भारतीय ऑटो बाजार में तीन रो हाइब्रिड गाड़ियों का मुकाबला काफी दिलचस्प हो गया है। हाल ही में लॉन्च हुई एमजी हेक्टर टाॅमहॉक पीएचईवी सीधे टोयोटा इनोवा हाइक्रॉस हाइब्रिड जेडएक्स को टक्कर दे रही है। दोनों ही सात-सीटर गाड़ियां हैं, लेकिन इनकी हाइब्रिड तकनीक, माइलेज और फीचर्स में बड़ा अंतर देखने को मिलता है। आइए जानते हैं आपके जरुरत के हिसाब से दोनों में से कौन-सी गाड़ी ज्यादा बेहतर हो सकती है।
अगर आप अपने परिवार के लिए 7-सीटर हाइब्रिड गाड़ी खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो बाजार में अब दो बड़े और ताकतवर विकल्प मौजूद हैं। एक तरफ 115 किमी की ईवी रेंज और डीसी फास्ट चार्जिंग के साथ आई नई एमजी हेक्टर टॉमहॉक पीएचईवी है, तो दूसरी तरफ भरोसेमंद सेल्फ-चार्जिंग तकनीक वाली टोयोटा इनोवा हाइक्रॉस हाइब्रिड जेडएक्स है। दोनों ही गाड़ियां लग्जरी, माइलेज और पर्यावरण-अनुकूल परफॉर्मेंस का बेहतरीन मेल हैं, लेकिन इनकी तकनीक और ड्राइविंग एक्सपीरियंस में काफी बड़ा अंतर है। जानिए 27.79 लाख की शुरुआती कीमत वाली हेक्टर टोमाहॉक कैसे टोयोटा इन्नोवा हाईक्रॉस को चुनौती दे रही है और आपकी जरूरतों के हिसाब से कौन सा विकल्प ज्यादा फायदेमंद है।
विज्ञापन
किसकी कीमत है कम?
टॉप एमजी हेक्टर टॉमहॉक पीएचईवी इसेंस की एक्स-शोरूम कीमत 27.79 लाख है। वहीं टोयोटा इनोवा हाइक्रॉस हाइब्रिड जेडएक्स (O) की कीमत करीब 31.84 लाख है।
इस हिसाब से टॉमहॉक करीब 4.05 लाख सस्ती पड़ती है। यानी समान 7-सीटर हाइब्रिड सेगमेंट में एमजी कीमत के मामले में स्पष्ट बढ़त रखती है।
साइज में कौन आगे?
साइज की बात करें तो टोयोटा हाइक्रॉस थोड़ी बड़ी है। इसकी लंबाई टॉमहॉक से 10 मिमी, ऊंचाई 20 मिमी और व्हीलबेस 40 मिमी ज्यादा है। बूट स्पेस में भी इनोवा आगे है। इसमें 239 लीटर का बूट स्पेस मिलता है, जबकि हेक्टर टॉमहॉक में 192 लीटर का बूट स्पेस है। यानी बड़े आकार और ज्यादा बूट स्पेस के मामले में इनोवा हाइक्रॉस को फायदा मिलता है।
विज्ञापन
फीचर्स में किसका पलड़ा भारी
फीचर्स की बात करें तो एमजी हेक्टर टॉमहॉक पीएचईवी ज्यादा हाई-टेक नजर आती है। इसमें 15.6 इंच का टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम दिया गया है। इसके साथ 8.8 इंच का डिजिटल ड्राइवर डिस्प्ले भी मिलता है। इसके अलावा एसयूवी में 10-स्पीकर इनफिनिटी साउंड सिस्टम, 256-कलर एम्बिएंट लाइटिंग और 50W वायरलेस चार्जर जैसे फीचर्स मिलते हैं।
