे कि वे इस मुकाबले में पीछे नहीं हैं।
  • चीन के दल में बीवाईडी और चेरी जैसे दिग्गज ब्रांड्स के अलावा  जैसे स्थापित ब्रांडों के अलावा Aito (आइटो) और Avatr (अवतार) जैसे नए नाम भी शामिल होंगे। इन कंपनियों की बढ़ती मौजूदगी दिखाती है कि चीन के वाहन निर्माता यूरोप को अपने लिए एक अहम बाजार मान रहे हैं।


यूरोप में तेजी से क्यों बढ़ रही हैं चीनी कारें?

  • यह सबसे बड़ा सवाल खड़ा हुआ है कि आखिर यूरोप में चीनी कारें क्यों बढ़ रही है। यूरोप का ऑटो उद्योग इस समय कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। कोविड-19 महामारी के बाद से चीन में यूरोपीय कार निर्माताओं की बिक्री में गिरावट आई है। दूसरी ओर, चीन की घरेलू मांग कमजोर होने के बीच वहां की कंपनियां विदेशों में कारोबार बढ़ाने पर जोर दे रही हैं। अमेरिका में चीनी कार निर्माताओं के लिए बाजार तक पहुंच सीमित होने के कारण यूरोप उनके लिए और अहम हो गया है।
  • ग्रांट थॉर्नटन स्टैक्स के पार्टनर ब्रैड कुन्ज का कहना है कि चीनी कंपनियों का साफ मानना है कि 'हमें यूरोप पर हावी होना होगा, क्योंकि हम अमेरिका में कुछ नहीं कर सकते'। अगर अमेरिका ने चीनी कंपनियों को एंट्री दी होती, तो यूरोप इतना बड़ा युद्ध का मैदान न बनता।'

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यूरोपीय बाजार में चीनी ब्रांडों की हिस्सेदारी दोगुनी के करीब
रॉयटर्स के अनुसार, एक ऑटोमोटिव रिसर्च के आंकड़ों के मुताबिक, दूसरी तिमाही में यूरोपीय कार बाजार में चीनी ब्रांडों की हिस्सेदारी बढ़कर 10.7% हो गई। एक साल पहले इसी अवधि में यह आंकड़ा 5.7% था। इस तरह चीनी कंपनियों की बाजार हिस्सेदारी में तेज बढ़ोतरी हुई है। इनकी हिस्सेदारी अब उन जापानी कार ब्रांडों से भी ज्यादा है, जिन्होंने 1970 के दशक में यूरोप में अपनी मौजूदगी बढ़ानी शुरू की थी। यह बदलाव दिखाता है कि चीन की कंपनियां अब केवल अपने घरेलू बाजार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यूरोप जैसे स्थापित बाजारों में भी मजबूत प्रतिस्पर्धी बन रही हैं।

यूरोपीय कार कंपनियों पर बढ़ रहा दबाव

  • चीनी कंपनियों से मिल रही चुनौती के साथ यूरोपीय कार निर्माताओं को कमजोर मांग, अमेरिकी टैरिफ और इलेक्ट्रिक वाहनों के विकास पर होने वाले खर्च का भी सामना करना पड़ रहा है। फॉक्सवैगन जैसी दिग्गज कंपनियों हजारों नौकरियों में कटौती कर रहा है और लागत कम करने के लिए कारखाने बंद करने पर भी विचार कर रहा है।
  • वहीं, लग्जरी कार निर्माता BMW भी हजारों कर्मचारियों की छंटनी कर रहा है। इन परिस्थितियों में यूरोपीय कंपनियों के लिए लागत घटाना, नए मॉडल विकसित करना और बाजार में अपनी हिस्सेदारी बनाए रखना अहम हो गया है।


