एक्सपोर्ट में कंपनियों का हाल
मारुति सुजुकी: एक्सपोर्ट के मामले में मारुति हमेशा की तरह नंबर-1 पर रही। कंपनी ने 34.5% की जबरदस्त ग्रोथ के साथ 4,43,625 कारें एक्सपोर्ट कीं। मार्केट में इसका 49% शेयर है, जो किसी भी वित्तीय वर्ष में मारुति का अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड है।
ह्यूंदै: 1,90,125 यूनिट्स (16.4% ग्रोथ) के साथ ह्यूंदै दूसरे नंबर पर रही।
निसान और टोयोटा: निसान ने 82,408 यूनिट्स भेजकर 15.5% की ग्रोथ दर्ज की, जबकि टोयोटा के एक्सपोर्ट में 41% (38,974 यूनिट्स) का उछाल आया।
टाटा मोटर्स: टाटा का बेस भले ही छोटा रहा (10,350 यूनिट्स), लेकिन कंपनी ने सबसे तेज 263.5% की ग्रोथ दर्ज की है।
किसे हुआ नुकसान?
फॉक्सवैगन और होंडा के एक्सपोर्ट में गिरावट आई है। होंडा का एक्सपोर्ट तो 56% गिरकर सिर्फ 26,485 यूनिट्स रह गया।
अगर मॉडल्स की बात करें तो छोटी एसयूवी और हैचबैक कारों ने धूम मचा रखी है:
मारुति फ्रोंक्स: यह भारत से एक्सपोर्ट होने वाली नंबर 1 कार बन गई है। इसकी 90,186 यूनिट्स विदेशों में भेजी गईं (30.5% ग्रोथ)।
मारुति जिम्नी: 82,209 यूनिट्स के साथ जिम्नी दूसरे नंबर पर रही। ग्लोबल मार्केट में इसकी डिमांड लगभग दोगुनी हो गई है।
ह्यूंदै वर्ना: 63,044 यूनिट्स के साथ यह शानदार सेडान तीसरे नंबर पर रही।
निसान मैग्नाइट: इस कॉम्पैक्ट एसयूवी ने 94.5% की जबरदस्त छलांग लगाई है और इसकी 56,704 यूनिट्स एक्सपोर्ट हुईं।
इनके अलावा, मारुति स्विफ्ट, डिजायर, ह्यूंदै ग्रैंड i10, ऑरा और टोयोटा हाइराइडर जैसी कारों की भी विदेशों में जमकर बिक्री हुई। वहीं, मारुति बलेनो, फॉक्सवैगन वर्टस और निसान सनी जैसी कारों की डिमांड में गिरावट देखने को मिली।
क्या है बाजार का ट्रेंड?
FY2026 के एक्सपोर्ट आंकड़े साफ बताते हैं कि विदेशों में भी कॉम्पैक्ट एसयूवी और बजट कारों का ही क्रेज है। फ्रोंक्स, जिम्नी और मैग्नाइट जैसी कारों ने बाजार में अपनी मजबूत पकड़ बना ली है। कुल मिलाकर 'मेक इन इंडिया' ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए यह साल शानदार साबित हुआ है।