राज्य सरकार को दिए सख्त कानून बनाने के निर्देश
कोर्ट ने राज्य सरकार और संबंधित प्रवर्तन एजेंसियों से अपील की है कि ‘व्हीलिंग’ जैसे स्टंट को रोकने के लिए आवश्यक कानूनी प्रावधानों को लागू किया जाए और सख्त कदम उठाए जाएं। अदालत ने कहा, “ऐसी घटनाओं में तेजी से वृद्धि हो रही है, ऐसे में राज्य और एजेंसियों की यह जिम्मेदारी है कि वे इस खतरनाक चलन को दबाने के लिए सख्त कदम उठाएं।”
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कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि युवा मोटरसाइकिल सवार ‘व्हीलिंग’ को बहादुरी समझ बैठते हैं, जबकि यह जानलेवा साबित हो सकता है। यह लापरवाही न सिर्फ कानून-व्यवस्था के लिए खतरा है, बल्कि सामाजिक शांति को भी भंग करती है।
बाइक स्टंट (सांकेतिक तस्वीर)
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जमानत याचिका की गई खारिज
अदालत ने यह टिप्पणियां उस समय की जब वह एक आरोपी की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी। आरोपी पर आरोप था कि उसने अक्टूबर 2024 में दो पिलियन राइडर्स के साथ व्हीलिंग की और पुलिस के रोकने पर हादसे का शिकार हुआ। पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने न सिर्फ पुलिसकर्मियों से झड़प की बल्कि एक सरकारी मोबाइल फोन भी नहर में फेंक दिया।
याचिकाकर्ता ने दावा किया कि उसे पुलिस से व्यक्तिगत विवाद के चलते झूठा फंसाया गया है, लेकिन कोर्ट ने इसे मानने से इनकार कर दिया। अभियोजन पक्ष ने भी बताया कि आरोपी पहले भी इस तरह की घटनाओं में शामिल रहा है और घटनास्थल पर हिंसक रवैया अपनाया था।
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न्यायमूर्ति ने दी कानूनी सलाह
कोर्ट ने कहा कि सिर्फ चार्जशीट दाखिल हो जाने मात्र से जमानत नहीं दी जा सकती। हालांकि, अगर भविष्य में परिस्थितियों में कोई बड़ा बदलाव होता है, तो आरोपी संबंधित अदालत में दोबारा जमानत के लिए आवेदन कर सकता है। इस मामले में याचिकाकर्ता की ओर से वकील सादिक एन गुडवाला ने पैरवी की, जबकि राज्य सरकार की ओर से सरकारी वकील गिरिजा एस. हीरेमठ ने पक्ष रखा।