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DL: कहीं 1000 सवाल, तो कहीं आंधी-तूफान में टेस्ट; इन देशों में टेढ़ी खीर है ड्राइविंग लाइसेंस बनवाना

Fri, 26 Sep 2025 03:40 PM IST
नीतीश कुमार ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Driving License: ड्राइविंग लाइसेंस पाना हर देश में आसान नहीं होता। कई जगहों पर इसके लिए लंबी ट्रेनिंग, मुश्किल थ्योरी एग्जाम और कड़े रोड टेस्ट पास करने पड़ते हैं। जानिए दुनिया के उन देशों के बारे में जहां ड्राइविंग लाइसेंस बनवाना सबसे कठिन माना जाता है।
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ड्राइविंग टेस्ट (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
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भारत में ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए आपने पहले लर्निंग लाइसेंस बनवाया होगा। फिर एक बेसिक ऑनलाइन या ऑफलाइन थ्योरी टेस्ट देने के बाद आपको ड्राइविंग टेस्ट देने के लिए RTO बुलाया गया होगा। कुल मिलाकर बिना ज्यादा मशक्कत के 30-60 दिन के भीतर आपका ड्राइविंग लाइसेंस बनकर तैयार हो जाता है। लेकिन दुनिया के हर देश में ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने की इतनी सरल प्रक्रिया नहीं है। कई देशों में तो ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने की प्रक्रिया इतनी कठिन है जैसे कोई यूपीएससी एग्जाम पास करना हो! 
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कठिन प्रक्रिया के चलते कई देशों में ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने में लोगों को कई साल लग जाते हैं और खर्च भी तगड़ा होता है। तो चलिए आज उन्हीं देशों की बात करते हैं जहां ड्राइविंग लाइसेंस बनवाना सबसे मुश्किल माना जाता है। 

जर्मनी
जर्मनी में ड्राइविंग सीखने के लिए हर उम्मीदवार को एक अधिकृत ड्राइविंग स्कूल (Fahrschule) से जुड़ना अनिवार्य है। यहां थ्योरी और प्रैक्टिकल, दोनों की ट्रेनिंग दी जाती है। उम्मीदवार को 12 से 14 थ्योरी क्लास अटेंड करनी होती हैं। इन क्लासों में ट्रैफिक नियम, सड़क संकेत, प्राथमिक उपचार (First Aid), और ड्राइविंग एथिक्स सिखाए जाते हैं। थ्योरी एग्जाम में 30 सवाल पूछे जाते हैं, जिनमें से सिर्फ 10% से भी कम गलती की गुंजाइश होती है।
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उम्मीदवार को कम से कम 25 से 45 घंटे तक की प्रैक्टिकल ट्रेनिंग करनी होती है। इसमें रात में ड्राइविंग, हाईवे पर ड्राइविंग, खराब मौसम में ड्राइविंग जैसी ट्रेनिंग शामिल है। जर्मनी में ड्राइविंग लाइसेंस के लिए फर्स्ट एड कोर्स और विजन टेस्ट पास करना अनिवार्य है। बिना इसके आवेदन स्वीकार नहीं होता। थ्योरी पास करने के बाद उम्मीदवार को रोड पर प्रैक्टिकल एग्जाम देना पड़ता है। जर्मनी में ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने का कुल खर्च लगभग €1500 से €2500 (लगभग 1.5–2 लाख रुपये) तक होता है। पूरी प्रक्रिया पूरी करने में आम तौर पर 3 से 6 महीने का समय लग जाता है।

फिनलैंड
फिनलैंड में दो साल का "ग्रैजुएटेड सिस्टम" लागू है। उम्मीदवार को लाइसेंस बनवाने के लिए अधिकृत ड्राइविंग स्कूल से जुड़ना पड़ता है, जहां थ्योरी और प्रैक्टिकल दोनों ट्रेनिंग दी जाती हैं। उम्मीदवार को थ्योरी क्लासेस अटेंड करनी पड़ती हैं। थ्योरी पास करने के बाद सड़क पर प्रैक्टिकल एग्जाम लिया जाता है। उम्मीदवार की पार्किंग, ट्रैफिक सिग्नल, आपातकालीन ब्रेकिंग और खराब मौसम में ड्राइविंग जैसी स्किल्स चेक होती हैं। शुरुआत में अस्थायी लाइसेंस (2 साल के लिए) मिलता है। इस दौरान अगर ड्राइवर नियमों का पालन करता है और कोई बड़ी गलती नहीं करता तो उसे स्थायी लाइसेंस मिल जाता है। इसमें कुल खर्च लगभग €1200 से €2000 (करीब 1–1.5 लाख रुपये) तक आता है। वहीं, पूरी प्रक्रिया में औसतन 4–6 महीने लगते हैं।

