पुलिस को अंदरूनी मदद मिलने का शक
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प्लांट की खामियों का उठाया फायदा
पुलिस ने पीटीआई को बताया कि चोरी की इस वारदात को अंजाम देने के लिए आरोपियों ने किआ प्लांट की लॉजिस्टिक व्यवस्था की कमजोरियों का फायदा उठाया। प्लांट में मुख्य फैक्ट्री के अलावा एक सब-असेंबली यूनिट और एक खुला यार्ड है, जहां वाहनों को ट्रांसपोर्ट के लिए खड़ा किया जाता है। चोरी हुए इंजन प्लांट के पिछले हिस्से में बने स्क्रैप डंपिंग रास्ते से बाहर निकाले गए। पुलिस को शक है कि इस पूरी साजिश में अंदरूनी मदद भी मिली है।
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कई बड़े चेहरे हो सकते हैं बेनकाब
फिलहाल पुलिस इस पूरे रैकेट के मास्टरमाइंड्स की तलाश में जुटी है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि कंपनी के ऑडिट और रिकॉर्ड्स में कोई गड़बड़ी तो नहीं की गई थी। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों की जानकारी गोपनीय रखी जा रही है ताकि जांच प्रभावित न हो। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं, जिससे देश के सबसे बड़े ऑटोमोबाइल चोरी नेटवर्क का पर्दाफाश हो सकता है।