इलेक्ट्रिक व्हीकल इकोसिस्टम को बढ़ावा देने और विकसित भारत के दृष्टिकोण को साकार करने की कोशिश में, भारतीय सरकार ने एक टास्क फोर्स बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। जो उद्योग के लिए रोडमैप तैयार करेगा। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, भारी उद्योग मंत्रालय (एमएचआई) ने वाहन निर्माताओं को प्रक्रिया शुरू करने के लिए एक पत्र भेजा है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि एमएचआई भारतीय उद्योग परिसंघ (फिक्की) और अन्य एजेंसियों के सहयोग से इस टास्क फोर्स की स्थापना को अंतिम रूप देगा।
रिपोर्ट में उस पत्र के हवाले से बताया गया है कि ईवी टास्क फोर्स का गठन हितधारकों के साथ कार्यशालाओं और बैठकों के जरिए जुड़ने के लिए किया गया है। ताकि इलेक्ट्रिक वाहन को अपनाने और बुनियादी ढांचा विकास के विभिन्न पहलुओं पर उनके विचारों और सिफारिशों को इकट्ठा किया जा सके। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारत में इलेक्ट्रिक वाहन को अपनाने के लिए एक कार्य योजना बनाने के लिए विभिन्न एजेंसियों से 11 विषयों पर उनके संबंधित इनपुट मांगे गए हैं।
एजेंसियों ने पहले ही देश को वैश्विक स्तर पर इलेक्ट्रिक मोबिलिटी परिवर्तन के लिए अग्रणी बनाने की आधारशिला रखने का काम शुरू कर दिया है। रिपोर्ट में परियोजना से जुड़े एक व्यक्ति के हवाले से कहा गया है, "ईवी टास्क फोर्स की स्थापना से जुड़ी एजेंसियों ने विकसित भारत 2047 के लिए वाहन उद्योग दृष्टि योजना परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए मूल उपकरण निर्माताओं (ओईएम) से संपर्क करना शुरू कर दिया है।"
भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री में 2024 में अब तक 45 प्रतिशत से ज्यादा की मजबूत बढ़ोतरी देखी गई है। 2023 में कुल इलेक्ट्रिक वाहन पंजीकरण की संख्या 15 लाख यूनिट्स से ज्यादा हो गई, जो पिछले वर्ष के 10 लाख यूनिट्स से ज्यादा है। इन सभी ने भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की समग्र पैठ को 2022 में दर्ज 4.8 प्रतिशत के मुकाबले 6.3 प्रतिशत तक पहुंचा दिया है। फेम योजना की कामयाबी के बाद, सरकार ने इस साल की शुरुआत में देश में ईवी को अपनाने को बढ़ावा देने के प्रयास में 500 करोड़ रुपये के परिव्यय (आउटले) के साथ इलेक्ट्रिक मोबिलिटी प्रमोशन स्कीम (ईएमपीएस) 2024 नाम की एक नई योजना शुरू की। टास्क फोर्स का गठन उस दृष्टि का अगला कदम है।
कौन क्या करेगा
रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि टास्क फोर्स में विभिन्न एजेंसियों को अलग-अलग क्षेत्रों का काम सौंपा गया है। जर्मन सरकार और यूरोपीय संघ (ईयू) की एजेंसी, जीआईजेड (ड्यूश गेसेलशाफ्ट फर इंटरनेशनल जुसामेनारबीट) और फिक्की ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर ध्यान केंद्रित करेंगे। जबकि रिटेल मोटर इंडस्ट्री ऑर्गनाइजेशन (आरएमआई) दो और तीन-पहिया वाहनों पर ध्यान केंद्रित करेगा।
इंडियन बैटरी स्वैपिंग एसोसिएशन (आईबीएसए) को इलेक्ट्रिक वाहन बैटरी स्वैपिंग पर पहल करने का काम सौंपा गया है। इलेक्ट्रिक ट्रकों से संबंधित मामलों को संभालने के लिए इंटरनेशनल काउंसिल ऑन क्लीन ट्रांसपोर्टेशन (आईसीसीटी) को जिम्मेदारी दी गई है, और विश्व बैंक (डब्ल्यूबी) इलेक्ट्रिक बसों के विषय की देखरेख करेगा। डब्ल्यूआरआई इंडिया (वर्ल्ड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट)/फिक्की को इलेक्ट्रिक चार पहिया वाहनों पर गौर करने का काम सौंपा गया है। और अमेरिकी अंतर्राष्ट्रीय विकास सहयोग एजेंसी (यूएसएआईडी) पावर इलेक्ट्रॉनिक्स, उपकरणों और मोटरों के लिए जिम्मेदार होगी।
इंडियन एनर्जी स्टोरेज अलायंस (भारतीय ऊर्जा भंडारण गठबंधन) (आईईएसए) को एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल (एसीसी) टेक्नोलॉजी की देखरेख का काम सौंपा गया है। प्राइमस पार्टनर्स दुर्लभ पृथ्वी चुम्बकों के विकास का पता लगाएंगे, जो इलेक्ट्रिक मोटरों के लिए जरूरी हैं। जलवायु रुझान अनुपालन और मानकों को सुनिश्चित करने के लिए परीक्षण एजेंसियों के साथ संपर्क करेगा। जबकि एनर्जी एंड रिसॉर्स इंस्टीट्यूट (ऊर्जा और संसाधन संस्थान) (टेरी) को तेजी से बढ़ते ईवी क्षेत्र का समर्थन करने के लिए कौशल और कार्यबल विकास का काम सौंपा गया है।