भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) ने एक परियोजना शुरू की है। जो महत्वपूर्ण हाईवे सर्विस (राजमार्ग सेवाओं) को चलाने के लिए सौर ऊर्जा (सोलर एनर्जी) और विंड एनर्जी (पवन ऊर्जा) का इस्तेमाल करती है। यह उत्सर्जन को कम करने के भारत के लक्ष्य की दिशा में एक मजबूत लेकिन सरल कदम है। विंड टर्बाइन हाईवे के बीच में लगे होते हैं, जो तेज रफ्तार से चलने वाली कारों से आने वाली हवा को पकड़ते हैं। सोलर पैनलों के साथ मिलकर, यह सेटअप ईंधन स्टेशन और ईवी चार्जिंग पॉइंट के लिए पर्याप्त बिजली बनाता है। साथ ही अतिरिक्त ऊर्जा की बचत भी करता है।
2014 में भाजपा के सत्ता में आने के तुरंत बाद, प्रधानमंत्री कार्यालय ने भारतीय रेलवे से रेलवे पटरियों के किनारे स्थापित पवन चक्कियों से बिजली पैदा करने की व्यवहार्यता का पता लगाने को कहा था। यह विचार कि पवन चक्कियां तेज रफ्तार से चलने वाली ट्रेनों की हवा से चल सकती हैं, कारगर नहीं पाया गया। 10 साल बाद, प्रयोग का स्थान हाईवे पर स्थानांतरित हो गया है।
इस परियोजना का एक शानदार हिस्सा वर्टिकल एक्सिस विंड टर्बाइन (VAWT) का इस्तेमाल है। जो कार की रफ्तार से हवा को पकड़ता है। एक ऐसा स्रोत जो अक्सर कम हवा वाली जगहों पर छूट जाता है। इसका मतलब है कि यह परियोजना उन जगहों पर अच्छी तरह से काम करती है जहां सामान्य पवन फार्म शायद काम न करें। हॉरिजंटल एक्सिस विंड पवन टर्बाइन (HAWT) और 46-kW सोलर प्लांट के साथ, संग्रहीत ऊर्जा रात में या बादल वाले दिनों में सब कुछ चालू रखती है। सड़क पर चलने वाले लोग विंड टर्बाइनों की छोटी-छोटी मूवमेंट या सोलर पैनलों की चमक की कमी मससूस कर सकते हैं। लेकिन ये शांत उपकरण 24x7 काम करते रहते हैं।
हर महीने, यह सिस्टम लगभग 5,000 kWh बिजली पैदा करता है। इस बिजली से ईंधन स्टेशन, लाइट और ईवी चार्जर चलते हैं। जैसे-जैसे ऊर्जा की जरूरतें और ईंधन की कीमतें बढ़ती हैं, यह ग्रीन एनर्जी सिस्टम (हरित ऊर्जा प्रणाली) नियमित ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम कर सकती है, खासकर भारत की सड़कों पर।
इस परियोजना को दोहराने का मौका इसे रोमांचक बनाता है। अगर यह कारगर साबित होता है, तो मॉडल कई किलोमीटर लंबे हाईवे तक फैल सकता है। कल्पना कीजिए कि ऊर्जा प्रणालियों से चलने वाली लंबी सड़कें खुद को ऊर्जा प्रदान कर रही हैं और भारत की हरित ऊर्जा की जरूरतों को पूरा कर रही हैं। जैसे कि सड़कों को रोशन करना और ज्यादा ईवी चार्जर चलाना। चूंकि सड़क यात्रा और ऊर्जा उत्पादन भारत के उत्सर्जन का एक बड़ा हिस्सा बनाते हैं।
इसलिए NHAI का कहना है कि यह सिर्फ इंजीनियरिंग की एक कोशिश से कहीं ज्यादा है और दिखाता है कि कैसे सड़कें हरित पथों में बदल सकती हैं। जो भारत की जलवायु योजनाओं का समर्थन करती हैं। जीवाश्म ईंधन के इस्तेमाल में कटौती करके, यह परियोजना भविष्य के लिए दरवाजे खोलती है जहां ईंधन स्टेशन और सड़क रोशनी जैसी प्रमुख जगहें स्वच्छ ऊर्जा का इस्तेमाल करती हैं।
अधिकारियों का कहना है कि अगर इसे बढ़ाया जाए तो यह परियोजना न सिर्फ भारत के लिए बल्कि स्वच्छ ऊर्जा का दोहन करने के लिए नए तरीके तलाश रहे अन्य देशों के लिए भी बड़ी हो सकती है। जैसे-जैसे अध्ययन आगे बढ़ता है, विशेषज्ञ ऊर्जा के इस्तेमाल को बेहतर बनाने के लिए हवा और सूरज में होने वाले बदलावों की जांच कर रहे हैं। सफल नतीजे भारत से परे सड़क बुनियादी ढांचे के लिए एक नया नियम बना सकते हैं। और अन्य देश अपनी सड़कों पर इस पहल की नकल कर सकते हैं।