टैरिफ के बाद भी चीनी कंपनियों ने बदली रणनीति

  • जब यूरोपीय संघ ने दो साल पहले चीन में बनी पूरी तरह ईवी पर टैरिफ लगाए थे, तो इसका उद्देश्य यूरोपीय बाजार में स्थानीय कार निर्माताओं को मिल रही प्रतिस्पर्धा चुनौती का जवाब देना था। हालांकि, चीनी कंपनियों ने अपनी रणनीति में बदलाव करते हुए पेट्रोल इंजन वाली कारों और प्लग-इन हाइब्रिड मॉडल पर भी ध्यान बढ़ाया है।
  • ऑटोमोटिव रिसर्च के आंकड़ों के मुताबिक, दूसरी तिमाही में पश्चिमी यूरोप के प्लग-इन हाइब्रिड बाजार में चीनी ब्रांडों की हिस्सेदारी 26% से ज्यादा रही। दो साल पहले इसी अवधि में यह हिस्सेदारी केवल 2.2% थी। इस तेजी से पता चलता है कि इलेक्ट्रिक कारों पर टैरिफ लगाए जाने के बावजूद चीनी कंपनियां दूसरे पावरट्रेन विकल्पों के जरिए यूरोप में अपनी स्थिति मजबूत कर रही हैं।


अब प्लग-इन हाइब्रिड पर भी टैरिफ की मांग
इसके बाद अब यूरोप का ऑटो उद्योग चीनी प्लग-इन हाइब्रिड कारों पर भी टैरिफ लगाने की मांग कर रहा है। इसके साथ ही यूरोपीय संघ ऐसे कानून पर काम कर रहा है, जिसमें 'मेड इन यूरोप' से जुड़े प्रावधान शामिल होंगे।
प्रस्तावित नियमों के तहत प्रमुख सब्सिडी या सरकारी अनुबंधों के लिए पात्र होने के लिए ईवी में न्यूनतम स्थानीय सामग्री का होना जरूरी किया जा सकता है। इसका मकसद यूरोप में वाहन निर्माण और स्थानीय आपूर्ति श्रृंखला को बढ़ावा देना है।

चीनी कंपनियों से मुकाबला भी, साझेदारी भी

  • यूरोपीय कार निर्माता चीनी कंपनियों से बाजार हिस्सेदारी के लिए मुकाबला कर रहे हैं, लेकिन साथ ही उनकी बढ़ती मौजूदगी से कारोबारी फायदा उठाने की कोशिश भी कर रहे हैं। कुछ कंपनियां अपनी कम इस्तेमाल हो रही फैक्टरी क्षमता का इस्तेमाल करने या उसे दूसरी कंपनियों के साथ साझा करने के विकल्प तलाश रही हैं। वहीं, चीनी कंपनियों की इलेक्ट्रिक वाहन तकनीक का लाभ उठाने के लिए साझेदारियां भी की जा रही हैं। इसका उदाहरण स्टेलेंटिस और चीन की सरकारी स्वामित्व वाली कंपनी डोंगफेंग के बीच साझेदारी है।
  • गार्टनर के रिसर्च वाइस प्रेसिडेंट पेड्रो पाचेको ने यूरोपीय कंपनियों की इसे 'डबल गेम' बताया। उनका कहना है कि यूरोपीय कंपनियां एक तरफ तो चीनी प्रतिस्पर्धा से लड़ रही हैं, वहीं दूसरी तरफ उनके साथ साझेदारी भी कर रही हैं। जैसे मान लीजिए, स्टेलेंटिस (Stellantis) ने चीन की राज्य-स्वामित्व वाली कंपनी डोंगफेंग (Dongfeng) के साथ हाथ मिलाया है ताकि अपनी खाली पड़ी फैक्ट्रियों का इस्तेमाल किया जा सके और चीनी ईवी तकनीक का फायदा उठाया जा सके।  यानी एक तरफ चीनी कंपनियों से मुकाबला करना और दूसरी तरफ उनके साथ साझेदारी के जरिए कारोबारी अवसर तलाशना हो सकता है।


यूरोप की कंपनियां भी पेश करेंगी नए मॉडल
चीनी कार कंपनियों की बढ़ती मौजूदगी के बीच यूरोपीय निर्माता भी नई पीढ़ी की ज्यादा किफायती इलेक्ट्रिक कारों के साथ जवाब देने की तैयारी कर रहे हैं। ऑटोमोटिव विश्लेषक के मुताबिक, यह मोटर शो महामारी के बाद क्षेत्र के सबसे महत्वपूर्ण आयोजनों में से एक हो सकता है। उनके अनुसार, यूरोपीय कंपनियां इस मंच के जरिए यह दिखाना चाहती हैं कि वे अब भी मजबूत हैं और चीनी प्रतिस्पर्धियों का सामना करने के लिए तैयार हैं।

Citroen 2CV के साथ इन मॉडल पर रहेगी नजर

  • शो में यूरोप के प्रमुख लॉन्च में से एक स्टेलेंटिस की ओर से Citroen 2CV की वापसी होने की उम्मीद है। इस मॉडल के जरिए उन नए नियमों को परखने का अवसर मिलेगा, जो कार निर्माताओं को कुछ सुविधाएं कम करके ज्यादा किफायती इलेक्ट्रिक वाहन पेश करने की अनुमति देते हैं। इसका उद्देश्य चीनी कंपनियों की प्रतिस्पर्धा का सामना करने के लिए कम कीमत वाले EV विकल्प विकसित करना है।
  • साथ ही पेरिस मोटर शो में कम चर्चित रहे चीनी ब्रांड भी यूरोप में अपनी पहचान बनाने की कोशिश करेंगे। इनमें Aito शामिल है, जो चीन की चोंगकिंग स्थित वाहन निर्माता कंपनी सेरेस ग्रुप का प्रीमियम ब्रांड है। Aito का लक्ष्य अगले तीन वर्षों में अपनी कुल बिक्री में विदेशी बाजारों की हिस्सेदारी 20% तक पहुंचाना है। फिलहाल कंपनी की कुल बिक्री में विदेशी बाजारों का योगदान 1% से भी कम है।
  • कंपनी पेरिस मोटर शो में यूरोप के लिए चार प्रीमियम इलेक्ट्रिक एसयूवी लॉन्च करने की योजना बना रही है। यह कदम दिखाता है कि चीनी कंपनियां अब यूरोप में केवल बिक्री बढ़ाने के बजाय अपने प्रीमियम मॉडल के लिए भी बाजार तैयार करना चाहती हैं।


मोटर शो में कंपनियों की मौजूदगी क्यों अहम है?

  • इंटरनेशनल ऑर्गनाइजेशन ऑफ मोटर व्हीकल मैन्युफैक्चरर्स के महासचिव फ्रांस्वा रुडियर के मुताबिक, चीनी ब्रांडों की बढ़ती मौजूदगी ने मोटर शो को फिर से आकर्षक बनाने में मदद की है। ऐसा उस समय हुआ है, जब कुछ पारंपरिक वाहन निर्माताओं की ऐसे आयोजनों में दिलचस्पी कम हुई थी। उनके अनुसार, पेरिस मोटर शो में बड़ी संख्या में कंपनियों की भागीदारी यह दिखाती है कि तेजी से प्रतिस्पर्धी होते बाजार में ग्राहकों को आकर्षित करने का दबाव दोनों पक्षों पर बढ़ रहा है।
  • रुडियर ने कहा कि पहले ग्राहक खुद कारें खरीदने के लिए आगे आते थे, लेकिन अब निर्माताओं को ग्राहकों तक पहुंचकर अपनी कारें बेचनी पड़ रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जो कंपनियां इस आयोजन में हिस्सा नहीं ले रही हैं, उनसे गलती हो सकती है। उनके शब्दों में, एक तरह से अब स्थिति 'नो शो, नो सेल' जैसी हो गई है।


यूरोप के ऑटो बाजार के लिए क्या संकेत हैं?

  • रॉयटर्स के अनुसार, पेरिस मोटर शो में चीन के रिकॉर्ड 20 ब्रांडों की मौजूदगी यूरोप के कार बाजार में बदलते समीकरणों को दिखाती है। चीनी कंपनियां इलेक्ट्रिक कारों के साथ प्लग-इन हाइब्रिड और दूसरे पावरट्रेन विकल्पों के जरिए भी अपनी पहुंच बढ़ा रही हैं।
  • वहीं, यूरोपीय निर्माता किफायती इलेक्ट्रिक मॉडल, लागत में कटौती, नई साझेदारियों और संभावित स्थानीय सामग्री नियमों के जरिए मुकाबले की तैयारी कर रहे हैं। ऐसे में इस मोटर शो की अहमियत केवल नए मॉडल पेश करने तक सीमित नहीं है। यह आयोजन यह भी दिखाएगा कि यूरोप की पुरानी कार कंपनियां और चीन के तेजी से बढ़ते ब्रांड आने वाले समय में बाजार हिस्सेदारी के लिए किस तरह प्रतिस्पर्धा करेंगे।
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