क्या है नया सिस्टम
इस नई तकनीक को मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) कहा जाता है। यह सिस्टम ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (ANPR) कैमरों पर आधारित है। जो 150 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही गाड़ियों की नंबर प्लेट को भी स्कैन कर सकता है। इसका मकसद है कि गाड़ियों को टोल पर रुकना न पड़े और यात्रा पूरी तरह बिना रुकावट के हो।
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पहले इन टोल प्लाजाओं पर होगी शुरुआत
एनएचएआई इस सिस्टम को सबसे पहले चेन्नई-बंगलूरू हाइवे के नेमिली (श्रीपेरंबदूर) और चेनासमुद्रम टोल प्लाजा, साथ ही जीएसटी रोड के परनूर टोल प्लाजा पर लागू करेगा। ये तीनों हाइवे सेक्शन हर दिन करीब 75,000 वाहन (पैसेंजर कार यूनिट्स) संभालते हैं।
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कैसे करेगा काम यह स्मार्ट टोल सिस्टम
नए सिस्टम में ऊपर लगे कैमरे वाहन की नंबर प्लेट और वीडियो क्लिप 40 मीटर की दूरी से कैप्चर करेंगे। साथ ही RFID रीडर्स 300 मीटर पहले ही गाड़ी को पहचान लेंगे। इसके बाद टोल टैक्स अपने-आप फास्टैग से कट जाएगा और गाड़ी बिना रुके आगे बढ़ जाएगी।
अगर किसी कारण से टोल अपने-आप नहीं कट पाता, तो वाहन से भुगतान वसूलने के लिए अलग प्रक्रिया लागू की जाएगी।
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सिस्टम की निगरानी
इस प्रोजेक्ट की देखरेख इंडियन हाईवेज मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड (IHMCL) करेगी, जो सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के अधीन काम करती है। कंपनी ने पहले ही इस सिस्टम के डिजाइन, डेवलपमेंट और मेंटेनेंस के लिए पांच साल की अवधि वाले टेंडर जारी कर दिए हैं।
इंस्टॉलेशन का काम वर्क ऑर्डर मिलने के 14 महीने के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। अधिकारियों ने बताया कि सिस्टम को कई चरणों में टेस्ट किया जाएगा ताकि कोई तकनीकी गड़बड़ी न रहे।
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फायदेमंद साबित होगा MLFF सिस्टम
एनएचएआई का कहना है कि इस नए ऑटोमैटिक टोलिंग सिस्टम से-
- हाईवे पर जाम और इंतजार का समय घटेगा
- ईंधन की बचत होगी
- और यात्रा अनुभव और भी आसान और तेज बनेगा
यह सिस्टम लागू होने के बाद देश में "स्मार्ट और फ्रिक्शनलेस हाइवे ट्रैवल" का नया युग शुरू होगा। जहां अब टोल प्लाजा की लंबी कतारें इतिहास बन जाएंगी।
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