फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

SUV: भारत में मिड-साइज SUV की मार्केट हिस्सेदारी कितनी बढ़ी? कॉम्पैक्ट SUV से कितनी आगे निकल गई? जानें वजह

Sat, 22 Aug 2026 12:19 PM IST
Amar Sharma ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

बाजार में स्वस्थ मांग, महंगे और ज्यादा फीचर्स वाले वाहनों की बढ़ती पसंद यानी प्रीमियमाइजेशन और वाहन कंपनियों की समय-समय पर होने वाली कीमत बढ़ोतरी से डीलरों की आय में 10-12% की वृद्धि का अनुमान है।
विज्ञापन
Car Showroom - फोटो : AI
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

क्रिसिल रेटिंग्स (CRISIL Ratings) द्वारा 102 डीलरों के किए गए विश्लेषण के अनुसार, भारतीय पैसेंजर व्हीकल (PV) डीलर्स इस चालू वित्त वर्ष में 10-12 प्रतिशत की राजस्व वृद्धि दर्ज कर सकते हैं। इस बढ़त को मजबूत मांग, कारों के प्रीमियम होने के रुझान और वाहन निर्माताओं (OEMs) द्वारा समय-समय पर बढ़ाई गई कीमतों से समर्थन मिल रहा है।
विज्ञापन

गौरतलब है कि पिछले वित्त वर्ष में सुस्त शुरुआत के बाद दूसरी छमाही में बाजार में सुधार आया था, जिससे डीलरों ने 13 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की थी। वहीं, वित्त वर्ष 2027 में बढ़ती डिस्पोजेबल इनकम, बेहतर सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर, कम ब्याज दरों और मल्टीपल-वाहन स्वामित्व के बल पर वाहन बिक्री की मात्रा में 8-10 प्रतिशत की वृद्धि होने का अनुमान है।

प्रीमियम कारों और एसयूवी की बढ़ती मांग से डीलरों की कमाई पर क्या असर पड़ रहा है?

भारतीय ग्राहकों में स्पोर्टी, बड़ी और एडवांस्ड फीचर्स वाली एसयूवी खरीदने की होड़ बनी हुई है। इस प्रीमियम रुख के साथ-साथ ऑटो कंपनियों द्वारा की जाने वाली मूल्य वृद्धि के कारण इस वित्त वर्ष में डीलरों का रियलाइजेशन (प्रति वाहन शुद्ध आय) 2-3 प्रतिशत बढ़ने की उम्मीद है।
ग्रामीण मांग पर अल-नीनो और पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव के कारण ईंधन की बढ़ती कीमतों का थोड़ा नकारात्मक असर पड़ सकता है। लेकिन क्रिसिल का मानना है कि मजबूत बुनियादी मांग इन चुनौतियों से निपटने में सक्षम होगी।
 

Passenger Vehicles - फोटो : ANI

सहायक आय से डीलरों के ऑपरेटिंग मार्जिन में कितना सुधार होगा?

वाहनों की बिक्री बढ़ने के साथ ही इंश्योरेंस, एक्सेसरीज, स्पेयर पार्ट्स और सर्विसिंग जैसे एंसीलरी स्रोतों से होने वाली कमाई में तेज इजाफा हो रहा है:
  • राजस्व में हिस्सेदारी: डीलरों की कुल आय में एंसीलरी बिजनेस का हिस्सा वित्त वर्ष 2026 में बढ़कर लगभग 16 प्रतिशत हो गया है, जिसके मध्यम अवधि में 17-18 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है।
  • ऑपरेटिंग मार्जिन: इस अतिरिक्त आय के दम पर इस चालू वित्त वर्ष में डीलरों का ऑपरेटिंग मार्जिन सुधरकर 3.5-3.7 प्रतिशत तक पहुंच सकता है।

शोरूम विस्तार और ईवी इंफ्रास्ट्रक्चर पर कितना खर्च कर रहे हैं डीलर्स?

डीलर्स अपने शोरूम नेटवर्क के विस्तार और इलेक्ट्रिक व्हीकल क्षमताओं को विकसित करने के लिए अगले दो से तीन वर्षों में कर्ज के जरिए पूंजीगत व्यय की योजना बना रहे हैं:
  • कैपेक्स इंटेंसिटी: EBITDA के मुकाबले कैपेक्स इंटेंसिटी इस वित्त वर्ष बढ़कर 40-42 प्रतिशत होने का अनुमान है, जो पिछले तीन वर्षों में औसतन 38 प्रतिशत थी।
  • इन्वेंटरी में कमी: उच्च निवेश के बावजूद, मजबूत कैश फ्लो और कम इन्वेंटरी स्तर से फाइनेंसिंग का दबाव सीमित रहेगा। 31 मार्च 2026 तक गाड़ियों का इन्वेंटरी स्तर घटकर 30-35 दिन रह गया है (जो एक साल पहले 50-55 दिन था) और वित्त वर्ष 2027 के अंत तक इसके लगभग 30 दिन पर बने रहने की उम्मीद है।
विज्ञापन

Car Showroom - फोटो : AI

डीलरों की वित्तीय स्थिति और क्रेडिट मैट्रिक्स में कितना सुधार होने की उम्मीद है?

क्रिसिल रेटिंग्स के अनुसार, वित्त वर्ष 2027 में डीलरों की वित्तीय स्थिति और मजबूत होगी:
  • गियरिंग रेशियो: गियरिंग रेशियो सुधरकर 1.0-1.1 गुना रहने का अनुमान है (जो पिछले वित्त वर्ष 1.15 गुना था)।
  • इंटरेस्ट कवरेज: इंटरेस्ट कवरेज रेशियो सुधरकर 3.4-3.5 गुना रहने की उम्मीद है (जो पिछले वित्त वर्ष 3.0 गुना था)।
यह सकारात्मक आउटलुक लगातार बनी रहने वाली पैसेंजर व्हीकल मांग पर निर्भर करेगा, जिसमें शहरी मांग की गति और मौसम से प्रभावित होने वाली ग्रामीण आय मुख्य निगरानी बिंदु रहेंगे।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें