फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Indian Entry-level Bikes: नई बाइक लेने का सोच रहे? खरीदने से पहले जान लें इन हाई-टेक फीचर्स का असली सच

Sat, 31 Jan 2026 10:01 AM IST
जागृति ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Commuter Motorcycle Features: भारतीय मास-मार्केट मोटरसाइकिल सेगमेंट हर नए अपडेट के साथ पहले से ज्यादा चमकदार और महंगा होता जा रहा है। जो फीचर्स कभी केवल बड़ी और महंगी टूरिंग या एडवेंचर बाइक्स तक सीमित थे, वे अब कंप्यूटर सेगमेंट में भी दिखाई देने लगे हैं, लेकिन क्या ये फीचर्स वाकई जरूरी हैं या सिर्फ दिखावे के लिए? जानिए इस लेख में...
विज्ञापन
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : freepik
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

भारतीय एंट्री-लेवल और कंप्यूटर बाइक्स अब सिर्फ माइलेज का साधन नहीं रहीं, बल्कि फीचर-लोडेड प्रोडक्ट के रूप में बेची जा रही हैं। ब्लूटूथ डैशबोर्ड, राइड मोड्स और यहां तक कि क्रूज कंट्रोल जैसे फीचर्स 150–180cc बाइक्स में तेजी से जोड़े जा रहे हैं। हालांकि ये फीचर्स कागज और विज्ञापन में प्रीमियम लगते हैं, लेकिन रोजमर्रा की शहरी सवारी में इनका व्यावहारिक फायदा  सीमित है। एक्सपर्ट्स इन्हें मार्केटिंग गोल्ड, यूजर वैल्यू सिल्वर मान रहे हैं।

क्रूज कंट्रोल: शहर की बाइक पर बेवजह का बोझ

क्रूज कंट्रोल हार्ले-डेविडसन पैन अमेरिका या बीएमडब्ल्यू जीएस जैसी हाईवे-ओरिएंटेड बाइक्स पर उपयोगी है, लेकिन 150–180cc की कम्यूटर बाइक पर इसका इस्तेमाल लगभग ना के बराबर है। शहर की ट्रैफिक-भरी सड़कों, गड्ढों और स्पीड ब्रेकर के बीच स्थिर रफ्तार बनाए रखना मुश्किल होता है। ऐसे में यह फीचर ज्यादातर ब्रोशर की शोभा बनकर रह जाता है।

विज्ञापन


ये भी पढ़े: RHD: क्यों 75 देशों में चलती हैं राइट-हैंड-ड्राइव गाड़ियां, जानें भारत को इससे कैसे मिलता है वैश्विक फायदा

टर्न-बाय-टर्न नेविगेशन: नाम बड़ा, दर्शन छोटे
इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर में मिलने वाला टर्न-बाय-टर्न नेविगेशन सुनने में हाई-टेक लगता है, लेकिन व्यवहार में यह अधूरा अनुभव देता है। छोटा एलसीडी डिस्प्ले, धीमी ब्लूटूथ कनेक्टिविटी और सीमित मैप सपोर्ट इसे निराशाजनक बनाते हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि हैंडलबार पर लगा एक साधारण स्मार्टफोन इससे कहीं बेहतर काम करता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

राइड मोड्स: परफॉर्मेंस कम, टैगलाइन ज्यादा

इको, रेन या स्पोर्ट जैसे राइड मोड्स कम्यूटर बाइक्स को स्पोर्टी छवि देने में मदद करते हैं, लेकिन सीमित पावर आउटपुट और बजट ईसीयू के चलते इन मोड्स के बीच वास्तविक परफॉर्मेंस अंतर लगभग शून्य होता है। इसके बावजूद स्पोर्ट मोड शब्द सुनते ही ये युवाओं को आकर्षित करने में मार्केटिंग के लिए बेहद असरदार साबित होता है।

ये भी पढ़े: Budget Expectations: बजट से ईवी सेक्टर को बड़ी उम्मीदें, 2025 में ईवी बिक्री 77% बढ़ी, लेकिन चुनौतियां बरकरार

मार्केटिंग गोल्ड क्यों हैं ये फीचर्स?

ऑटो इंडस्ट्री के जानकारों के अनुसार, ये फीचर्स एक भावनात्मक अपील पैदा करते हैं। बाइक महंगी और एडवांस महसूस होती है और शोरूम में प्रोडक्ट अलग दिखता है। साथ ही सोशल मीडिया और डिजिटल विज्ञापन में चर्चा बनती है, भले ही ये फीचर्स रोजाना की सवारी में कुछ खास बदलाव न लाएं, लेकिन ब्रांड्स के लिए ये बिक्री बढ़ाने का मजबूत हथियार बन जाता हैं।

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें