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Ethanol: नितिन गडकरी की चीनी मिल मालिकों को सलाह- कमाई के लिए बनाएं इथेनॉल-ग्रीन हाइड्रोजन, लगाएं खुद के पंप

Sat, 16 May 2026 05:32 PM IST
Amar Sharma ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि चीनी उद्योग का भविष्य तब तक अंधकारमय बना रहेगा, जब तक मिल संचालक आक्रामक रूप से ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में विविधता नहीं लाते।
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Nitin Gadkari - फोटो : X/@nitin_gadkari
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विस्तार
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केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने चीनी उद्योग की स्थिरता और भविष्य को लेकर एक बड़ा और स्पष्ट बयान दिया है। उन्होंने कहा कि जब तक चीनी मिल मालिक आक्रामक रूप से ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में कदम नहीं बढ़ाते, तब तक चीनी उद्योग का भविष्य अंधकारमय रहेगा।

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पश्चिमी महाराष्ट्र के दो दिवसीय दौरे के दौरान सातारा में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गडकरी ने कहा, "मिलें जितनी अधिक चीनी का उत्पादन करेंगी, उनके मालिकों को उतना ही अधिक रोना पड़ेगा।" उन्होंने आगे जोड़ा, "एक मंत्री के रूप में मैं इस उद्योग के भविष्य के बारे में बहुत ज्यादा नहीं कह सकता, लेकिन यह काफी कठिन होने वाला है।"

गडकरी के इस बयान की पृष्ठभूमि क्या है?

केंद्रीय मंत्री का यह बयान ऐसे समय में आया है जब चीनी क्षेत्र को लेकर नीतिगत फैसले चर्चा में हैं:

  • निर्यात पर प्रतिबंध: केंद्र सरकार ने चीनी के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है।

  • विरोध: सरकार के इस कदम का विपक्षी दलों और किसान कार्यकर्ताओं द्वारा कड़ा विरोध किया जा रहा है। उनका तर्क है कि इस प्रतिबंध के कारण गन्ना उत्पादकों को लाभकारी मूल्य नहीं मिल पाएगा।

इथेनॉल उत्पादन ने चीनी मिलों को कैसे सहारा दिया है?

बायोफ्यूल (जैव ईंधन) के लंबे समय से समर्थक रहे गडकरी ने इथेनॉल को इस उद्योग के लिए एकमात्र राहत बताया:

  • किसानों का भुगतान: उन्होंने रेखांकित किया कि यदि मिलों ने इथेनॉल का उत्पादन नहीं किया होता, तो मिल मालिकों के लिए गन्ना किसानों का भुगतान करना लगभग असंभव हो जाता।

  • गोदामों का खर्च: वर्तमान में, मिल मालिक गोदामों में चीनी का स्टॉक करने और उसका बढ़ता हुआ किराया देने के लिए मजबूर हैं। वे आज केवल इथेनॉल की बिक्री के कारण ही बेहतर स्थिति में हैं।

नितिन गडकरी ने मिलों को क्या नए विकल्प सुझाए हैं?

केंद्रीय मंत्री ने पारंपरिक उत्पादन से आगे बढ़कर "सोच में बदलाव" लाने और नवाचार (इनोवेशन) को अपनाने का आह्वान किया:

  • उत्पादन का विस्तार: उन्होंने सुझाव दिया कि चीनी कारखानों को आइसोब्यूटानॉल और ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन के क्षेत्र में विस्तार करना चाहिए।

  • रोजगार के अवसर: उन्होंने चीनी मिलों से आग्रह किया कि वे राजस्व बढ़ाने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा करने के लिए अपने खुद के इथेनॉल पंप स्थापित करें।

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पालकी मार्गों के निर्माण की वर्तमान स्थिति क्या है?

चीनी क्षेत्र पर टिप्पणी करने के अलावा, गडकरी ने क्षेत्र में चल रहे बुनियादी ढांचे के विकास का भी जायजा लिया:

  • सड़क निरीक्षण: उन्होंने पुणे से पंढरपुर तक फैले संत ज्ञानेश्वर और संत तुकाराम पालकी मार्गों के निर्माण कार्य की प्रगति का निरीक्षण किया।

  • समय सीमा: निर्माण की गति पर संतोष व्यक्त करते हुए उन्होंने पुष्टि की कि यह परियोजना इस साल दिसंबर के आखिर तक पूरी होने वाली है।


नितिन गडकरी का यह बयान चीनी उद्योग के लिए एक स्पष्ट चेतावनी और दिशा-निर्देश है कि उन्हें केवल चीनी उत्पादन पर निर्भर रहने के बजाय ऊर्जा और वैकल्पिक ईंधन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनना होगा।

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