पुरानी या BS4 गाड़ियों के मालिकों को कौन सी बातें याद रखनी चाहिए?
अगर आपकी गाड़ी 2022 से पहले की है, तो घबराने से पहले आपको भारत में गाड़ियों के तकनीकी इतिहास के इन महत्वपूर्ण बिंदुओं को समझना होगा:
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BS4 मानक और इथेनॉल का इतिहास: प्रमुख शहरों में 2010 से और देशभर में 2017 से लागू हुए BS4 उत्सर्जन मानक 'यूरो 4' पर आधारित थे। उस समय देश में पहले से ही E10 (10% इथेनॉल) पेट्रोल पेश किया जा रहा था। इसलिए, वाहन निर्माताओं ने उसी दौर में ईंधन की पाइपलाइनों, सील्स, फ्यूल पंप और इंजन कंट्रोल यूनिट (ECU) को इथेनॉल के अनुकूल अपग्रेड कर दिया था।
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सहनशीलता: जो BS4 गाड़ियां E10 पेट्रोल को झेलने के लिए बनी थीं, वे बिना किसी बड़े मैकेनिकल बदलाव के E20 और कई मामलों में उससे भी अधिक इथेनॉल मिश्रण को आसानी से बर्दाश्त कर सकती हैं। ठीक वैसे ही जैसे ब्राजील जैसे देशों में गाड़ियां वर्षों से E25 और E27 ईंधन पर बिना किसी दिक्कत के चल रही हैं।
पुराने इंजनों पर E20 पेट्रोल का असली मैकेनिकल असर क्या होता है?
2022 से पहले के वाहनों और E20 पेट्रोल के बीच की समस्या को समझने के लिए हमें रसायन विज्ञान (केमिस्ट्री) और ऊर्जा घनत्व (एनर्जी डेंसिटी) के इन 4 प्रमुख बिंदुओं को देखना होगा:
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1. नमी का जाल: इथेनॉल अत्यधिक 'हाइग्रोस्कोपिक' (Hygroscopic) होता है, यानी यह हवा से नमी (पानी) को बहुत तेजी से सोखता है।
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व्याख्या: यदि कोई कार E20 पेट्रोल के साथ हफ्तों तक बेकार खड़ी रहे, तो पानी और इथेनॉल पेट्रोल से अलग होकर टैंक की तली में बैठ जाते हैं (इसे फेज सेपरेशन कहते हैं)। इससे पुराने स्टील के टैंकों में जंग लग सकती है या फ्यूल इंजेक्टर्स ब्लॉक हो सकते हैं। हालांकि, यह केवल तब होता है जब गाड़ी उमस भरे मौसम में, आधे खाली टैंक के साथ कम से कम 3 से 5 हफ्तों तक बिना चले खड़ी रहे।
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2. पार्ट्स का धीरे-धीरे खराब होना: सोशल मीडिया का यह दावा बिल्कुल झूठ है कि E20 रातों-रात आपकी गाड़ी के फ्यूल सिस्टम को पिघला देगा।
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व्याख्या: मारुति सुसुकी जैसे निर्माता 2010 के आसपास से ही इथेनॉल-अनुकूल रबर लाइनों का उपयोग कर रहे हैं। हां, लंबे समय तक E20 के संपर्क में रहने से बहुत पुराने मॉडलों के रबर सील्स, गास्केट और फ्यूल पंप के डायाफ्राम धीरे-धीरे कड़े हो सकते हैं। लेकिन फ्यूल सिस्टम के पार्ट्स को एक 'सेफ्टी मार्जिन' (सुरक्षा दायरे) के साथ डिजाइन किया जाता है ताकि वे ईंधन की खराब क्वालिटी और लंबे समय की टूट-फूट को सह सकें।
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3. 'लीन बर्न' का मामूली जोखिम: इथेनॉल में ऑक्सीजन के अणु होते हैं, इसलिए E20 को पूरी तरह जलने के लिए सामान्य पेट्रोल की तुलना में प्रति यूनिट हवा अधिक ईंधन की आवश्यकता होती है।
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व्याख्या: 2022 से पहले की कारों (विशेषकर BS4 से भी पुरानी गाड़ियों) का इंजन कंट्रोल यूनिट (ECU) कभी-कभी इस अनुपात को सही से एडजस्ट नहीं कर पाता, जिससे इंजन थोड़ा 'लीन' (कम ईंधन और अधिक हवा के मिश्रण पर) चलने लगता है। इससे दहन कक्ष (कंबशन चेंबर) का तापमान थोड़ा बढ़ सकता है। और समय के साथ मामूली इंजन नॉकिंग (खटखट की आवाज) हो सकती है, लेकिन यह बहुत ही मामूली होती है।
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4. माइलेज में थोड़ी गिरावट: शुद्ध गैसोलीन (पेट्रोल) की तुलना में इथेनॉल में लगभग 33% कम ऊर्जा होती है।
अपनी पुरानी कार के इंजन को सुरक्षित कैसे रखें?
अगर आपके पास 2022 से पहले की या प्री-BS6 गाड़ी है और आपके पास E20 पेट्रोल भरवाने के अलावा कोई विकल्प नहीं है, तो आप रखरखाव में ये 4 छोटे बदलाव करके अपने इंजन को पूरी तरह सुरक्षित रख सकते हैं:
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फ्यूल फिल्टर को जल्दी बदलें:
इथेनॉल फ्यूल सिस्टम में जमी पुरानी गंदगी या कचरे को ढीला करके अलग कर सकता है। इसलिए ओनर्स मैनुअल में तय समयसीमा से थोड़ा पहले ही अपनी गाड़ी का फ्यूल फिल्टर बदलवा लें।
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टैंक को खाली न छोड़ें:
गाड़ी में पानी सोखने की प्रक्रिया को कम करने के लिए, कार को 2 से 3 सप्ताह से अधिक समय तक आधे-अधूरे या खाली टैंक के साथ बेकार खड़ा न रहने दें।
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फ्यूल स्टेबलाइजर का उपयोग:
पेट्रोल पंप से ईंधन भरवाते समय समय-समय पर एक अच्छी क्वालिटी का फ्यूल स्टेबलाइजर डालें। जो इथेनॉल और पानी को अलग होने (फेज सेपरेशन) से रोकता है।
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मैकेनिक से नियमित जांच:
जब भी आप गाड़ी का इंजन ऑयल बदलवाने सर्विस सेंटर जाएं, तो मैकेनिक से कहकर फ्यूल लाइन्स, फ्यूल फिलर नेक (ईंधन भरने वाली नली) और गास्केट की जांच जरूर करवाएं कि कहीं उनमें कोई दरार या कड़ापन तो नहीं आ रहा है।