क्या है JLR इंडिया का 'एश्योर्ड बायबैक प्रोग्राम' और यह कैसे काम करता है?
लग्जरी कार खरीदारों के बीच रीसेल वैल्यू हमेशा से एक बड़ा और मुख्य चिंता का विषय रही है। कंपनी का यह प्रोग्राम इसी डर और अनिश्चितता को दूर करने के लिए बनाया गया है:
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55% तक गारंटेड बायबैक वैल्यू:
गाड़ी खरीदते समय ही भविष्य में उसकी रीसेल वैल्यू तय कर दी जाती है। जो एक्स-शोरूम कीमत का 55 प्रतिशत तक हो सकती है।
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फ्लेक्सिबल ओनरशिप टेन्योर (स्वामित्व की अवधि):
ग्राहक अपनी सुविधा के अनुसार गाड़ी रखने की समयसीमा चुन सकते हैं।
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तय शर्तों के साथ न्यूनतम बायबैक मूल्य:
तय की गई अवधि समाप्त होने के बाद ग्राहकों को न्यूनतम बायबैक वैल्यू की गारंटी मिलती है। हालांकि, यह गारंटी मॉडल की पात्रता, माइलेज सीमाओं और डीलरशिप-विशिष्ट नियमों और शर्तों पर निर्भर करेगी।
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लागत में स्पष्टता:
खरीद के समय ही भविष्य का न्यूनतम मूल्य तय हो जाने से ग्राहकों को गाड़ी के रख-रखाव और मालिकाना हक के कुल खर्च की स्पष्ट जानकारी मिल जाती है। इससे वे भविष्य में नई कार में अपग्रेड करने की योजना अधिक आत्मविश्वास के साथ बना सकते हैं।
कंपनी के प्रबंध निदेशक ने इस नई पहल पर क्या कहा?
इस घोषणा पर टिप्पणी करते हुए जेएलआर इंडिया के प्रबंध निदेशक राजन अंबा ने बताया कि इस प्रोग्राम को ग्राहकों को उनके वाहन के भविष्य के मूल्य की गारंटी देकर अधिक आत्मविश्वास प्रदान करने के मकसद से डिजाइन किया गया है।
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आसान फाइनेंसिंग और लचीली ईएमआई:
एश्योर्ड बायबैक के अलावा, JLR इंडिया ने बेहतर फाइनेंसिंग सॉल्यूशंस भी पेश किए हैं।
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आसान अपग्रेड का मौका:
ये फाइनेंसिंग प्लान अधिक फ्लेक्सिबल मंथली पेमेंट (ईएमआई) विकल्प देते हैं। जिनका मुख्य लक्ष्य कार मालिक के लिए सुविधा को बढ़ाना और भविष्य में नए JLR वाहन में अपग्रेड करना बेहद आसान बनाना है।
यह सुविधा किन-किन मॉडलों पर मिलेगी और इसके नियम क्या हैं?
यदि आप इस योजना का लाभ उठाना चाहते हैं, तो इसके मुख्य दिशानिर्देश नीचे दिए गए हैं:
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पात्र मॉडल्स:
यह योजना भारत में बेचे जाने वाले चुनिंदा रेंज रोवर (Range Rover), डिफेंडर (Defender) और डिस्कवरी (Discovery) मॉडलों के लिए उपलब्ध होगी।
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उपलब्धता:
यह एश्योर्ड बायबैक प्रोग्राम भारत भर में भाग लेने वाले अधिकृत JLR डीलरशिप के माध्यम से उपलब्ध कराया जाएगा।
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शर्तों में भिन्नता:
कंपनी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि एश्योर्ड वैल्यू (गारंटीड रीसेल वैल्यू), ओनरशिप टेन्योर, माइलेज लिमिट (किलोमीटर की सीमा) और पात्रता मानदंड अलग-अलग मॉडल और डीलरशिप के आधार पर अलग हो सकते हैं।