वित्तीय वर्ष 2025-26 के आखिरी महीने यानी मार्च में भारतीय इलेक्ट्रिक वाहन बाजार ने अब तक का सबसे ऊंचा मासिक स्तर छुआ है। आंकड़ों के अनुसार, इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री में 49 प्रतिशत और टू-व्हीलर्स की बिक्री में 36 प्रतिशत का जबरदस्त उछाल आया है। डीलरों के पास मची ये भीड़ आक्रामक सरकारी नीतियों और CAFE-2 मानकों के कड़े होने के डर को दर्शाती है।
मार्च 2026 में 19,711 इलेक्ट्रिक कारें और 1,77,485 इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स रजिस्टर्ड हुए, जो की एक मासिक रिकॉर्ड माना जा रहा है। इसके पीछे सब्सिडी घटने का आशंका, ऑटो कंपनियों पर CAFE-2 मानकों की पेनल्टी का डर और पेट्रोल-डीजल की कीमतों में संभावित अस्थिरता की वजह मानी जा रही है। FY26 में इलेक्ट्रिक कारों की कुल बिक्री 82% बढ़कर करीब 2 लाख यूनिट तक पहुंच गई है।
क्यों बढ़ रही मांग?
एक्सपर्ट्स का ये भी मानना है कि ऑटो कंपनियां केवल मांग के कारण EV नहीं बेच रहीं, उन पर CAFE-2 (Corporate Average Fuel Efficiency) नियमों का दबाव भी है। अगर कंपनियां तय उत्सर्जन मानकों को पूरा नहीं करतीं, तो उन्हें सैकड़ों करोड़ रुपये तक की पेनल्टी झेलनी पड़ सकती है, इसलिए कंपनियां EV बिक्री बढ़ा रही हैं और पेट्रोल या डीजल गाड़ियों की भरपाई कर रही हैं। यानी ईवी अब सिर्फ ग्रीन चॉइस नहीं, बल्कि कॉरपोरेट सर्वाइवल टूल भी बन गया है।
जल्दी खरीदने की जल्द
इसके अलावा इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर सेगमेंट में तेजी का बड़ा कारण पीएम ई-ड्राइव सब्सिडी खत्म होने का डर भी माना जा रहा है। हालांकि सरकार ने इसे 31 जुलाई 2026 तक बढ़ाया, लेकिन इंसेंटिव घटाकर 10 हजार से पांच हजार कर दिया है। इससे ग्राहकों में अभी खरीदो वाली मानसिकता बन गई है।
नए मॉडल्स का खेल
ग्राहकों को नई लॉन्चिंग कार भी काफी आकर्षित करती है। आने वाले महीनों में ईवी बाजार में कुछ शानदार गाड़ियां दस्तक देने वाली हैं। टाटा की सिएरा ईवी, विनफास्ट के 3 नए मॉडल, टोयोटा और किआ की नई इलेक्ट्रिक एसयूवी लॉन्च होने वाली हैं। इसके साथ ही ई-विटारा, एक्सईवी 9s, पंच ईवी हालिया लॉन्च हुई है। यानी ज्यादा विकल्प होंगे तो ग्राहक ज्यादा आकर्षित होंगे।