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E20 पेट्रोल पर बहस तेज: गडकरी ने नुकसान के दावों को नकारा, लेकिन सर्वे और ARAI अध्ययन ने सामने रखी अलग तस्वीर

Wed, 08 Jul 2026 04:43 PM IST
Amar Sharma ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

देश में E20 पेट्रोल को लेकर बहस लगातार तेज होती जा रही है। एक ओर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने E20 से वाहनों को नुकसान पहुंचने के दावों को पूरी तरह खारिज किया है। वहीं दूसरी ओर एक सर्वे और ARAI के अध्ययन में पुराने वाहनों को लेकर कुछ अलग संकेत सामने आए हैं।
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E20 Petrol Debate - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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देश में इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल (E20) को लेकर बहस एक बार फिर गरमा गई है। एक तरफ, जहां केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने E20 से वाहनों को नुकसान पहुंचने के दावों को पूरी तरह खारिज किया है और सरकार के इथेनॉल कार्यक्रम का पुरजोर बचाव किया है। वहीं दूसरी तरफ, हालिया सर्वे और ARAI के तकनीकी अध्ययन कुछ अलग ही कहानी बयां कर रहे हैं। गडकरी ने आलोचकों को चुनौती देते हुए कहा है कि वे देश में एक भी ऐसी गाड़ी का नाम बताएं जो इस ईंधन की वजह से खराब हुई हो। आइए इस पूरे मामले के दोनों पक्षों को गहराई से समझते हैं। 

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नितिन गडकरी - फोटो : Amar Ujala

नितिन गडकरी ने इथेनॉल के खिलाफ उठ रही आवाजों पर क्या कहा?

मंगलवार को 'विकसित भारत कॉन्क्लेव' को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने E20 पेट्रोल से वाहनों को नुकसान पहुंचने के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। इस विषय पर उनके रुख की कुछ अहम बाते ये हैं:

  • पेड कैंपेन का लगाया आरोप:
    नितिन गडकरी ने E20 से वाहनों को नुकसान पहुंचने के इन दावों को सरकार के खिलाफ चलाया जा रहा एक "झूठा नैरेटिव" बताया। साथ ही कहा कि यह सब प्रायोजित अभियानों का हिस्सा है।

  • आलोचकों को दी खुली चुनौती:
    मंत्री ने सवालिया लहजे में कहा, "ऐसा कोई मामला नहीं है जहां E20 पेट्रोल के कारण किसी कार को परेशानी का सामना करना पड़ा हो। क्या देश में कोई ऐसी कार है जिसे इसके इस्तेमाल से दिक्कत हुई? बस किसी एक का नाम बताइए।"

सरकार ने कच्चे तेल के आयात को कम करने, कार्बन उत्सर्जन घटाने और कृषि क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाने का लक्ष्य हासिल कर लिया है। लेकिन पुरानी गाड़ियों पर इसके प्रभाव को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। 

E20 पेट्रोल - फोटो : AI

हालिया सर्वे में वाहन मालिकों ने क्या चिंताएं जताई हैं?

सरकार के दावों के उलट, 'लोकलसर्कल्स' (LocalCircles) द्वारा किए गए एक हालिया सर्वे में पुरानी पेट्रोल गाड़ियों के मालिकों ने अपनी चिंताएं जाहिर की हैं। 305 जिलों के 44,000 से अधिक वाहन मालिकों (जिनकी गाड़ियां 2023 से पहले बनी हैं) के फीडबैक (जवाबों) पर आधारित इस सर्वे के मुख्य बिंदु इस तरह हैं:

  • मरम्मत और मेंटेनेंस में भारी बढ़ोतरी:
    सर्वे में शामिल 55 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने बताया कि शुरुआती 2025 से उनकी गाड़ियों में रखरखाव या मरम्मत की जरूरतें बढ़ गई हैं। यह आंकड़ा केवल एक महीने पहले किए गए इसी तरह के सर्वे (29 प्रतिशत) के मुकाबले बहुत बड़ी उछाल दिखाता है।

  • गंभीर समस्याओं की शिकायत:
    इनमें से लगभग एक-चौथाई लोगों ने मरम्मत में आई इस तेजी को "काफी गंभीर" बताया है। जबकि एक अन्य बड़े समूह ने इसे मध्यम माना है। केवल 38 प्रतिशत लोगों ने कहा कि उन्हें अपनी गाड़ियों में कोई असामान्य बदलाव नहीं दिखा।

  • खराबी के पीछे का वैज्ञानिक कारण:
    सर्वे में इन दिक्कतों की वजह इथेनॉल के रासायनिक गुणों को बताया गया है। इथेनॉल नमी को बहुत जल्दी सोखता है, जिससे फ्यूल-सिस्टम के धात्विक (मैटेलिक) हिस्सों में जंग लग सकती है। इसके अलावा, यह समय के साथ होसेस, सील्स और ओ-रिंग्स जैसे रबर और प्लास्टिक के हिस्सों को गला या कमजोर कर सकता है। खासकर उन गाड़ियों में जो E20 के लिए नहीं बनी हैं। 

E20 पेट्रोल से पुरानी गाड़ी पर हो रहा असर - फोटो : AI

ARAI के गोपनीय अध्ययन में क्या बातें सामने आई हैं?

'ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया' (ARAI) द्वारा किए गए एक अध्ययन (जो अभी सार्वजनिक नहीं हुआ है) इस पूरे विवाद पर एक मिला-जुला और तकनीकी पक्ष रखती है। इस अध्ययन की मुख्य खोज नीचे समझाई गई है:

  • मेटल पार्ट्स सुरक्षित, रबर पार्ट्स पर असर:
    अध्ययन के अनुसार, E10 के लिए डिजाइन किए गए वाहनों में E20 का उपयोग करने से धातु (मैटेलिक) से बने फ्यूल-सिस्टम घटकों पर कोई विपरीत असर नहीं पड़ा। हालांकि, गैर-धातु घटकों (जैसे रबर होस, गास्केट, सील और ओ-रिंग) की स्थिति समय के साथ बिगड़ सकती है और उन्हें बदलने की जरूरत पड़ सकती है। 'सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स' (SIAM) ने भी माना है कि रबर के पार्ट्स इस ईंधन के संपर्क में आकर जल्दी बूढ़े हो सकते हैं। यानी इनकी लाइफ कम हो सकती है।

  • पिक-अप और एमिशन सामान्य:
    परीक्षण किए गए अधिकांश वाहनों में शुरुआती स्टार्टेबिलिटी, ड्राइव करने की क्षमता और उत्सर्जन का स्तर E10 ईंधन के समान ही संतोषजनक पाया गया। हालांकि, कुछ पुरानी BS-IV टू-व्हीलर्स में अपवाद देखे गए।

  • 2 से 6 प्रतिशत तक माइलेज में कमी:
    अध्ययन में यह भी पाया गया कि E10 की तुलना में E20 ईंधन का उपयोग करने पर गाड़ियों की ईंधन खपत 2 से 6 प्रतिशत तक बढ़ सकती है। यानी माइलेज कम हो सकता है। हालांकि यह अलग-अलग गाड़ी के मॉडल पर निर्भर करता है। 

E20 Petrol - फोटो : Amar Ujala

इंजन की मजबूती के परीक्षण नतीजे कैसे रहे?

ऑटो निर्माताओं द्वारा किए गए इंजन ड्यूरेबिलिटी टेस्ट (मजबूती परीक्षण) के नतीजे काफी मिले-जुले रहे हैं:

  • थर्मोमैकेनिकल फेलियर का मामला:
    एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, जहां एक निर्माता ने 400 घंटे की टेस्टिंग में कोई समस्या नहीं पाई, वहीं दूसरे निर्माता ने करीब 809 घंटे की टेस्टिंग के दौरान एग्जॉस्ट वॉल्व के थर्मोमैकेनिकल फेलियर को दर्ज किया। हालांकि, विशेषज्ञ इस बात पर बंटे हुए हैं कि क्या यह खराबी सीधे E20 की वजह से हुई। क्योंकि मानक टेस्टिंग आमतौर पर 2,000 घंटे तक चलती है।

  • दोपहिया वाहनों को राहत:
    इस स्टडी में शामिल टू-व्हीलर निर्माताओं ने टेस्टिंग के दौरान इंजन ड्यूरेबिलिटी को लेकर किसी बड़े नुकसान की रिपोर्ट नहीं की है।

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E20 ईंधन - फोटो : AI

पुरानी गाड़ियों के मालिकों के लिए यह बहस क्यों महत्वपूर्ण है?

यह पूरा विवाद इसलिए गंभीर है क्योंकि भारत की सड़कों पर दौड़ रहे वाहनों का एक बहुत बड़ा हिस्सा E20 अनुकूलता नियमों के लागू होने से पहले का है।

  • नियमों की टाइमलाइन: भारत में E20 सामग्री के अनुकूल गाड़ियों का उत्पादन साल 2023 में शुरू हुआ था। जबकि अप्रैल 2025 से सभी नए निर्मित वाहनों के लिए मटेरियल और ईंधन दोनों स्तरों पर E20 के अनुकूल होना अनिवार्य कर दिया गया है। इससे पहले की गाड़ियां मुख्य रूप से E10 या उससे कम मिश्रण के लिए ही बनाई गई थीं। 


क्या है निष्कर्ष

जैसे-जैसे भारत ऊर्जा सुरक्षा के लिए आगे बढ़ रहा है, यह बहस अब केवल माइलेज तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि गाड़ियों की लंबी उम्र से जुड़ चुकी है। सरकार भले ही किसी पुख्ता नुकसान के दावे को नकार रही हो। लेकिन तकनीकी अध्ययन बताते हैं कि पुराने वाहनों के रबर पार्ट्स को अधिक रखरखाव की जरूरत पड़ सकती है। 

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