किआ सोरेंटो बनाम टोयोटा फॉर्च्यूनर
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सोरेंटो एक टेक्नोलॉजी और कंफर्ट-केंद्रित प्रीमियम थ्री-रो एसयूवी है, जबकि फॉर्च्यूनर लंबे समय से अपनी रग्गेडनेस और ऑफ-रोड क्षमता के लिए जानी जाती है। दोनों की इंजीनियरिंग फिलॉसफी अलग है, लेकिन कीमत की रेंज में ओवरलैप होने की वजह से प्रीमियम थ्री-रो एसयूवी खरीदने वाले ग्राहक इन दोनों को जरूर देख सकते हैं। आइए कीमत, इंजन, परफॉर्मेंस, फीचर्स, स्पेस और सेफ्टी के आधार पर दोनों की तुलना करते हैं।
किआ सोरेंटो बनाम टोयोटा फॉर्च्यूनर: कीमत में कितना अंतर?
- कीमत की बात करें तो किआ सोरेंटाे का डीजल वर्जन 27.99 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) से शुरू होता है। वहीं इसका हाइब्रिड वर्जन 29.49 लाख रुपये (एक्स-शोरूम, इंट्रोडक्टरी) कीमत पर उपलब्ध है।
- दूसरी ओर, टोयोटा फॉर्च्यूनर की रेंज वर्तमान में करीब 34 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) से शुरू होती है और टॉप 4x4 वेरिएंट के लिए लगभग 50 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) तक जाती है।
- इस हिसाब से सोरेंटो का एंट्री-लेवल डीजल मॉडल फॉर्च्यूनर के सबसे सस्ते कॉन्फिगरेशन से काफी कम कीमत पर आता है। यानी शुरुआती बजट के मामले में किआ की एसयूवी खरीदारों को बड़ा फायदा देती है।
इंजन और पावरट्रेन में बड़ा अंतर
- दोनों एसयूवी की तुलना करने पर इनके पावरट्रेन में बड़ा अंतर देखने को मिलता है। टोयोटा फॉर्च्यूनर में 2.7-लीटर पेट्रोल इंजन मिलता है, जो 164 hp की पावर और 245 Nm का टॉर्क पैदा करता है। इसके अलावा 2.8-लीटर डीजल इंजन का विकल्प मिलता है, जो 201 hp की पावर और 500 Nm का टॉर्क देता है।
- फॉर्च्यूनर में 4x2 और 4x4 ड्राइवट्रेन का विकल्प मिलता है। इसके 4x4 सिस्टम में लो-रेंज गियरिंग और लॉकिंग डिफरेंशियल भी दिया गया है। यही वजह है कि फॉर्च्यूनर को असली ऑफ-रोडिंग के लिए ज्यादा सक्षम SUV माना जाता है।
- वहीं, किआ सोरेंटो में 2.2-लीटर डीजल इंजन दिया गया है, जो 190 hp की पावर और 442 Nm का टॉर्क पैदा करता है। इस इंजन के साथ 8-स्पीड डुअल-क्लच ट्रांसमिशन मिलता है।
- सोरेंटो में दूसरा विकल्प 1.6-लीटर टर्बो-हाइब्रिड पावरट्रेन है। इसमें 177 hp वाला पेट्रोल इंजन 64 hp की इलेक्ट्रिक मोटर के साथ काम करता है। Sorento के दोनों पावरट्रेन में एडब्ल्यूडी और टेरेन मोड्स मिलते हैं। हालांकि, सोरेंटो में फॉर्च्यूनर की तरह लो-रेंज ट्रांसफर केस नहीं है। इसलिए सोरेंटो को फॉर्च्यूनर जैसी गहरी और कठिन ऑफ-रोडिंग के लिए डिजाइन नहीं किया गया है।
डायमेंशन और केबिन स्पेस में कौन आगे?
