तुरंत सस्ती नहीं होंगी कारें, चरणों में मिलेगा फायदा
हालांकि, इस फैसले का असर तुरंत शोरूम कीमतों पर नहीं दिखेगा। एफटीए को अभी औपचारिक रूप से लागू किया जाना बाकी है। और टैरिफ कटौती को चरणों में लागू किया जाएगा। ऐसे में ग्राहकों को तत्काल कीमतों में गिरावट की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस समझौते के अगले साल लागू होने के बाद ही इसके वास्तविक फायदे दिखने लगेंगे।
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पहले चरण में 40% तक घट सकती है ड्यूटी
शुल्क में कटौती एक साथ नहीं होगी। पहले चरण में ईयू से आने वाली योग्य कारों पर आयात शुल्क लगभग 40 प्रतिशत तक लाया जा सकता है। इसके बाद भी जीएसटी और सेस लागू रहेंगे। इसके बावजूद कुल टैक्स बोझ मौजूदा स्तर से घटकर लगभग 70-90 प्रतिशत रह सकता है। जिससे कीमतों में 40-50 प्रतिशत तक की संभावित राहत मिल सकती है। आगे चलकर शुल्क को और कम करते हुए 10 प्रतिशत तक लाने की योजना है।
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तीसरा सबसे बड़ा कार बाजार, 2030 तक और बढ़ेगी मांग
यह समझौता ऐसे समय पर आया है जब भारत अमेरिका और चीन के बाद दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कार बाजार बन चुका है। अनुमान है कि 2030 तक भारत में सालाना कार बिक्री करीब 60 लाख यूनिट्स तक पहुंच सकती है। ऐसे में भारत-ईयू एफटीए भारतीय ऑटो बाजार में बड़े बदलाव की नींव रख सकता है। हालांकि यह बदलाव धीरे-धीरे देखने को मिलेगा।