किन सेवाओं के लिए NOC रोका जा सकता है?
इन संशोधनों के तहत अब राष्ट्रीय राजमार्ग पर बकाया यूजर फीस को सीधे वाहन से जुड़ी सेवाओं से जोड़ दिया गया है। नियमों के अनुसार:
- वाहन के स्वामित्व हस्तांतरण या एक राज्य से दूसरे राज्य में वाहन ट्रांसफर के लिए नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) तब तक जारी नहीं किया जाएगा, जब तक बकाया यूजर फीस का भुगतान नहीं हो जाता।
- किसी भी वाहन के लिए फिटनेस सर्टिफिकेट का नवीनीकरण या नया सर्टिफिकेट जारी नहीं किया जाएगा, अगर टोल की बकाया राशि बाकी है।
- नेशनल परमिट के लिए आवेदन करने वाले वाणिज्यिक वाहनों के लिए यह अनिवार्य होगा कि वाहन पर कोई भी अनपेड यूजर फीस न हो।
यानी टोल बकाया अब सीधे तौर पर वाहन से जुड़े कानूनी कामों को प्रभावित करेगा।
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MLFF लागू होने से पहले नियम क्यों सख्त किए गए हैं?
यह अधिसूचना ऐसे समय पर आई है, जब देश में मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) यानी बैरियर-फ्री टोलिंग को लागू करने की तैयारी अंतिम चरण में है।
- MLFF के तहत टोल प्लाजा पर कोई फिजिकल बैरियर नहीं होगा
- वाहन बिना रुके गुजरेंगे और टोल डिजिटल तरीके से कटेगा
सरकार का मानना है कि बैरियर-फ्री सिस्टम में टोल न चुकाने की आशंका बढ़ सकती है। इसलिए एनओसी को इससे जोड़कर अनुपालन सुनिश्चित किया जा रहा है।
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किन हाईवे सेक्शनों पर MLFF का काम लगभग पूरा हो चुका है?
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, MLFF का काम कई अहम राष्ट्रीय राजमार्गों पर अंतिम चरण में है। इनमें शामिल हैं:
- दिल्ली-जयपुर हाईवे पर मनोहरपुर और शाहजहांपुर
- NH-48 के सूरत-वडोदरा सेक्शन पर चोरासी
- दिल्ली-चंडीगढ़ हाईवे पर घरौंदा
इन जगहों पर बैरियर-फ्री टोलिंग जल्द शुरू होने की संभावना है।
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'अनपेड यूजर फीस' का मतलब क्या होगा?
अधिसूचना में "अनपेड यूजर फीस" को साफ तौर पर परिभाषित किया गया है।
- यदि इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन सिस्टम यह रिकॉर्ड करता है कि कोई वाहन NH के किसी सेक्शन से गुजरा है
- लेकिन उस वाहन से संबंधित टोल राशि सिस्टम को प्राप्त नहीं हुई है
- तो उसे अनपेड यूजर फीस माना जाएगा।
- यही बकाया राशि आगे चलकर एनओसी से लिंक कर दी जाएगी।
यानी, जहां ETC सिस्टम ने वाहन की आवाजाही दर्ज कर ली हो। लेकिन राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम, 1956 के अनुसार संबंधित शुल्क प्राप्त नहीं हुआ हो।
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क्या गलती या विवाद होने पर शिकायत का मौका मिलेगा?
सरकार ने यह भी साफ किया है कि वाहन मालिकों को सीधे सजा नहीं दी जाएगी।
- जल्द ही एक ऑनलाइन पोर्टल लॉन्च किया जाएगा
- जहां लोग टोल से जुड़े विवादों या गलत चार्ज की शिकायत दर्ज करा सकेंगे
- अधिकारियों के मुताबिक,
- एनओसी रोकने जैसी कार्रवाई से पहले
- बकाया निपटाने और शिकायत सुलझाने का पूरा मौका दिया जाएगा
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इस फैसले का असली मकसद क्या है?
सरकार का उद्देश्य:
- डिजिटल टोल कलेक्शन को मजबूत करना
- MLFF लागू होने के बाद टोल चोरी रोकना
- और यह सुनिश्चित करना है कि राष्ट्रीय राजमार्गों का इस्तेमाल करने वाला हर वाहन उचित शुल्क चुकाए
इन नए नियमों के साथ सरकार का साफ संदेश है कि राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल भुगतान से बचना अब आसान नहीं होगा। बकाया टोल का असर सीधे वाहन से जुड़ी अहम सेवाओं पर पड़ेगा, जिससे यूजर फीस का पालन सुनिश्चित किया जा सकेगा।
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