फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

End-of-Life Vehicles Rules: सरकार के इस नियम से ऑटो कंपनियों की बढ़ी टेंशन, मुनाफे पर भी खतरा; जानें मामला

Sun, 03 May 2026 02:04 PM IST
Jagriti ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

End-of-Life Vehicles Rules 2025: भारतीय ऑटो इंडस्ट्री पर हजारों करोड़ का वित्तीय संकट मंडरा रहा है। नए पर्यावरण संरक्षण नियम के तहत अब कंपनियों को पिछले 20 वर्षों में बेचे गए पुराने वाहनों के निपटान (EPR) के लिए भारी बजट अलग रखना होगा। ऐसे में माना जा रह है कि इंडस्ट्री में इससे FY26 में मुनाफे पर बड़ा दबाव आ सकता है और नई टेक्नोलॉजी में निवेश प्रभावित हो सकता है।
विज्ञापन
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : adobe stock
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

Indian Automobile Industry Loss: भारत की ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री वित्तीय वर्ष में बड़े फाइनेंशियल दबाव का सामना कर सकती है। जनवरी 2025 में जारी पर्यावरण संरक्षण (End-of-Life Vehicle) नियम, 2025 के तहत कंपनियों को पुराने वाहनों से जुड़े पर्यावरणीय दायित्वों के लिए बजट में प्रावधान करना पड़ सकता है। ऐसे में इंडस्ट्री के अधिकारियों का कहना है कि यह नियम अकाउंटिंग स्टैंडर्ड  IND AS 37 को सक्रिय करता है, जिसकी वजह से ऑटो कंपनियों को अतीत में बेचे गए वाहनों के लिए संभावित पर्यावरणीय लागत को अपनी अकाउंटिंग बुक्स में शामिल करना होगा।
विज्ञापन


EPR Compensation Cost: आखिर पूरा मामला क्या है?
नियम 4(6) के अनुसार अगर कोई वाहन निर्माता भविष्य में अपना परिचालन बंद करता है, तो उसे पहले बेचे गए वाहनों से जुड़ी Extended Producer Responsibility (विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व, EPR) की जिम्मेदारी निभानी होगी। ऑडिटर्स का मानना है कि इस नियम की वजह से कंपनियों को पिछले 20 वर्षों में बेचे गए निजी वाहनों और 15 वर्षों में बेचे गए कमर्शियल वाहनों के लिए पर्यावरणीय मुआवजे का प्रावधान करना पड़ सकता है। 

Environmental Rules Automobile Industry: क्यों बढ़ रही हैं कंपनियों की टेंशन?
ऑटो कंपनियों का कहना है कि भले ही उनका बाजार छोड़ने का कोई इरादा न हो, फिर भी उन्हें भारी वित्तीय प्रावधान करना पड़ सकता है। इससे कई समस्याएं हो सकती हैं। जैसे कंपनियों का कैश फ्लो प्रभावित हो सकता है। बैलेंस शीट पर दबाव बढ़ सकता है। सालाना मुनाफा घट सकता है और यहां तक की नई टेक्नोलॉजी में निवेश प्रभावित हो सकता है।
विज्ञापन


SIAM Budgetary Provision: संस्थाओं ने भी जताई चिंता?
सिर्फ कंपनियां ही नहीं, बल्कि सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चर्स (SIAM) ने भी सरकार से इस नियम में संशोधन की गुहार लगाई थी, लेकिन मार्च 2026 में आए नए नोटिफिकेशन में कोई बदलाव नहीं किया गया। जिसपर संस्था ने चेतावनी दी है कि अगर सीपीसीबी (Central Pollution Control Board) की ओर से पर्यावरणीय लागत अधिसूचित की जाती है, तो ऑटो कंपनियों को भारी वित्तीय प्रावधान करना पड़ सकता है। जानकारों का मानना है कि एक साथ 25,000 करोड़ रुपये का मुनाफा खत्म होने से कई कंपनियां नई टेक्नोलॉजी (जैसे EV) और विस्तार योजनाओं में निवेश नहीं कर पाएंगी। यह केवल एक अकाउंटिंग एंट्री नहीं है, बल्कि ऑटो सेक्टर की ग्रोथ स्टोरी के लिए एक बड़ी चुनौती है।

Auto Companies Financial Impact: दोपहिया और चारपहिया कंपनियों पर असर
इंडस्ट्री के अनुमानों के अनुसार, इस नियम का सबसे बड़ा असर पैसेंजर और कमर्शियल वाहनों पर भी पड़ सकता है। 
  • चार-पहिया वाहन निर्माता: इनपर लगभग 14,623 करोड़ का असर पड़ सकता है।
  • दो और तीन-पहिया वाहन निर्माता: इनपर करीब 9,650 करोड़ रुपये का असर पड़ सकता है।
  • कुल अनुमानित प्रभाव: सकल आधार पर लगभग 25,000 करोड़ रुपये प्रभावित हो सकते हैं।
ऐसे में एक्सपर्ट्स इसे ऑटो सेक्टर के लिए बड़ा वित्तीय झटका मान रहे हैं।
विज्ञापन


विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें