सहायक आय से डीलरों के ऑपरेटिंग मार्जिन में कितना सुधार होगा?
वाहनों की बिक्री बढ़ने के साथ ही इंश्योरेंस, एक्सेसरीज, स्पेयर पार्ट्स और सर्विसिंग जैसे एंसीलरी स्रोतों से होने वाली कमाई में तेज इजाफा हो रहा है:
- राजस्व में हिस्सेदारी: डीलरों की कुल आय में एंसीलरी बिजनेस का हिस्सा वित्त वर्ष 2026 में बढ़कर लगभग 16 प्रतिशत हो गया है, जिसके मध्यम अवधि में 17-18 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है।
- ऑपरेटिंग मार्जिन: इस अतिरिक्त आय के दम पर इस चालू वित्त वर्ष में डीलरों का ऑपरेटिंग मार्जिन सुधरकर 3.5-3.7 प्रतिशत तक पहुंच सकता है।
शोरूम विस्तार और ईवी इंफ्रास्ट्रक्चर पर कितना खर्च कर रहे हैं डीलर्स?
डीलर्स अपने शोरूम नेटवर्क के विस्तार और इलेक्ट्रिक व्हीकल क्षमताओं को विकसित करने के लिए अगले दो से तीन वर्षों में कर्ज के जरिए पूंजीगत व्यय की योजना बना रहे हैं:
- कैपेक्स इंटेंसिटी: EBITDA के मुकाबले कैपेक्स इंटेंसिटी इस वित्त वर्ष बढ़कर 40-42 प्रतिशत होने का अनुमान है, जो पिछले तीन वर्षों में औसतन 38 प्रतिशत थी।
- इन्वेंटरी में कमी: उच्च निवेश के बावजूद, मजबूत कैश फ्लो और कम इन्वेंटरी स्तर से फाइनेंसिंग का दबाव सीमित रहेगा। 31 मार्च 2026 तक गाड़ियों का इन्वेंटरी स्तर घटकर 30-35 दिन रह गया है (जो एक साल पहले 50-55 दिन था) और वित्त वर्ष 2027 के अंत तक इसके लगभग 30 दिन पर बने रहने की उम्मीद है।
डीलरों की वित्तीय स्थिति और क्रेडिट मैट्रिक्स में कितना सुधार होने की उम्मीद है?
क्रिसिल रेटिंग्स के अनुसार, वित्त वर्ष 2027 में डीलरों की वित्तीय स्थिति और मजबूत होगी:
- गियरिंग रेशियो: गियरिंग रेशियो सुधरकर 1.0-1.1 गुना रहने का अनुमान है (जो पिछले वित्त वर्ष 1.15 गुना था)।
- इंटरेस्ट कवरेज: इंटरेस्ट कवरेज रेशियो सुधरकर 3.4-3.5 गुना रहने की उम्मीद है (जो पिछले वित्त वर्ष 3.0 गुना था)।
यह सकारात्मक आउटलुक लगातार बनी रहने वाली पैसेंजर व्हीकल मांग पर निर्भर करेगा, जिसमें शहरी मांग की गति और मौसम से प्रभावित होने वाली ग्रामीण आय मुख्य निगरानी बिंदु रहेंगे।