सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स के 2026 के वार्षिक सम्मेलन में प्रधानमंत्री के सलाहकार तरुण कपूर ने भारतीय ऑटोमोबाइल्स उद्योग को भविष्य की मोबिलिटी के लिए एक कड़ा और स्पष्ट संदेश दिया है। उन्होंने ऑटो कंपनियों को सचेत करते हुए कहा कि पारंपरिक ईंधन या इंजन से चलने वाली गाड़ियों पर आने वाले समय में और अधिक पाबंदियां लगेंगी। उन्होंने साफ किया कि ऑटो उद्योग को केवल सीएनजी पर निर्भर रहने के बजाय अब बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की तरफ रुख करने की तत्काल आवश्यकता है।
इस संबोधन की प्रमुख बातें और ऑटो सेक्टर पर पड़ने वाले प्रभाव...
पारंपरिक गाड़ियों पर और सख्त नियम
तरुण कपूर ने चार पहिया वाहनों के संदर्भ में कहा कि चार पहिया गाड़ियों के मामले में मैं आपको बता सकता हूं कि और भी पाबंदियां लगेंगी। इसलिए कृपया तैयार रहें, और हमें इलेक्ट्रिक गाड़ियों को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि हालांकि सीएनजी की दिशा में कुछ प्रगति हुई थी, लेकिन अब अंतिम लक्ष्य इलेक्ट्रिक मोबिलिटी ही है।
बैटरी आयात पर भी सरकार की नजर
- प्रधानमंत्री के सलाहकार ने संकेत दिया कि सरकार भारत में बैटरी का घरेलू उत्पादन बढ़ाने और आयात पर निर्भरता कम करने के लिए टैक्स से जुड़े बदलाव कर सकती है। उन्होंने कहा कि बैटरी के आयात और भारत में इसके उत्पादन को लेकर उनसे लगातार चर्चा होती रहती है।
- सरकार इस बात पर भी विचार कर रही है कि घरेलू बैटरी निर्माण को बढ़ावा देने के लिए कुछ पाबंदियां या दूसरे जरूरी कदम उठाए जा सकते हैं। कपूर ने कहा कि इस मुद्दे पर चर्चा और बहस की जरूरत है, ताकि ऐसे उपाय तय किए जा सकें जिनसे भारत का घरेलू बैटरी मैन्युफैक्चरिंग उद्योग धीरे-धीरे मजबूत हो सके।
ईवी को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देने की जरूरत
कपूर ने ऑटो इंडस्ट्री को साफ संदेश देते हुए कहा कि चार पहिया वाहनों के मामले में आगे और पाबंदियां लग सकती हैं। ऐसे में कंपनियों को इसके लिए तैयार रहना चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि भारत को इलेक्ट्रिक गाड़ियों को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देने की जरूरत है। उनके मुताबिक, सीएनजी की दिशा में कुछ कदम उठाए जा चुके हैं, लेकिन अब इंडस्ट्री को बड़े स्तर पर इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर बढ़ने की जरूरत है।
सस्ती ईवी के लिए लागत घटाना जरूरी
साथ ही बताया कि इलेक्ट्रिक गाड़ियों को बड़े पैमाने पर अपनाने के रास्ते में लागत भी एक बड़ी चुनौती है। कपूर ने माना कि कुछ उत्पादन लागत अभी भी ज्यादा हो सकती है। उन्होंने कहा कि इंडस्ट्री और सरकार को ऐसे तरीकों पर विचार करना होगा, जिनसे उत्पादन लागत कम हो और इसका फायदा अंतिम ग्राहक तक पहुंचे। इससे इलेक्ट्रिक गाड़ियों की कीमत कम करने में मदद मिल सकती है और इनकी मांग बढ़ सकती है।
बैटरी स्वैपिंग और हाईवे चार्जिंग पर भी जोर
कपूर ने ईवी को बड़े पैमाने पर अपनाने के लिए सिर्फ गाड़ियों की कीमत कम करने पर ही जोर नहीं दिया। उन्होंने नए फाइनेंसिंग मॉडल और दूसरी तकनीकी व्यवस्थाओं की जरूरत भी बताई। उन्होंने बैटरी स्वैपिंग जैसे विकल्पों के साथ हाईवे पर बेहतर चार्जिंग सुविधा विकसित करने की बात कही। इससे लंबी दूरी की यात्रा करने वाले ईवी ग्राहकों की चिंता कम करने में मदद मिल सकती है।
टैक्स में बड़े बदलाव के लिए रहें तैयार
कपूर ने ऑटो कंपनियों को टैक्स व्यवस्था में संभावित बदलावों के लिए तैयार रहने को कहा। उन्होंने संकेत दिया कि सरकार इस विषय पर गंभीरता से विचार कर रही है और आने वाले समय में कुछ बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। उन्होंने इंडस्ट्री को स्पष्ट संदेश दिया कि कंपनियों को सरकार की ओर से संभावित बड़े बदलावों के लिए पहले से तैयार रहना होगा।
ऑटो इंडस्ट्री के लिए क्या है संदेश?
तरुण कपूर के बयान से साफ संकेत मिलता है कि सरकार इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को आगे बढ़ाने के लिए कई स्तरों पर कदम उठाने की तैयारी में है। इसमें पारंपरिक इंजन वाली गाड़ियों पर अतिरिक्त पाबंदियां, बैटरी के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा, टैक्स में संभावित बदलाव, लागत कम करना और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करना शामिल हो सकते हैं। अब ऑटो इंडस्ट्री के सामने चुनौती सिर्फ ज्यादा ईवी बनाने की नहीं, बल्कि उन्हें कम लागत में तैयार करने और ग्राहकों के लिए चार्जिंग व फाइनेंसिंग को आसान बनाने की भी होगी।