क्या कहता है भारतीय मोटर वाहन अधिनियम?
- फोटो : Hyundai
भारतीय मोटर वाहन अधिनियम, 1988 (Motor Vehicles Act, 1988) के तहत, किसी भी वाहन में ऐसा कोई मॉडिफिकेशन नहीं किया जा सकता जो गाड़ी की मूल संरचना (original structure) को बदल दे। सुप्रीम कोर्ट ने भी अपने फैसले में स्पष्ट किया है कि गाड़ी में किसी भी प्रकार का ऐसा बदलाव जो कंपनी द्वारा दिए गए सेफ्टी स्टैंडर्ड्स को प्रभावित करे, वह गैर-कानूनी होगा।
कौन-कौन से मॉडिफिकेशन वैध हैं?
- फोटो : Hyundai
- एलॉय व्हील्स और टायर अपग्रेड, जब तक वे वाहन की स्टैंडर्ड डाइमेंशन में फिट बैठते हैं।
- कार के इंटीरियर में बदलाव, जैसे कि सीट कवर, डैशबोर्ड मॉडिफिकेशन आदि।
- स्पोर्ट्स स्टिकर्स और ग्राफिक्स, लेकिन यह वाहन की मूल रंग स्कीम को प्रभावित नहीं करना चाहिए।
अगर आप अपनी गाड़ी में कोई भी मॉडिफिकेशन करवा रहे हैं, तो पहले RTO और संबंधित अधिकारियों से अनुमति लेना जरूरी है। अवैध मॉडिफिकेशन से बचने के लिए हमेशा सरकार द्वारा निर्धारित नियमों का पालन करें, ताकि आप कानूनी झंझटों में न फंसें और आपकी गाड़ी सड़क पर चलने के लिए पूरी तरह सुरक्षित रहे।