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Automobile Industry: जीएसटी के सहारे ऑटो इंडस्ट्री का बड़ा दांव, ₹1 लाख करोड़ का विस्तार प्लान

Wed, 18 Feb 2026 03:58 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

भारत की ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री एक अहम विस्तार के दौर में जा रही है। जिसमें कार बनाने वाली कंपनियां मिलकर अगले 5-6 वर्षों में लगभग 1 लाख करोड़ रुपये का निवेश करने की तैयारी में हैं।
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Car Plant - फोटो : Freepik
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विस्तार
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भारत का ऑटोमोबाइल उद्योग एक बड़े विस्तार के दौर में प्रवेश कर चुका है। देश की प्रमुख कार निर्माता कंपनियां अगले 5-6 वर्षों में करीब 1 लाख करोड़ रुपये के निवेश की योजना बना रही हैं। इस बड़े निवेश के पीछे जीएसटी दरों में स्थिरता और स्पष्टता को मुख्य वजह माना जा रहा है। जिससे कंपनियों को लंबी अवधि की मांग और उत्पादन की बेहतर तस्वीर मिली है। 
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उत्पादन क्षमता में कितना बड़ा उछाल आने वाला है?
वर्तमान में भारत की कुल पैसेंजर व्हीकल उत्पादन क्षमता लगभग 55 लाख यूनिट्स सालाना है। प्रस्तावित निवेश योजनाओं के साथ यह क्षमता बढ़कर 90 लाख यूनिट्स प्रति वर्ष तक पहुंच सकती है।
यानी करीब 65 प्रतिशत की बढ़ोतरी, जो अतिरिक्त 35 लाख गाड़ियों के बराबर होगी।

उद्योग जगत का मानना है कि जीएसटी से मिला प्रोत्साहन अस्थायी नहीं है। बल्कि आने वाले कई वर्षों तक मांग को सहारा देगा। 

Car Plant - फोटो : Freepik
Maruti Suzuki कितना विस्तार करने जा रही है?
देश की सबसे बड़ी कार निर्माता मारुति सुजुकी इंडिया इस विस्तार की अगुवाई कर रही है।
कंपनी FY27 से FY30 के बीच 15 लाख यूनिट्स सालाना अतिरिक्त क्षमता जोड़ने की योजना पर काम कर रही है। यह उसकी मौजूदा 26 लाख यूनिट क्षमता का आधे से भी ज्यादा है।

इसका बड़ा हिस्सा गुजरात के गांधीनगर में नए ग्रीनफील्ड प्लांट से आएगा, जिसकी सालाना क्षमता 10 लाख यूनिट होगी। इस परियोजना पर करीब ₹35,000 करोड़ का निवेश प्रस्तावित है।

Toyota Kirloskar Motor की क्या रणनीति है?
बंगलूरू स्थित टोयोटा किर्लोस्कर मोटर भी भारत में बड़ी छलांग लगाने की तैयारी में है। कंपनी अपनी उत्पादन क्षमता को दोगुना कर 10 लाख यूनिट्स सालाना तक ले जाने का लक्ष्य रखती है।

इसके तहत कर्नाटक के बिदाड़ी प्लांट में 1 लाख यूनिट्स की बढ़ोतरी और महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में एक नया बड़ा प्लांट लगाने की योजना है। यह यूनिट खास तौर पर एक्सपोर्ट को ध्यान में रखकर बनाई जाएगी।
Fortuner (फॉर्च्यूनर) और Innova (इनोवा) जैसे मॉडलों की लंबी वेटिंग लिस्ट भी इस विस्तार की जरूरत को दर्शाती है। 

Car Plant - फोटो : Freepik
Mahindra & Mahindra क्यों कर रही है सबसे बड़ा विस्तार?
एसयूवी सेगमेंट की दिग्गज Mahindra & Mahindra (महिंद्रा एंड महिंद्रा) ने अब तक की अपनी सबसे बड़ी विस्तार योजना घोषित की है।
कंपनी नागपुर में 5 लाख यूनिट और चाकन में 2.4 लाख यूनिट की नई उत्पादन सुविधाएं जोड़ रही है।

FY26 के आखिर तक जहां इसकी क्षमता 7.74 लाख यूनिट्स होगी। वहीं FY29-30 तक यह 15 लाख यूनिट्स सालाना से अधिक हो जाएगी। इसका बड़ा फायदा 2027 में लॉन्च होने वाली नई कॉम्पैक्ट एसयूवी रेंज को मिलेगा। 

Tata Motors का विस्तार कितना संतुलित है?
देश की दूसरी सबसे बड़ी कार निर्माता Tata Motors (टाटा मोटर्स) अपेक्षाकृत संतुलित रणनीति अपना रही है।
कंपनी तमिलनाडु में 9,000 करोड़ रुपये के निवेश से एक नया प्लांट स्थापित कर रही है, जिसकी क्षमता 2.5 लाख यूनिट्स सालाना होगी।

मौजूदा प्लांट्स की क्षमता को भी बढ़ाकर लगभग 10 लाख यूनिट तक ले जाया जा सकता है। इस अतिरिक्त उत्पादन का इस्तेमाल ईवी और अगली पीढ़ी की एसयूवी के लिए किया जाएगा।

Car Plant - फोटो : Volkswagen
JSW MG Motor किन सेगमेंट्स पर दांव लगा रही है?
JSW MG Motor India (जेएसडब्ल्यू एमजी मोटर इंडिया) करीब 4,000 करोड़ रुपये का निवेश कर अपनी उत्पादन क्षमता को लगभग तीन गुना बढ़ाकर 3 लाख यूनिट्स सालाना कर रही है।
कंपनी प्लग-इन हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक व्हीकल्स की नई रेंज लाने की तैयारी में है। एमजी पहले ही भारत की दूसरी सबसे बड़ी ईवी ब्रांड बन चुकी है। 
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क्या यह सिर्फ अस्थायी तेजी है या स्थायी बदलाव?
विशेषज्ञों के मुताबिक यह निवेश चक्र केवल मांग आधारित नहीं, बल्कि भारत के ऑटो मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम में संरचनात्मक बदलाव का संकेत है।
जीएसटी में स्थिरता, निरंतर मांग, और निर्यात की बढ़ती संभावनाओं के चलते भारत को ग्लोबल ऑटो हब के रूप में तैयार किया जा रहा है।

यदि सभी योजनाएं समय पर पूरी होती हैं, तो आने वाले दशक में भारत की पैसेंजर व्हीकल उत्पादन क्षमता 90 लाख यूनिट्स सालाना तक पहुंच जाएगी। जो हाल के वर्षों का सबसे बड़ा औद्योगिक विस्तार माना जाएगा। 

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