भारत में तेजी से इलेक्ट्रिक वाहनों का दबदबा बढ़ता जा रहा है। कई कंपनियों ने अपने नए इलेक्ट्रिक मॉडल्स को लॉन्च किया है। इसी देखते हुए केंद्र सरकार ने सड़कों के अलावा रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट और बंदरगाह पर इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन बनाने की स्कीम तैयार की है। इसमें बैटरी स्वैपिंग सुविधाएं भी शामिल होंगी। केंद्र सरकार के भारी उद्योग मंत्रालय ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, भारतीय हवाई अड्डा प्राधिकरण, बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय समेत विभिन्न राज्य सरकारों के साथ बातचीत शुरू कर दिया है। इन सभी के साथ तालमेल के साथ ही ईवी चार्जिंग स्टेशन लगाए जाएंगे। बशर्ते इन सभी को बिजली मंत्रालय के दिशानिर्देशों का पालन करना होगा। बैटरियों की संख्या या आकार पर कोई पाबंदी नहीं होगी, लेकिन बिजली मंत्रालय के सुरक्षा मानकों का पालन जरूरी होगा।
भारी उद्योग मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि, राजधानी दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और कोच्चि हवाई अड्डे जैसे कुछ प्रमुख हवाई अड्डों के साथ-साथ एनएच-48 (दिल्ली-जयपुर-आगरा) और एनएच-179 बी (चेन्नई-त्रिची) जैसे राष्ट्रीय राजमार्गों पर पहले से ही ईवी चार्जिंग स्टेशन मौजूद है। अब अन्य हवाई अड्डों, राजमार्गों और बंदरगाहों को भविष्य में स्थापना के लिए चुना जा रहा है। हमें 14 राज्यों से सुझाव मिले हैं। एक अंतर-मंत्रालयी बैठक हो चुकी है। संबंधित मंत्रालयों से और फीडबैक मिलने के बाद हम अप्रैल तक दिशा निर्देश तय कर लेंगे।
मंत्रालय का कहना है कि, एमएचआई ने ट्रकों की अधिक आवाजाही वाले 20 राष्ट्रीय राजमार्गों की पहचान की है। इसके बाद एनएचएआई को स्वतंत्र रूप से टेंडर प्रक्रिया आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी दी है। इस योजना के तहत मंत्रालय 80 प्रतिशत की लागत वहन करेगा। इन पहचाने गए राजमार्गों में मुंबई-पुणे और बेंगलुरु-चेन्नई जैसे व्यस्त मार्ग शामिल हैं। एनएचएआई अपने डेटा के आधार पर इन ईवी चार्जिंग स्टेशन के स्थान तय करेगा। जबकि एमएचआई इसके लिए फंडिंग का प्रबंधन करेगा।
केंद्र सरकार ने 10,900 करोड़ रुपये की पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत देशभर में ईवी चार्जिंग स्टेशन और बैटरी स्वैपिंग सुविधाएं स्थापित करने के लिए 2,000 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। इस पहल का लक्ष्य भारत के बढ़ते ईवी बाजार के लिए चार्जिंग कनेक्टिविटी को बेहतर करना और इंटरनल कम्बशन इंजन वाहनों पर निर्भरता कम करना है। भारत का लक्ष्य वित्त वर्ष 2026 तक सार्वजनिक ईवी चार्जिंग स्टेशनों की संख्या को 32,500 से बढ़ाकर 72,300 करना है। पीएम ई-ड्राइव के तहत, केंद्र सरकार सार्वजनिक स्थानों पर ईवी चार्जिंग स्टेशन लगाने के लिए 80 प्रतिशत तक सब्सिडी दे रही है। केंद्र सरकार पूर्वोत्तर, तटीय और पहाड़ी क्षेत्रों में 100 प्रतिशत तक की छूट दे रही है।
अभी देश में सबसे ज्यादा ईवी चार्जिंग स्टेशन 5879 कर्नाटक में हैं। दूसरे नंबर पर महाराष्ट्र 3842 स्टेशन हैं। उत्तर प्रदेश में 2113, दिल्ली में 1951 और तमिलनाडु में 1495 ईवी चार्जिंग स्टेशन हैं। केरल में 1288 तो वहीं राजस्थान में 1285 स्टेशन हैं। गुजरात में 1008 स्टेशन हैं। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन जयराम गडकरी के अनुसार, सरकार के विद्युत मंत्रालय ने देश में जनता के लिए स्थापित किए गए इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) चार्जिंग स्टेशनों का एक राष्ट्रीय ऑनलाइन डेटाबेस विकसित करने के मकसद से 'ईवी यात्रा' पोर्टल शुरू किया है। इसके जरिए ईवी का इस्तेमाल करने वाला व्यक्ति निकटतम चार्जिंग स्टेशनों को ट्रैक कर सकता है। 'ईवी यात्रा पोर्टल'
www.evyatra.beeindia.gov.in पर एक्सेस किया जा सकता है।