दूसरी तरफ टाेयोटा इनोवा हाइक्रॉस हाइब्रिड में सेकंड रो पावर्ड ऑटोमन सीट्स और 8-वे पावर्ड ड्राइवर सीट जैसे फीचर्स खास हैं। इसलिए ज्यादा स्क्रीन और टेक्नोलॉजी वाले फीचर्स पसंद करने वालों को हेक्टर टॉमहॉक आकर्षित कर सकती है, जबकि पीछे बैठने वालों के आराम के मामले में इनोवा का सेटअप मजबूत है।
सेफ्टी में दोनों में कई समानताएं
सेफ्टी के मामले में दोनों कारों में कई आधुनिक फीचर्स दिए गए हैं। दोनों में छह एयरबैग्स, लेवल-2 एडीएएस, 360-डिग्री कैमरा, ऑल-व्हील डिस्क ब्रेक्स और इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी कंट्रोल मिलते हैं।
हालांकि क्रैश टेस्ट के मामले में टोयोटा इनोवा हाइक्रोस को बढ़त हासिल है। इसे भारत एनसीएपी में एडल्ट और चाइल्ड सेफ्टी दोनों में 5-स्टार रेटिंग मिली है। वहीं, एमजी हेक्टर टॉमहॉक पीएचईवी की क्रैश टेस्ट रेटिंग अभी सामने नहीं आई है।
इंजन और हाइब्रिड सिस्टम में बड़ा अंतर
हेक्टर टॉमहॉक में 1.5 लीटर पेट्रोल इंजन के साथ 20.5 kWh बैटरी दी गई है। इसका कंबाइंड आउटपुट 198 bhp है। इसमें डीसी फास्ट चार्जिंग सपोर्ट भी मिलता है। कंपनी का दावा है कि यह करीब 50 किमी प्रति लीटर का माइलेज दे सकती है और इसकी कुल क्लेम्ड रेंज 1,100 किमी से ज्यादा है।
वहीं, टोयोटा इनोवा हाइक्रॉस में 2.0 लीटर स्ट्रॉन्ग-हाइब्रिड सिस्टम मिलता है, जिसका आउटपुट 184 bhp है। इसका क्लेम्ड माइलेज 22.16 किमी प्रति लीटर है।
पीएचईवी और स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड में क्या अंतर?
यहां दोनों कारों के बीच सबसे बड़ा अंतर उनकी हाइब्रिड तकनीक का है।
एमजी हेक्टर टॉमहॉक पीएचईवी बैटरी को बाहर से चार्ज किया जा सकता है। इसलिए छोटी दूरी की यात्राओं में इलेक्ट्रिक पावर का ज्यादा इस्तेमाल करने का फायदा मिल सकता है।
इनोवा हाइक्रॉस सेल्फ-चार्जिंग स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड है। इसमें आपको कार को अलग से चार्ज करने की जरूरत नहीं होती। पेट्रोल इंजन, रीजनरेटिव ब्रेकिंग और हाइब्रिड सिस्टम मिलकर बैटरी को चार्ज करते हैं।
किसमें क्या फायदा?
अगर आपकी प्राथमिकता कम कीमत, ज्यादा टेक्नोलॉजी, बड़ी बैटरी और प्लग-इन हाइब्रिड सिस्टम है तो एमजी हेक्टर टॉमहॉक पीएचईवी ज्यादा आकर्षक विकल्प बनती है।
वहीं अगर आप ज्यादा बड़ा केबिन, ज्यादा बूट स्पेस, सेल्फ-चार्जिंग हाइब्रिड सिस्टम और भारत NCAP की 5-स्टार सेफ्टी रेटिंग चाहते हैं तो टाेयोटा इनोवा हाइक्रोस हाइब्रिड मजबूत विकल्प है।
यानी हेक्टर टॉमहॉक कीमत और टेक्नोलॉजी पर जोर देती है, जबकि इनोवा हाइक्रॉस स्पेस, प्रैक्टिकलिटी और साबित हो चुकी हाइब्रिड तकनीक के साथ मुकाबला करती है।