कार सर्विस सेंटर कब ले जाई गई?
अगस्त 2018 में सराफ ने कार को मरम्मत के लिए मुजफ्फरपुर स्थित निसान सर्विस सेंटर में जमा कराया।
कार मालिक का आरोप है कि:
हालांकि, वर्कशॉप ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि इंजन खोलने के लिए अनुमति ली गई थी।
रिपोर्ट के अनुसार, मरम्मत की लागत कई बार बदली गई और बाद में इसे लगभग 3.91 लाख रुपये पर तय किया गया।
वारंटी को लेकर विवाद क्यों खड़ा हुआ?
सराफ का कहना था कि उनकी कार केवल करीब 23,000 किलोमीटर ही चली थी।
उनके अनुसार:
दूसरी ओर, कंपनी और सर्विस सेंटर का कहना था कि जब यह समस्या सामने आई, तब तक वारंटी अवधि समाप्त हो चुकी थी।
आठ साल तक कार वर्कशॉप में क्यों पड़ी रही?
कार मालिक का आरोप है कि:
-
कई बार फॉलो-अप करने के बावजूद कार की मरम्मत नहीं की गई।
-
कानूनी नोटिस भेजने के बाद भी वाहन वापस नहीं किया गया।
-
कार वर्कशॉप में ही खड़ी रही।
-
मरम्मत की लागत बार-बार बदली जाती रही।
यही वजह रही कि यह मामला लंबे समय तक विवाद में बना रहा।
उपभोक्ता आयोग ने क्या पाया?
पूर्वी चंपारण (मोतिहारी) जिला उपभोक्ता आयोग ने इस मामले में डीलर, निसान से जुड़ी संस्थाओं और वर्कशॉप को "सर्विस में कमी" का दोषी माना।
आयोग ने अपने अवलोकन में कहा कि:
आयोग ने क्या आदेश दिया?
आयोग ने माना कि इतने लंबे समय तक वर्कशॉप में पड़े रहने के बाद अब कार के दोबारा सड़क पर चलने योग्य होने की संभावना कम है। इसलिए मरम्मत का आदेश देने के बजाय मुआवजा देने का फैसला किया गया।
कार मालिक को कितना मुआवजा मिलेगा?
उपभोक्ता आयोग ने विपक्षी पक्षों को संयुक्त रूप से निम्न भुगतान करने का निर्देश दिया:
-
कार की खरीद कीमत: 10,82,181 रुपये
-
1 सितंबर 2018 से भुगतान की तारीख तक 7 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज
-
मानसिक और शारीरिक परेशानी तथा कानूनी खर्च के लिए 25,000 रुपये अतिरिक्त
आयोग ने आदेश का पालन करने के लिए दो महीने का समय दिया है।
दो महीने बाद क्या होगा?
यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर आदेश का पालन कर दिया जाता है, तो संबंधित पक्ष वर्कशॉप में खड़ी कार को अपने कब्जे में वापस ले सकते हैं।
यह मामला उपभोक्ता अधिकारों और बिक्री के बाद सेवा की जवाबदेही से जुड़ा एक अहम उदाहरण बनकर सामने आया है। जहां वर्षों तक लंबित रही मरम्मत का अंत आखिरकार मुआवजे के आदेश के साथ हुआ।