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India-EU Deal: भारत-ईयू एफटीए से लग्जरी कारें होंगी सस्ती, क्या खरीदारों को कम कीमतों का तुरंत मिलेगा फायदा?

Tue, 27 Jan 2026 06:33 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

भारत और यूरोपियन यूनियन ने आखिरकार लंबे समय से अटके फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के लिए बातचीत पूरी कर ली है। इस कदम से आखिरकार भारत में यूरोपियन लग्जरी कारें काफी सस्ती हो सकती हैं।
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Volkswagen Touareg - फोटो : Volkswagen
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विस्तार
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भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच लंबे समय से लंबित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) (एफटीए) पर बातचीत आखिरकार पूरी हो गई है। इस समझौते के लागू होने के बाद भारत में यूरोपीय लग्जरी कारें पहले की तुलना में कहीं ज्यादा किफायती हो सकती हैं। समझौते के तहत ईयू में बनी कारों पर आयात शुल्क को मौजूदा 110 प्रतिशत तक के स्तर से घटाकर चरणबद्ध तरीके से 10 प्रतिशत तक लाने का प्रावधान किया गया है।
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तुरंत सस्ती नहीं होंगी कारें, चरणों में मिलेगा फायदा
हालांकि, इस फैसले का असर तुरंत शोरूम कीमतों पर नहीं दिखेगा। एफटीए को अभी औपचारिक रूप से लागू किया जाना बाकी है। और टैरिफ कटौती को चरणों में लागू किया जाएगा। ऐसे में ग्राहकों को तत्काल कीमतों में गिरावट की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस समझौते के अगले साल लागू होने के बाद ही इसके वास्तविक फायदे दिखने लगेंगे।

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BMW, Audi, जैसी ब्रांड्स को होगा सबसे ज्यादा लाभ
एफटीए लागू होने के बाद BMW (बीएमडब्ल्यू), Audi (ऑडी), Porsche (पोर्शे) और Lamborghini (लेम्बोर्गिनी) जैसे प्रीमियम यूरोपीय ब्रांड्स को सबसे ज्यादा फायदा मिलने की संभावना है। समझौते के तहत हर साल अधिकतम 2.5 लाख ईयू-निर्मित कारों को कम आयात शुल्क का लाभ मिलेगा।

फिलहाल भारत में 40,000 डॉलर से कम कीमत वाली आयातित कारों पर लगभग 70 प्रतिशत कस्टम ड्यूटी लगती है। जबकि इससे महंगी कारों पर प्रभावी शुल्क करीब 110 प्रतिशत तक पहुंच जाता है।

 

पहले चरण में 40% तक घट सकती है ड्यूटी
शुल्क में कटौती एक साथ नहीं होगी। पहले चरण में ईयू से आने वाली योग्य कारों पर आयात शुल्क लगभग 40 प्रतिशत तक लाया जा सकता है। इसके बाद भी जीएसटी और सेस लागू रहेंगे। इसके बावजूद कुल टैक्स बोझ मौजूदा स्तर से घटकर लगभग 70-90 प्रतिशत रह सकता है। जिससे कीमतों में 40-50 प्रतिशत तक की संभावित राहत मिल सकती है। आगे चलकर शुल्क को और कम करते हुए 10 प्रतिशत तक लाने की योजना है।

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शुरुआती वर्षों में EV को नहीं मिलेगा फायदा
इस समझौते के शुरुआती पांच वर्षों में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) को टैरिफ छूट के दायरे से बाहर रखा गया है। सरकार का उद्देश्य घरेलू ईवी निर्माताओं द्वारा किए गए निवेश को सुरक्षित रखना है। फिलहाल पेट्रोल और डीजल कारों को ही इस छूट का लाभ मिलेगा। 
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तीसरा सबसे बड़ा कार बाजार, 2030 तक और बढ़ेगी मांग
यह समझौता ऐसे समय पर आया है जब भारत अमेरिका और चीन के बाद दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कार बाजार बन चुका है। अनुमान है कि 2030 तक भारत में सालाना कार बिक्री करीब 60 लाख यूनिट्स तक पहुंच सकती है। ऐसे में भारत-ईयू एफटीए भारतीय ऑटो बाजार में बड़े बदलाव की नींव रख सकता है। हालांकि यह बदलाव धीरे-धीरे देखने को मिलेगा।

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