अब प्रीमियम ईवी खरीदना सस्ता नहीं
अब तक महाराष्ट्र को भारत का सबसे ईवी-फ्रेंडली राज्य माना जाता था, क्योंकि यहां लग्जरी इलेक्ट्रिक गाड़ियों पर रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन चार्ज लगभग शून्य थे। इससे ग्राहक लाखों रुपये की बचत कर लेते थे। लेकिन अब नियम बदल चुके हैं। अगर आप कोई 70 लाख रुपये की ईवी खरीदते हैं, तो अब आपको लगभग 4 लाख रुपये का अतिरिक्त टैक्स देना होगा। इसी वजह से जून के आखिर तक कई डीलरशिप में ग्राहकों की भीड़ देखी गई। जो टैक्स लागू होने से पहले डिलीवरी लेना चाहते थे।
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सरकार ने टैक्स क्यों बढ़ाया?
सरकार का कहना है कि यह कदम बराबरी और राजस्व दोनों के लिए जरूरी है। पेट्रोल और डीजल गाड़ी खरीदने वालों से रोड टैक्स लिया जाता है, तो फिर लग्जरी ईवी मालिकों से क्यों नहीं? यही सोचकर अब इन पर भी टैक्स लगाया गया है। इसके अलावा, सभी नॉन-ईवी गाड़ियों पर अब 1 प्रतिशत सरचार्ज भी लगाया गया है।
हालांकि आलोचकों का मानना है कि ये फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब Kia, Volvo और Tesla जैसी कंपनियां भारत में और इलेक्ट्रिक मॉडल लॉन्च करने वाली हैं। ऐसे में सरकार का यह कदम गलत संदेश दे सकता है।
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कौन लोग अब भी टैक्स से बच सकते हैं?
अगर आपकी इलेक्ट्रिक गाड़ी की कीमत 30 लाख रुपये से कम है, तो फिलहाल आपको किसी तरह का एक्स्ट्रा टैक्स नहीं देना पड़ेगा। इस दायरे में आने वाले कुछ लोकप्रिय मॉडल हैं। जिसमें Tata Nexon EV (टाटा नेक्सन ईवी), Tata Punch EV (टाटा पंच ईवी), Tata Curvv.EV (अपकमिंग), Tata Harrier.EV (टाटा हैरियर ईवी), MG ZS EV (एमजी जेडएस ईवी), MG Windsor (एमजी विंडसर), Mahindra XUV400 (महिंद्रा एक्सयूवी400) जैसी कारें शामिल हैं।
इन गाड़ियों पर अभी भी रोड टैक्स माफ है और जीएसटी भी कम है। लेकिन लोगों को डर है कि ये राहत भी आगे चलकर खत्म की जा सकती है।
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क्या ग्राहक अब दूसरे राज्यों की ओर देखेंगे?
इस फैसले के बाद कुछ लोग अब अपनी कारों को तेलंगाना या दिल्ली जैसे राज्यों में रजिस्टर कराने का रास्ता अपनाने की सोच रहे हैं। क्योंकि वहां अब भी सब्सिडी और टैक्स छूट मिलती है। अगर ऐसा हुआ, तो महाराष्ट्र को न सिर्फ टैक्स का नुकसान होगा, बल्कि उसे अपने "ईवी-फ्रेंडली स्टेट" की पहचान से भी हाथ धोना पड़ सकता है।
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