- स्पेस की बात करें तो सोरेंटो की लंबाई 4,815 मिमी और चौड़ाई 1,900 मिमी है। इसका व्हीलबेस 2,815 मिमी है। एसयूवी को 6 और 7-सीट लेआउट में उपलब्ध कराया गया है। सोरेंटो की खास बात यह है कि इसमें दूसरी रो तक वेंटिलेटेड सीट्स मिलती हैं। इससे लंबी यात्रा के दौरान पैसेंजर कम्फर्ट बेहतर होने की उम्मीद है।
- टोयोटा फॉर्च्यूनर का व्हीलबेस 2,745 मिमी है और यह सिर्फ सात-सीट लेआउट में आती है। इसकी दूसरी रो की सीटों को स्लाइड, रिक्लाइन और फोल्ड किया जा सकता है, लेकिन यहां वेंटिलेशन की सुविधा नहीं मिलती। इस लिहाज से सोरेंटो ज्यादा प्रीमियम और कम्फर्ट-केंद्रित पैकेज पेश करती है, जबकि टोयोटा फॉर्च्यूनर का फोकस ज्यादा पारंपरिक एसयूवी उपयोगिता और मजबूती पर है।
कौन-सी कार ज्यादा सुरक्षित?
- दोनों की कारों को सुरक्षित बनाया गया है। किआ में आपको लेवल टू प्लस ADAS मिल जाएगा, जिसमें 30 फीचर्स शामिल हैं। इसके अलावा एसयूवी में 10 तक एयरबैग्स मिलते हैं।
- वहीं टोयोटा फॉर्च्यूनर में 7 एयरबैग्स के साथ व्हीकल स्टेबिलिटी कंट्रोल, हिल असिस्ट और ट्रैक्शन कंट्रोल जैसे सेफ्टी फीचर्स दिए गए हैं। हालांकि, फॉर्च्यूनर में एडीएएस का विकल्प नहीं मिलता। इसलिए अगर किसी खरीदार की प्राथमिकता आधुनिक ड्राइवर-असिस्टेंस टेक्नोलॉजी और ज्यादा प्रीमियम सेफ्टी फीचर्स हैं, तो सोरेंटो ज्यादा आकर्षक विकल्प नजर आती है।
सोरेंटो बनाम फॉर्च्यूनर: किसके लिए कौन सी एसयूवी?
- दोनों एसयूवी को एक ही तरह के खरीदारों के लिए नहीं बनाया गया है। सोरेंटो की सबसे बड़ी ताकत इसकी कम शुरुआती कीमत, हाइब्रिड पावरट्रेन, एडब्ल्यूडी, ज्यादा टेक्नोलॉजी, प्रीमियम फीचर्स और Level 2+ ADAS हैं। यह उन खरीदारों को ज्यादा पसंद आ सकती है, जो शहर और हाईवे पर आरामदायक और टेक-हेवी कार चाहते हैं।
- फॉर्च्यूनर दूसरी तरफ रग्गेड एसयूवी कैरेक्टर, 4x4 सिस्टम, लो-रेंज गियरिंग और लॉकिंग डिफरेंशियल के साथ कठिन रास्तों और ऑफ-रोड इस्तेमाल के लिए ज्यादा तैयार है। यानी यहां मुकाबला सिर्फ कीमत या पावर का नहीं है। असल में खरीदार दो अलग-अलग तरह की एसयूवी इंजीनियरिंग के बीच चुनाव कर रहे हैं।
- अगर आपकी प्राथमिकता प्रीमियम केबिन, टेक्नोलॉजी, कम्फर्ट और हाइब्रिड है तो सोरेंटो आकर्षक विकल्प हो सकता है, जबकि रग्गेडनेस और असली ऑफ-रोड क्षमता चाहिए तो फॉर्च्यूनर आपके पसंद पर खरी उतर सकती है। आखिरकार कौन सी कार बेहतर है, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि उसका इस्तेमाल रोजाना शहर और हाईवे पर ज्यादा होना है या खराब रास्तों और ऑफ-रोडिंग में।