दिल्ली-एनसीआर के पुराने पेट्रोल और डीजल वाहन मालिकों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। मंगलवार को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि 10 साल से पुराने डीजल और 15 साल से पुराने पेट्रोल वाहनों के खिलाफ फिलहाल कोई सख्त कदम न उठाया जाए। यह राहत अगले आदेश तक जारी रहेगी।
यह मामला जुलाई 2025 में आयोग (CAQM) के उस आदेश से जुड़ा है, जिसमें दिल्ली और एनसीआर के कुछ जिलों में ऐसे वाहनों को ईंधन आपूर्ति रोकने और उन्हें स्क्रैप करने का निर्देश दिया गया था। यह निर्देश 2018 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के आधार पर दिया गया था, जो 2015 में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) द्वारा लगाए गए प्रतिबंध को बरकरार रखता था।
NGT ने 2015 में दिया था आदेश
2015 में एनजीटी ने दिल्ली-एनसीआर में 10 साल से पुराने डीजल और 15 साल से पुराने पेट्रोल वाहनों पर पाबंदी लगाई थी, ताकि प्रदूषण कम किया जा सके। 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश को बरकरार रखा। 2024 में दिल्ली सरकार ने सार्वजनिक स्थानों पर "एंड-ऑफ-लाइफ" वाहनों को हटाने के लिए दिशानिर्देश जारी किए।
जुलाई 2025 में CAQM ने घोषणा की कि 1 जुलाई से दिल्ली और एनसीआर के कुछ जिलों में ऐसे वाहनों को पेट्रोल पंप पर ईंधन नहीं मिलेगा। लेकिन तकनीकी खामियों और वाहन मालिकों की शिकायतों के बाद इसे दिल्ली, गुरुग्राम, फरीदाबाद, नोएडा, गाजियाबाद और सोनीपत में 1 नवंबर 2025 तक टाल दिया गया।
दिल्ली सरकार की दलील
दिल्ली सरकार ने 26 जुलाई को 2018 के आदेश में संशोधन की मांग करते हुए पुनर्विचार याचिका दाखिल की। सरकार का कहना है कि 2018 के बाद से कड़े उत्सर्जन मानक (BS-VI), ज्यादा प्रदूषण जांच केंद्र और बेहतर मॉनिटरिंग लागू हो चुकी है, इसलिए केवल उम्र के आधार पर प्रतिबंध सही नहीं है।
आरटीआई से यह भी सामने आया कि इस बार आदेश लागू करने से पहले कोई नया वैज्ञानिक अध्ययन नहीं किया गया।
बेंच ने केंद्र से जवाब मांगा
मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई की अध्यक्षता वाली बेंच ने केंद्र को नोटिस जारी कर चार हफ्तों में जवाब मांगा। तब तक किसी भी वाहन मालिक पर सख्त कार्रवाई नहीं होगी। यह फैसला अब इस बहस को और तेज कर सकता है कि क्या भारत को वाहनों पर उम्र-आधारित प्रतिबंध रखना चाहिए या प्रदूषण स्तर के आधार पर कार्रवाई करनी चाहिए।