क्या होती है फ्लेक्स-फ्यूल कार?
आसान शब्दों में कहें तो फ्लेक्स-फ्यूल कारें ऐसी गाड़ियां होती हैं जो एक से ज्यादा तरह के ईंधन जैसे कि पेट्रोल और एथेनॉल के मिश्रण पर चल सकती हैं। भारत में फिलहाल ऐसी एक भी 4-व्हीलर कार बिक्री के लिए उपलब्ध नहीं है। मारुति की यह आगामी कार देश की पहली ऐसी गाड़ी होगी, जिसे 100% एथेनॉल पर भी चलाया जा सकेगा। इसके लिए कार के फ्यूल स्टोरेज, इंजन और इग्निशन सिस्टम में खास बदलाव किए गए हैं।
क्या फ्रोंक्स पर आधारित होगी यह कार?
पिछले वर्ष जापान मोबिलिटी शो में सुजुकी ने अपनी पॉपुलर सब-4 मीटर एसयूवी फ्रोंक्स का फ्लेक्स-फ्यूल प्रोटोटाइप दिखाया था। हालांकि, वह मॉडल 85% एथेनॉल (E85) तक के लिए ही तैयार था। ऐसे में उम्मीद जताई जा रही है कि मारुति सुजुकी 5 जून को या तो फ्रोंक्स का ही नया अपग्रेड वेरिएंट लाएगी या फिर किसी दूसरे मॉडल के साथ E100 तकनीक को बाजार में उतारेगी।
एथेनॉल कारों के लिए क्यों जरूरी हैं बड़े बदलाव?
सामान्य पेट्रोल की तुलना में एथेनॉल की प्रकृति थोड़ी अलग होती है, क्योंकि इसमें नमी को सोखने की क्षमता काफी अधिक होती है। इस कारण, अगर साधारण इंजन में सीधे 100% एथेनॉल का उपयोग किया जाए तो यह नमी इंजन के अंदरूनी हिस्सों में जंग पैदा कर सकती है और लंबे समय में उसे खराब कर सकती है।
यही वजह है कि फ्लेक्स-फ्यूल कारों को तैयार करते समय कार कंपनियों को विशेष इंजीनियरिंग की जरूरत पड़ती है। इसके तहत वाहन की फ्यूल पाइपलाइन, फ्यूल पंप और इंजन के अन्य महत्वपूर्ण हिस्सों को विशेष रूप से डिजाइन किया जाता है ताकि वे एथेनॉल के संपर्क में आने पर भी सुरक्षित रहें और कार की परफॉरमेंस पर कोई असर न पड़े।
आम जनता और देश को क्या होगा फायदा?
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के अनुसार, एथेनॉल के इस्तेमाल को बढ़ावा देने से देश और आम जनता को तीन बड़े लाभ मिलेंगे। सबसे पहले, पेट्रोल की तुलना में एथेनॉल की लागत काफी कम है, जिसका सीधा असर आम आदमी के खर्च पर पड़ेगा और उनकी जेब पर बोझ कम होगा।
दूसरा, यह पर्यावरण के लिहाज से भी बेहतर है। क्योंकि एथेनॉल से चलने वाली गाड़ियां काफी कम प्रदूषण फैलाती हैं, जिससे हवा की गुणवत्ता में सुधार होगा। अंत में, यह देश को आर्थिक रूप से मजबूती देगा। वर्तमान में भारत अपनी जरूरत का लगभग 87% कच्चा तेल आयात करता है। लेकिन एथेनॉल का उत्पादन देश में ही होने से भारत आत्मनिर्भर बनेगा और कच्चे तेल के आयात पर खर्च होने वाले अरबों रुपये की बचत होगी।
आगे की क्या है तैयारी?
फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक को लेकर भारत की तैयारी काफी तेजी से आगे बढ़ रही है। देश में मारुति के अलावा टोयोटा, टाटा और महिंद्रा जैसी करीब 12 प्रमुख कंपनियां पहले ही अपनी फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियों को प्रदर्शित कर चुकी हैं। साथ ही होंडा और सुजुकी जैसी कंपनियां टू-व्हीलर सेगमेंट यानी बाइक और स्कूटर में भी इस तकनीक को उतार चुकी हैं।
वर्तमान में भारत में E20 (20% एथेनॉल मिश्रण) पेट्रोल को मानक के तौर पर अपनाया जा चुका है और सरकार अब भविष्य के लिए E22 से लेकर E30 तक के ईंधन का रोडमैप तैयार कर रही है। इस बढ़ते इकोसिस्टम के बीच, मारुति की यह आगामी कार भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में एक बड़ा गेम चेंजर साबित हो सकती है।