जब लोग नौकरी, पढ़ाई या पारिवारिक कारणों से किसी दूसरे शहर में शिफ्ट होते हैं, तो सबसे बड़ा सवाल अक्सर अपनी कार को लेकर होता है। कई लोग लंबी दूरी खुद ड्राइव करके तय करते हैं, लेकिन भारतीय रेलवे इसके लिए एक और सुविधाजनक विकल्प देता है।
भारतीय रेलवे की कार पार्सल सेवा के जरिए वाहन मालिक अपनी कार को देश के एक शहर से दूसरे शहर तक ट्रेन के माध्यम से भेज सकते हैं। इस सेवा में विशेष रेलवे वैगनों का इस्तेमाल किया जाता है, जिनमें वाहनों को सुरक्षित तरीके से परिवहन किया जाता है।
भारतीय रेलवे अपने पार्सल नेटवर्क के जरिए वाहनों का परिवहन करता है।
इसकी प्रक्रिया कुछ इस तरह है:
कार की बुकिंग शुरुआती रेलवे स्टेशन के पार्सल कार्यालय में की जाती है।
वाहन को विशेष कार-केरियर वैगन में अलग से भेजा जाता है।
कार मालिक के लिए उसी ट्रेन में यात्रा करना जरूरी नहीं होता।
यह सेवा विशेष रूप से 1,400 किलोमीटर से अधिक दूरी वाले रूट्स के लिए काफी उपयोगी मानी जाती है।
यात्रा मार्ग और ट्रेन की उपलब्धता के आधार पर डिलीवरी में आमतौर पर 5 से 10 दिन लग सकते हैं।
बुकिंग से पहले वाहन मालिकों को कुछ जरूरी दस्तावेज जमा करने होते हैं।
इनमें शामिल हैं:
वाहन का रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC)
वैध इंश्योरेंस सर्टिफिकेट
पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल (PUC) प्रमाणपत्र
सरकारी पहचान पत्र, जैसे:
आधार कार्ड
पैन कार्ड
ड्राइविंग लाइसेंस
पता प्रमाण (एड्रेस प्रूफ)
इसके अलावा:
रेलवे पार्सल कार्यालय में एक ट्रांसपोर्टेशन फॉर्म भी भरना पड़ता है।
कुछ मामलों में अतिरिक्त बीमा संबंधी दस्तावेज भी मांगे जा सकते हैं।
कार को ट्रेन से भेजने के लिए कुछ चरणों का पालन करना होता है।
ऐसे रेलवे स्टेशनों की पहचान करें जहां:
वाहन लोड करने की सुविधा हो।
गंतव्य स्टेशन पर वाहन उतारने की सुविधा उपलब्ध हो।
शुरुआती स्टेशन के पार्सल कार्यालय में जाकर:
जरूरी दस्तावेज जमा करें।
बुकिंग प्रक्रिया पूरी करें।
रेलवे अधिकारी वाहन का निरीक्षण करते हैं और शुल्क निर्धारित करते हैं। यह शुल्क कई बातों पर निर्भर करता है:
वाहन का वजन
वाहन का आकार
यात्रा की दूरी
निर्धारित रूट
सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद:
कार को विशेष कैरियर वैगन में लोड किया जाता है।
चेन और व्हील लॉक की मदद से उसे सुरक्षित किया जाता है। ताकि यात्रा के दौरान उसकी हलचल कम से कम हो।
गंतव्य स्टेशन पर:
बुकिंग के समय जारी की गई रेलवे रिसीट (RR) दिखाकर वाहन प्राप्त किया जा सकता है।
कार को ट्रेन से भेजने की लागत कई कारकों पर निर्भर करती है, जिनमें वाहन का प्रकार और यात्रा की दूरी प्रमुख हैं।
अनुमानित खर्च:
हैचबैक कार भेजने का खर्च: 8,000 से 13,000 रुपये
अनुमानित खर्च: 13,000 से 19,000 रुपये
अनुमानित खर्च: 5,500 से 9,000 रुपये
हालांकि, सटीक शुल्क की जानकारी केवल बुकिंग के समय रेलवे पार्सल कार्यालय द्वारा ही दी जा सकती है।
रेलवे को अपनी कार सौपने से पहले विशेषज्ञ कुछ सावधानियां बरतने की सलाह देते हैं।
कार भेजने से पहले:
वाहन को अच्छी तरह साफ कर लें।
अलग-अलग कोणों से उसकी तस्वीरें खींच लें।
कार से सभी निजी सामान निकाल दें।
ईंधन का स्तर कम रखें।
किसी प्रकार के फ्लूइड लीकेज की जांच कर लें।
अतिरिक्त चाबी अपने पास रखें।
अलार्म सिस्टम को बंद कर दें, ताकि यात्रा के दौरान अनावश्यक परेशानी न हो।
लंबी दूरी पर स्थानांतरण करने वालों के लिए यह सेवा कई मामलों में फायदेमंद साबित हो सकती है।
मुख्य फायदे:
लंबी ड्राइविंग की थकान से बचाव
ईंधन खर्च में बचत
कई राज्यों से होकर ड्राइव करने की जरूरत नहीं
अपेक्षाकृत किफायती विकल्प
हालांकि:
डिलीवरी में कुछ दिन लग सकते हैं।
परिचालन कारणों से कभी-कभी देरी भी हो सकती है।
इसके बावजूद, कम लागत और भारतीय रेलवे के विस्तृत नेटवर्क के कारण यह सेवा देश में वाहन स्थानांतरण के लिए एक लोकप्रिय विकल्प बनी हुई है।
कार भेजने की बुकिंग प्रक्रिया, शुल्क और अन्य जानकारियों के लिए वाहन मालिक:
अपने नजदीकी रेलवे पार्सल कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं।
या भारतीय रेलवे के आधिकारिक पार्सल सेवा पोर्टल से जानकारी हासिल कर सकते हैं।