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Mission Save Lives 2.0: एआई सेंसर और GPS स्पीड लिमिटर, भारत की सड़कों पर मौत के आंकड़ों को कम करेगी ये तकनीक

Wed, 25 Feb 2026 10:57 AM IST
जागृति ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Road Safety India: क्या आप जानते हैं कि भारत में बिकने वाले 70 प्रतिशत हेलमेट सिर्फ दिखावा हैं? संयुक्त राष्ट्र के रोड सेफ्टी एनवॉय जीन टॉड ने इन्हें नकली वैक्सीन करार दिया है। अब भारत की सड़कों पर मौतों का आंकड़ा कम करने के लिए एआई सेंसर और जीपीएस स्पीड लिमिटर जैसी अत्याधुनिक तकनीक के साथ मिशन सेव लाइव्स 2.0 का आगाज हुआ है। जानिए कैसे एक छोटा सा बदलाव आपकी जान बचा सकता है।
 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Istock
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विस्तार
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भारत दुनिया के कुल वाहनों का महज 1 प्रतिशत हिस्सा रखता है, लेकिन वैश्विक सड़क दुर्घटना मौतों में इसकी हिस्सेदारी 15 प्रतिशत है। हर साल 1.5 लाख से अधिक लोग सड़क हादसों में जान गंवाते हैं, जिनमें बड़ी संख्या दोपहिया सवारों की होती है। Jean Todt (जीन टॉड) ने फर्जी हेलमेट को नकली वैक्सीन बताते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की है। दिल्ली में बिकने वाले लगभग 70 प्रतिशत हेलमेट फर्जी पाए गए। समाधान के तौर पर हर बाइक-स्कूटर के साथ दो असली हेलमेट अनिवार्य करने, AI आधारित हेलमेट सेंसर और जीपीएस स्पीड लिमिटर जैसे टेक्नोलॉजी समाधान पर जोर दिया गया है।

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आंकड़े क्यों डरा रहे हैं?

भारत में हर वर्ष लगभग डेढ़ लाख से अधिक लोगों की सड़क दुर्घटना में मौत हो रही है। इनमें सबसे ज्यादा प्रभावित दोपहिया वाहन चालक और पीछे बैठने वाले लोग हैं। संयुक्त राष्ट्र के रोड सेफ्टी विशेष दूत जीन टॉड के अनुसार, भारत में वाहनों की संख्या दुनिया का सिर्फ एक प्रतिशत है, लेकिन सड़क हादसों में होने वाली कुल मौतों में 15 प्रतिशत हिस्सा भारत का है। ये असंतुलन बताता है कि समस्या सिर्फ ट्रैफिक वॉल्यूम की नहीं, बल्कि सुरक्षा मानकों और उनके पालन की है।

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दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में यह खुलासा हुआ कि राजधानी में बिकने वाले करीब 70 प्रतिशत हेलमेट नकली या सुरक्षा मानकों पर खरे नहीं उतरते। जीन टॉड इन्हें नकली वैक्सीन कहा है। यानी ऐसा सामान जो सुरक्षा का भ्रम देता है, लेकिन हादसे के समय बेकार साबित होता है। हेलमेट अगर बीआईएस या आईएसआई मानकों के अनुरूप न हो, तो टक्कर की स्थिति में सिर और दिमाग को पर्याप्त सुरक्षा नहीं दे पाता। भारत में सड़क दुर्घटनाओं में मौत का प्रमुख कारण हेड इंजरी है।

15 दिन में बंद हो सकती हैं फर्जी फैक्ट्रियां?

स्टीलबर्ड हाई-टेक इंडिया के एमडी राजीव कर्पूर ने मिशन सेव लाइव्स 2.0 के तहत प्रस्ताव रखा कि अगर सरकार इच्छा शक्ति दिखाए, तो फर्जी हेलमेट बनाने वाली इकाइयों को 15 दिनों में बंद किया जा सकता है। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि हर नई मोटरसाइकिल या स्कूटर की बिक्री के साथ दो प्रमाणित हेलमेट अनिवार्य रूप से दिए जाएं, एक चालक के लिए और एक पीछे बैठने वाले के लिए।

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AI सेंसर और GPS स्पीड लिमिटर
कार्यक्रम में भविष्य की रोड सेफ्टी टेक्नोलॉजी पर भी चर्चा हुई:
  • AI आधारित हेलमेट सेंसर: बाइक तब तक अलार्म देगी जब तक चालक और पीछे बैठा व्यक्ति हेलमेट नहीं पहन लेते। इसे इग्निशन सिस्टम को हेलमेट लॉक मैकेनिज्म से जोड़ा जा सकता है।
  • GPS स्पीड लिमिटर: वाहन निर्धारित स्पीड लिमिट से ऊपर जाते ही स्वतः नियंत्रित हो जाएगा। ओवरस्पीडिंग से होने वाले हादसों में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।
इसपर ऑटो एक्सपर्ट्स का कहना है कि सेफ सिस्टम अप्रोच पर जोर दिया है। जिसमें बेहतर सड़क डिजाइन, स्पष्ट साइनज और लेन मार्किंग, सख्त प्रवर्तन और तेज और कुशल इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम से सड़क मौतों को 50% तक कम करना लक्ष्य है। इसके लिए सरकार, ऑटो इंडस्ट्री और नागरिकों को संयुक्त रूप से काम करना होगा।

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क्यों जरूरी है दो हेलमेट अनिवार्य करना?
भारत में अक्सर पीछे बैठने वाला व्यक्ति हेलमेट नहीं पहनता। हालांकि कई राज्यों में कुछ लोग पहनते भी है, लेकिन कहीं-कहीं अभी ये नियम लागू नहीं हो रहा है। दो हेलमेट अनिवार्य करने से अनुपालन बढ़ेगा, फर्जी उत्पादों की मांग घटेगी और निर्माण कंपनियों की जवाबदेही तय होगी।

हेलमेट खरीदते वक्त इन बातों का रखे ध्यान:
  • ISI मार्क की पहचान: हमेशा ISI (IS:4151) प्रमाणित हेलमेट ही खरीदें। नकली हेलमेट केवल प्लास्टिक के टुकड़े होते हैं जो गिरने पर तुरंत टूट जाते हैं।
  • शॉक एब्जॉर्प्शन: असली हेलमेट के अंदर की थर्मोकोल (EPS) परत झटके को सोख लेती है, जिससे सिर की अंदरूनी चोट का खतरा कम हो जाता है।
  • चिन स्ट्रैप: बिना स्ट्रैप बांधे हेलमेट पहनना न पहनने के बराबर है। दुर्घटना के वक्त यह सबसे पहले सिर से बाहर निकल जाता है।
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