यह पायलट प्रोजेक्ट किन हाईवे कॉरिडोर पर लागू किया गया है?
NHAI के अनुसार, यह पायलट प्रोजेक्ट फिलहाल दो राष्ट्रीय राजमार्ग कॉरिडोर पर लागू किया गया है।
- जयपुर-आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग
- जयपुर-रेवाड़ी राष्ट्रीय राजमार्ग
इन इलाकों को आवारा पशुओं के कारण दुर्घटनाओं के लिहाज से संवेदनशील माना जाता है।
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इस सेफ्टी अलर्ट सिस्टम में रिलायंस जियो की क्या भूमिका है?
इस पहल के तहत रिलायंस जियो ने अपने प्लेटफॉर्म को अपग्रेड किया है, ताकि देशभर में रियल-टाइम सेफ्टी अलर्ट्स भेजे जा सकें। पिछले महीने NHAI और रिलायंस जियो के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) भी साइन किया गया था, जिसके तहत राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क पर टेलीकॉम आधारित सेफ्टी अलर्ट सिस्टम लागू किया जाना है।
इस पहल का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इस योजना का मुख्य लक्ष्य राष्ट्रीय राजमार्गों पर आवारा पशुओं की अचानक आवाजाही से होने वाले हादसों को रोकना है, खासकर:
- कोहरे के समय
- कम दृश्यता की स्थिति में
इन हालात में ड्राइवरों को समय रहते सतर्क करना इस सिस्टम का अहम हिस्सा है।
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ड्राइवरों को अलर्ट कैसे और कब मिलेगा?
NHAI के मुताबिक, इस पायलट प्रोजेक्ट के तहत:
- लोकेशन आधारित अलर्ट्स भेजे जाएंगे
- हाई-रिस्क हिस्सों से करीब 10 किलोमीटर पहले चेतावनी दी जाएगी
इससे यात्रियों को सावधानी बरतने के लिए पर्याप्त समय मिल सकेगा
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सेफ्टी अलर्ट किस तरह से भेजे जाएंगे?
ड्राइवरों तक संदेश पहुंचाने के लिए दो-स्तरीय व्यवस्था अपनाई गई है।
- पहले फ्लैश एसएमएस भेजा जाएगा
- इसके बाद उसी संदेश का वॉइस अलर्ट मिलेगा
Flash SMS हिंदी में होगा, जिसमें लिखा होगा:
"आगे आवारा पशु ग्रस्त क्षेत्र है। कृपया धीरे और सावधानी से चलें।"
इसके बाद यही संदेश वॉइस अलर्ट के जरिए भी सुनाया जाएगा।
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बार-बार अलर्ट आने से बचने के लिए क्या व्यवस्था की गई है?
ड्राइवरों को बार-बार एक ही चेतावनी देकर परेशान न किया जाए, इसके लिए एक ही यूजर को 30 मिनट के भीतर दोबारा अलर्ट नहीं भेजा जाएगा। इससे अलर्ट की थकान की समस्या से बचा जा सकेगा।
अलर्ट किन आधारों पर तैयार किए जाएंगे?
सेफ्टी अलर्ट्स तैयार करने के लिए:
- पुराने दुर्घटना आंकड़ों का विश्लेषण
- फील्ड स्तर से मिले इनपुट
का इस्तेमाल किया जाएगा।
इनके आधार पर आवारा पशुओं के लिए संवेदनशील ज़ोन चिन्हित किए गए हैं, जहां अलर्ट भेजे जाएंगे।
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आगे इस योजना को लेकर NHAI की क्या योजना है?
NHAI ने कहा है कि पायलट प्रोजेक्ट के नतीजों और उसकी प्रभावशीलता का आकलन किया जाएगा। अगर यह पहल सफल रहती है तो इसे देश के अन्य आवारा पशु-प्रभावित इलाकों में भी लागू किया जा सकता है।
यह कदम राष्ट्रीय राजमार्गों पर सड़क सुरक्षा बढ़ाने और यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाने की दिशा में एक अहम प्रयास माना जा रहा है।
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