सिंगापुर
सिंगापुर में ड्राइविंग लाइसेंस बनवाना काफी सख्त और लंबी प्रक्रिया है। उम्मीदवार को सबसे पहले एक मान्यता प्राप्त ड्राइविंग स्कूल में दाखिला लेना पड़ता है, जहां थ्योरी और प्रैक्टिकल क्लास अनिवार्य होती हैं। थ्योरी टेस्ट पास करने के बाद ही वह प्रैक्टिकल ट्रेनिंग और रोड टेस्ट दे सकता है। प्रैक्टिकल टेस्ट बेहद कठिन माना जाता है क्योंकि इसमें ट्रैफिक नियमों, सड़क संकेतों और ड्राइविंग स्किल्स की गहराई से जांच होती है। अक्सर लोग पहली बार में फेल हो जाते हैं और उन्हें बार-बार परीक्षा देनी पड़ती है। पूरी प्रक्रिया में 6 महीने से 1 साल तक का समय और लगभग 3,000 से 5,000 सिंगापुर डॉलर (करीब 2–3 लाख रुपये) तक खर्च आ सकता है।

जापान
जापान में ड्राइविंग लाइसेंस बनवाना बेहद कठिन और महंगा माना जाता है। यहां उम्मीदवार को पहले ड्राइविंग स्कूल में दाखिला लेना पड़ता है, जहां थ्योरी और प्रैक्टिकल दोनों तरह की ट्रेनिंग अनिवार्य है। थ्योरी परीक्षा में ट्रैफिक नियम, सड़क संकेत और सेफ ड्राइविंग से जुड़े सैकड़ों सवाल पूछे जाते हैं। इसके बाद प्रैक्टिकल टेस्ट होता है, जिसमें छोटी-सी गलती पर भी उम्मीदवार फेल हो सकता है। कई बार लोगों को यह परीक्षा 3–4 बार देनी पड़ती है। पूरी प्रक्रिया में करीब 3 से 6 महीने लग सकते हैं और खर्च लगभग 3,000 से 5,000 अमेरिकी डॉलर (2.5–4 लाख रुपये) तक हो सकता है।

चीन
चीन में थ्योरी एग्जाम सबसे मुश्किल माना जाता है। उम्मीदवारों को 1,000 से ज्यादा सवालों के जवाब देने पड़ते हैं। साथ ही, रोड टेस्ट में ड्राइविंग स्किल्स की बारीकी से जांच की जाती है। कई बार उम्मीदवारों को यह परीक्षा बार-बार देनी पड़ती है। पूरी प्रक्रिया में कुछ महीने लग जाते हैं और जेब भी बहुत अधिक ढीली होती है।

नॉर्वे
अन्य देशों से अलग, नॉर्वे में लोगों के लिए दिन, रात और बर्फीले मौसम में ड्राइविंग टेस्ट पास करना जरूरी होता है। थ्योरी क्लास और परीक्षा पास करने के बाद ही प्रैक्टिकल टेस्ट दिया जा सकता है। प्रैक्टिकल टेस्ट में हाईवे, शहर और खराब मौसम की परिस्थितियों में ड्राइविंग स्किल्स की गहन जांच की जाती है। पूरी प्रक्रिया में 6 महीने से 1 साल तक का समय और लगभग 25,000–40,000 नॉर्वेजियन क्रोनर (करीब 2–3 लाख रुपये) का खर्च आता है।

भारत से तुलना करें तो जर्मनी, फिनलैंड, जापान और सिंगापुर जैसे देशों में ड्राइविंग लाइसेंस पाना सबसे कठिन माना जाता है। इन देशों में ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने की प्रक्रिया लंबी जरूर होती है, लेकिन यहां लाइसेंस सिर्फ उन्हीं लोगों को मिलता है जो हर स्तर पर अपने ड्राइविंग स्किल्स और ट्रैफिक नियमों की समझ साबित कर पाते हैं। यही वजह है कि जर्मनी, फिनलैंड और जापान जैसे देशों की सड़कों को दुनिया की सबसे सुरक्षित सड़कों में गिना जाता है।
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