रात के समय सामने से आने वाले वाहनों की तेज रोशनी से होने वाली परेशानी और दुर्घटना के जोखिम को कम करने के लिए सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने नए प्रस्ताव पेश किए हैं। मसौदा अधिसूचना के अनुसार, भविष्य में नए दोपहिया वाहनों में ऑटोमैटिक हेडलैंप ऑन (AHO) प्रणाली के सक्रिय होने पर हेडलैंप केवल पासिंग बीम यानी लो-बीम पर काम करेगा।
मंत्रालय ने हेडलैंप की अधिकतम रोशनी की तीव्रता को लेकर भी सख्त बदलाव प्रस्तावित किए हैं। इसका उद्देश्य अन्य सड़क उपयोगकर्ताओं को तेज रोशनी से होने वाली परेशानी कम करना और रात में बेहतर दृश्यता सुनिश्चित करना है।
मसौदा अधिसूचना में अधिक तीव्रता वाले हेडलैंप की अधिकतम अनुमत रोशनी को भी कम करने का प्रस्ताव रखा गया है।
दोपहिया वाहनों के लिए अधिकतम अनुमत प्रकाश तीव्रता को:
1.5 लाख कैंडेला से घटाकर 1 लाख कैंडेला करने का प्रस्ताव है।
वहीं, चारपहिया वाहनों यानी कारों के लिए अधिकतम अनुमत प्रकाश तीव्रता को:
2.25 लाख कैंडेला से घटाकर 1.5 लाख कैंडेला करने का प्रस्ताव दिया गया है।
कैंडेला (cd) प्रकाश की तीव्रता मापने की आधिकारिक इकाई है।
राजमार्ग मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, इन प्रस्तावित उपायों का मुख्य उद्देश्य देश में रात के समय होने वाली सड़क दुर्घटनाओं के जोखिम को कम करना है।
तेज और चकाचौंध पैदा करने वाली हेडलैंप रोशनी सामने से आने वाले वाहन चालकों की दृश्यता को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में ऑटोमैटिक हेडलैंप को लो-बीम तक सीमित करने और रोशनी की अधिकतम तीव्रता घटाने का प्रस्ताव सड़क पर अन्य उपयोगकर्ताओं के लिए बेहतर दृश्यता सुनिश्चित करने की दिशा में उठाया गया कदम है।
ऑटोमैटिक लो-बीम और प्रकाश की तीव्रता में कटौती जैसे कड़े नियम लागू करने से रात के समय होने वाले जानलेवा सड़क हादसों और दुर्घटनाओं के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकेगा।