सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के पहले 'नेशनल हाउसहोल्ड ट्रैवल सर्वे' के अनुसार, भारत में कामकाजी लोगों के लिए दोपहिया वाहन (Two-Wheelers) परिवहन का सबसे पसंदीदा जरिया बनकर उभरे हैं।
सर्वे के मुख्य निष्कर्ष:
- प्राथमिक साधन: कार्यस्थल पर जाने वाले लगभग 42.6 प्रतिशत कर्मचारी अपनी दैनिक आवाजाही के लिए मुख्य रूप से टू-व्हीलर का उपयोग करते हैं।
- शहर बनाम गांव: शहरी भारत में यह आंकड़ा तेजी से बढ़कर 52.3 प्रतिशत हो जाता है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह 37.1 प्रतिशत है।
- पैदल चलना: राष्ट्रीय स्तर पर पैदल कार्यस्थल जाना दूसरा सबसे बड़ा माध्यम है, जिसकी हिस्सेदारी 28.3 प्रतिशत दर्ज की गई।
देश में औसतन कितने समय में लोग अपने ऑफिस या वर्कप्लेस पहुंच जाते हैं?
बढ़ते ट्रैफिक और जाम के बावजूद, अधिकांश भारतीय कम दूरी और कम समय में ही अपने कार्यस्थल तक पहुंच जाते हैं।
- 30 मिनट से कम समय: निश्चित कार्यस्थल पर जाने वाले 83.4 प्रतिशत कर्मचारी 30 मिनट के भीतर अपने ऑफिस पहुंच जाते हैं। इनमें ग्रामीण क्षेत्रों के 86.1 प्रतिशत और शहरी भारत के 79.3 प्रतिशत लोग शामिल हैं।
- 30 से 60 मिनट: लगभग 13.7 प्रतिशत लोगों को कार्यस्थल पहुंचने में 30 मिनट से 1 घंटे का समय लगता है।
- औसत समय: राष्ट्रीय स्तर पर औसत कम्यूट टाइम (यात्रा का समय) 25 मिनट है। शहरों में यह औसतन 27 मिनट और गांवों में 23 मिनट है।
- सुबह का समय: लगभग 95 प्रतिशत कर्मचारी सुबह 10 बजे से पहले काम के लिए निकल जाते हैं। इनमें से 56.5 प्रतिशत लोग सुबह 8 से 10 बजे के बीच और 33.7 प्रतिशत लोग सुबह 6 से 8 बजे के बीच यात्रा शुरू करते हैं।
शहरी और ग्रामीण कर्मचारियों का आवाजाही पर औसतन कितना खर्च होता है?
सर्वे से पता चलता है कि शहरी इलाकों में सफर का खर्च ग्रामीण इलाकों की तुलना में काफी अधिक है। साथ ही पुरुषों और महिलाओं के खर्च में भी अंतर देखा गया है:
| श्रेणी / वर्ग |
औसतन मासिक आवाजाही का खर्च (रुपये में) |
| राष्ट्रीय औसत (प्रति कर्मचारी) |
₹785 |
| शहरी कर्मचारी |
₹1,044 |
| ग्रामीण कर्मचारी |
₹612 |
| पुरुष कर्मचारी |
₹835 |
| महिला कर्मचारी |
₹533 |
इसके अलावा, काम के लिए 1 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय करने वाले पुरुषों का अनुपात 61.9 प्रतिशत है, जबकि महिलाओं के मामले में यह 41.9 प्रतिशत है। कुल मिलाकर 57.6 प्रतिशत कर्मचारी काम के लिए 1 किमी से अधिक की यात्रा करते हैं।
रातभर के लंबे सफर के लिए भारतीय किन साधनों का इस्तेमाल करते हैं?
लंबी दूरी की यात्राओं और रातभर के सफर के लिए निजी वाहनों के बजाय सार्वजनिक परिवहन का प्रभुत्व बना हुआ है:
- बस और ट्रेन का दबदबा: कुल ओवरनाइट हाउसहोल्ड यात्राओं में अकेले बसों की हिस्सेदारी 55.8 प्रतिशत और इंटर-सिटी रेलवे की हिस्सेदारी 17.7 प्रतिशत रही। दोनों मिलाकर कुल 73.5 प्रतिशत लंबी यात्राओं को कवर करते हैं।
- कार और टू-व्हीलर: कारों का इस्तेमाल 15.1 प्रतिशत और दोपहिया वाहनों का इस्तेमाल 8.8 प्रतिशत ओवरनाइट यात्राओं के लिए किया गया।
- शहरी रुझान: शहरी परिवारों के लिए ट्रेन का महत्व अधिक (22.7%) दिखा, जबकि ग्रामीण परिवारों में यह 14% रहा।
- यात्रा का कारण: रातभर के सफर का सबसे बड़ा कारण सामाजिक और धार्मिक गतिविधियां (70.2%) रहा। वहीं सांस्कृतिक, अवकाश, खेल और पर्यटन से जुड़े सफर की हिस्सेदारी 7.4 प्रतिशत रही।
छात्रों के लिए स्कूल-कॉलेज जाने का सबसे प्रमुख जरिया क्या है?
छात्रों की गतिशीलता का पैटर्न कामकाजी लोगों से काफी अलग देखा गया:
- पैदल यात्रा: शिक्षण संस्थानों तक जाने के लिए 37 प्रतिशत छात्र पैदल जाते हैं, जो सबसे बड़ा माध्यम है।
- अन्य साधन: इसके बाद बस का इस्तेमाल करने वाले छात्र 29.5 प्रतिशत और साइकिल का उपयोग करने वाले 15.8 प्रतिशत हैं।
- यात्रा का समय और खर्च: लगभग 87.6 प्रतिशत छात्र 30 मिनट के भीतर अपने स्कूल या कॉलेज पहुंच जाते हैं और उनका औसत यात्रा समय 23 मिनट है। शहरी छात्र कम्यूट पर औसतन 617 रुपये प्रति माह खर्च करते हैं। जबकि ग्रामीण छात्रों का औसत खर्च 361 रुपये है।